Budget 2026: बजट पर प्रियंका गांधी का तंज, बोली- “उम्मीदें कम हैं, देखते हैं क्या होता है”
Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज़ हैं। बजट से पहले विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बजट को लेकर अपनी अपेक्षाओं पर प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने कहा, "मुझे ज्यादा उम्मीदें नहीं हैं, लेकिन देखते हैं।" उनका यह बयान सरकार की आर्थिक नीतियों और अब तक के बजट अनुभवों पर विपक्ष की सतर्क सोच को दर्शाता है।

प्रियंका गांधी वाड्रा ने यह टिप्पणी मीडिया से बातचीत के दौरान की। उन्होंने संकेत दिया कि आम जनता को राहत देने, महंगाई पर नियंत्रण, बेरोज़गारी और सामाजिक कल्याण जैसे अहम मुद्दों पर सरकार का रिकॉर्ड अब तक संतोषजनक नहीं रहा है। इसी कारण उन्होंने बजट से बहुत अधिक अपेक्षाएं न होने की बात कही, हालांकि उन्होंने अंतिम फैसले को बजट पेश होने के बाद देखने की बात भी जोड़ी।
कांग्रेस लंबे समय से यह आरोप लगाती रही है कि केंद्र सरकार के बजट में आम आदमी, किसान, युवा और मध्यम वर्ग की जरूरतों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिलती। पार्टी का कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, रोज़गार के अवसर सीमित हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दबाव में है। ऐसे में बजट 2026 से जनता को बड़ी राहत की उम्मीद थी, लेकिन प्रियंका गांधी का बयान बताता है कि विपक्ष फिलहाल सरकार की नीतियों को लेकर आश्वस्त नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रियंका गांधी वाड्रा का यह बयान कांग्रेस की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह बजट के बाद सरकार को उसके वादों और घोषणाओं के आधार पर घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अगर बजट में सामाजिक न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे संसद और सड़क दोनों पर आवाज़ उठाएंगे।
वहीं, सत्तारूढ़ दल की ओर से बजट को "विकासोन्मुख और भविष्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला" बताया जा रहा है। सरकार का दावा है कि बजट 2026 में बुनियादी ढांचे, निवेश, नवाचार और आर्थिक स्थिरता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026 को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। प्रियंका गांधी वाड्रा का संक्षिप्त लेकिन स्पष्ट बयान यह दर्शाता है कि विपक्ष सरकार से बड़े बदलावों की उम्मीद तो कर रहा है, लेकिन पिछले अनुभवों के कारण वह सतर्क भी है। अब सबकी निगाहें बजट पेश होने पर टिकी हैं, जिससे यह साफ होगा कि सरकार आम जनता और अर्थव्यवस्था को लेकर कौन-सी दिशा अपनाती है।












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