Budget 2021 Special: इलेक्ट्रिक वाहन इंडस्ट्री को बजट में सरकार से क्या है उम्मीद ?

Budget 2021 Special: नई दिल्ली। दुनिया अब पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता खत्म करने की कोशिश में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चाहते हैं भारत में लोग पेट्रील-डीजल की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ अपना रुख करें जिससे तेल पर निर्भरता कम हो सके। भारत सरकार ने 2030 तक ऑटोमोबाइल सेक्टर में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 30 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। अब इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए विनिर्माण, अनुसंधान औऱ विकास में एक मॉडल को अपनाने के सात ही एक व्यापक योजना बनाने की जरूरत है। इस बार के बजट में ये भी देखना बहुत महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इसके लिए क्या करने जा रही है।

2040 तक चौथा बड़ा बाजार होगा भारत

2040 तक चौथा बड़ा बाजार होगा भारत

एक अनुमान के मुताबिक भारत 2040 तक इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चौथा सबसे बड़ा बाजार बन जाएगा। इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि अब समय आ गया है जब सरकार को इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने पर जोर देना चाहिए।

विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार का बजट एक मौका है जब सरकार को इस क्षेत्र में घोषणा करनी चाहिए जिससे आत्मनिर्भर भारत के पीएम मोदी के सपनों को बल मिले। साथ ही आने वाले वर्षों में भारत की सड़कों पर अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों के दौड़ने का रास्ता साफ हो।

इलेक्ट्रिक वाहन बाजार के बड़े खिलाड़ियों को लेकर केंद्रीय बजट 2021-22 में बड़ी घोषणाओं की उम्मीद है। इनमें सबसे प्रमुख चार्जिंग स्टेशन और इंफ्रास्क्ट्रचर की स्थापना के लिए कोष बनाना प्रमुख है। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सबसे जरूरी चीज चार्जिंग स्टेशन का उपलब्ध होना है। इसके लिए पेट्रोल या सीएनजी पंप के मॉडल पर चार्जिंग स्टेशन होने चाहिए तभी इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ लोगों का रुझान बढ़ेगा। वाहनों को चार्ज करने के लिए बुनियादी ढांचे का विकास न होना इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। हालांकि अमेरिकी कंपनी टेस्ला के भारतीय बाजार में प्रवेश ने उम्मीद जगाई है। उद्योगपति एलन मस्क की कंपनी वर्तमान में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर तेजी से काम कर रही है।

चार्जिंग स्टेशन के लिए बुनियादी ढांचा

चार्जिंग स्टेशन के लिए बुनियादी ढांचा

इंडस्ट्री उम्मीद कर रही है कि सरकार बजट में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन और बैटरी बदलने के लिए बुनियादी ढांचे को तैयार करने के लिए मजबूत प्रतिबद्धता दिखाएगी।

इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग से जुड़े लोगों की मांग है कि सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति में अधिक स्पष्टता होनी चाहिए। इसके साथ ही इंड्रस्ट्री बहुप्रतीक्षित स्क्रैपिंग नीति को लेकर भी सरकार से बहुत अधिक उम्मीद कर है। यह नीति ऑटोमोबाइल बिक्री को बढ़ावा देने के साथ ही वाहन की फिटनेस को भी महत्व देगी जो कि बहुत जरूरी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 2021 एक क्रांतिकारी बदलाव का साल हो सकता है। ऐसे में सरकार को इलेक्ट्रिक वाहन इंडस्ट्री को वैश्विक पटल पर रखने के लिए बजट में कदम उठाना चाहिए। इंडस्ट्री को कच्चे और उत्पाद पर लागू कर ढांचे को लेकर पुनर्विचार को लेकर भी सरकार से उम्मीद है। अभी इलेक्ट्रिक वाहन इंडस्ट्री में कच्चे माल पर 18 % जीएसटी लगता है और बाहरी आपूर्ति पर 5 % टैक्स है। साथ ही सरकार को निर्माताओं को नकदी प्रवाह में मदद के लिए भी पुनर्विचार करना चाहिए।

2020 में 600 करोड़ का आवंटन

2020 में 600 करोड़ का आवंटन

2020 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में एक बार भी इलेक्ट्रिक वाहनों का उल्लेख नहीं किया था लेकिन सरकार ने हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 600 करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन किया था। 2020 में हितधारकों को सीधा लाभ देने की जगह सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग को बढ़ावा देने के लिए योजना पर फोकस रखा था।

इससे पहले, सरकार ने ईवीएस पर जीएसटी को 12% से घटाकर 5% कर दिया था और ऐसे वाहनों को खरीदने के लिए कर्ज पर 1.5 लाख रुपये की अतिरिक्त आयकर कटौती की थी। 2019 में, सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण केंद्र स्थापित करने के लिए निवेश करने की भी घोषणा की थी। इनमें से अधिकांश घोषणाएं अभी भी कागजों में ही हैं और उम्मीद है इस बार सरकार उन्हें धरातल पर उतारने के लिए ठोस कार्यक्रम पेश करे।

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