निर्मला सीतारमण ने रचा ये इतिहास, जानें भारत का भाग्य बदलने वाले वित्त मंत्रियों के नाम दर्ज पुराने रिकार्ड
Aam Budget 2024: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मोदी सरकार 3.0 का पहला वित्तीय वर्ष 2024-25 का बजट पेश कर रही हैं। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र वाले भारत देश का वित्त मंत्री का पद संभालना प्रतिष्ठा के साथ बड़ी ही जिम्मेदारी का काम है, क्योंकि बजट सरकार की आर्थिक नीति की दिशा तय करता है।
1947 में देश की आजादी के बाद निर्मला सीतारमण समेत देश कई दिग्गज नेताओं ने इस प्रतिष्ठित पद को संभालते हुए देश की राजकोषीय नीतियों को आकार दिया है। साथ ही उनके द्वारा लिए गए ऐतिहासिक फैसलों ने देश की तरक्की में अहम भूमिका निभाई।

वहीं निर्मला सीतारमण ने सातवां बजट पेश करते हुए एक 60 साल पुराना रिकार्ड ब्रेक कर इतिहास में सदा के लिए अपना नाम दर्ज कर दिया है। आइए जानते हैं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कौन सा रिकार्ड तोड़ा, साथ ही जानते हैं उन वित्त मंत्रियों के बारे में जिन्होंने रिकार्ड बनाएं।
निर्मला सीतारमण ने रचा इतिहास
सबसे पहले बात करते हैं मोदी सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारण की, 23 जुलाई को सीतारमण ने वित्त मंत्री के तौर पर लगातार अपना सातवां बजट पेश की। ऐसा करने वाली सीतारमण देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री बनने का रिकार्ड दर्ज करते हुए, देश के इतिहास में अपना नाम दर्ज कर चुकी हैं।
निर्मला सीतारमण ने तोड़ा ये रिकार्ड
निर्मला सीतारमण ने लगातार सात बार आम बजट पेश करके 60 साल पहले मोरारजी देसाई के रिकार्ड को तोड़ दिया है। लगातार छह बजट के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
मोरारजी देसाई के नाम दर्ज ये रिकॉर्ड
मोरारजी देसाई के नाम वित्त मंत्री के तौर पर सबसे ज़्यादा बजट पेश करने का रिकॉर्ड है, उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में छह बार लगातार वित्त मंत्री रहते हुए और अन्य कार्यकाल में कुल दस बार बजट पेश किया है। उनके कार्यकाल ने भारत की वित्तीय नीतियों पर गहरा प्रभाव छोड़ा।
चिंतामन द्वारकानाथ देशमुख
चिंतामन द्वारकानाथ देशमुख एक सिविल सेवक से वित्त मंत्री बने और 1950 में अपनी नियुक्ति से पहले विभिन्न पदों पर रहे। उन्होंने 1956 तक सेवा की और भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने के बाद इस्तीफा दे दिया।
प्रणब मुखर्जी
पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रणब मुखर्जी ने वित्त मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान आठ बजट पेश किए। 1980, 2009 और 2012 में उनके कार्यकाल ने आर्थिक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने की उनकी क्षमता को दर्शाया।
आर्थिक सुधार और मील के पत्थर
डॉ. मनमोहन सिंह, एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री और पूर्व प्रधानमंत्री, ने वित्त मंत्री के रूप में छह बजट पेश किए। उनका 1991 का बजट भारत के लिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इसमें एलपीजी मॉडल (उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण) पेश किया गया था, जिसने भारत की अर्थव्यवस्था को उदारीकरण और वैश्वीकरण की ओर मोड़ दिया।
पी चिदंबरम
कांग्रेस के एक अन्य नेता पी चिदंबरम ने अपने कार्यकाल के दौरान नौ बजट पेश किए। 1990 और 2000 के दशक की शुरुआत में उनके काम में महत्वपूर्ण आर्थिक सुधार परिलक्षित हुए, जिसने आधुनिक भारत के वित्तीय परिदृश्य (financial outlook) को आकार दिया।
यशवंत सिन्हा
यशवंत सिन्हा ने 1998 से 2002 तक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अधीन वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया। उन्होंने इस अवधि के दौरान सात बजट पेश किए, जिससे सदी के अंत में भारत की आर्थिक नीतियों में योगदान मिला।












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