सीएम की कुर्सी बचाने के लिए लिंगायत संतों की शरण में पहुंचे बीएस येदियुरप्पा, मिला समर्थन
बेंगलुरु, 20 जुलाई। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की कुर्सी को लेकर खींचतान अभी भी जारी है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बागी नेताओं और येदियुरप्पा को पद से हटाए जाने को लेकर पार्टी में चल रहे मंथन के बीच प्रमुख दलों के वीरशैव-लिंगायत नेता और संतों ने कर्नाटक के सीएम का समर्थन किया है। मंगलवार को बीएस येदियुरप्पा ने बेंगलुरु में कई मठों के प्रमुखों से मुलाकात की और राज्य के शक्तिशाली पुजारियों के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया। समुदाय के कई संतों एवं नेताओं ने बीएस येदियुरप्पा को पद से हटाए जाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

बता दें कि कर्नाटक में करीब 16 फीसद आबादी लिंगायत समुदाय की है, इतना ही नहीं बीजेपी में वीरशैव-लिंगायत समुदाय अहम वोट बैंक भी समझा जाता है। इस महीने के अंत तक मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की कई मठों के प्रमुखों से यह मुलाकात अहम बताई जा रही है। इनमें से कई वीरशैव-लिंगायत समुदाय के राजनीतिक और धार्मिक नेताओं ने 78 वर्षीय बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से हटाने के किसी भी कदम के खिलाफ बीजेपी को चेतावनी दी है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वीरा सोमेश्वर शिवाचार्य स्वामी ने कहा कि येदियुरप्पा को बदलने के किसी भी कदम के भाजपा के लिए बुरे परिणाम होंगे। उन्होंने आगे कहा, 'राजनीति में घमासान आम बात है, कोई कुछ भी कहे, लेकिन हमें विश्वास है कि बीएस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बने रहेंगे और कार्यकाल पूरा करेंगे।' कांग्रेस नेता और अखिल भारतीय वीरशैव महासभा के प्रमुख शमनूर शिवशंकरप्पा ने कहा कि समुदाय मुख्यमंत्री के पीछे है। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेतृत्व को कर्नाटक के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों (एस निजलिंगप्पा, वीरेंद्र पाटिल, जे एच पटेल, एस आर बोम्मई) से जुड़ा इतिहास याद कर लेना चाहिए। यदि वह ऐसा कुछ भी करने की कोशिश करते हैं तो वह अपना ही सर्वनाश करेगें।












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