फातिमा खातून की सच्‍ची कहानी, शादी के बहाने भेज दिया 'चकला घर'

rape case
नई दिल्‍ली। भारत में ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं जिन्‍होंने सिर्फ 'ना' कहकर ही अपनी पूरी जिंदगी बिता दी। ये वो महिलाएं हैं जिन्‍हें उनके घरवालों ने ही आग की भट्टी में झोंकने का साहस दिखाया है। शादी के बाद ये महिलाएं अपनी जिंदगी भूलकर सिर्फ दूसरों के लिए ही जीती हैं।

आइये आप सभी को अब एक ऐसी महिला फातिमा खातून की कहानी बताते हैं जिसे शादी के बाद 'चकला घर' में रहना पड़ा। इस महिला के पास वहां से भागने का भी कोई विकल्‍प मौजूद नहीं था जिसके कारण उसे चकले घर में ही अपनी पूरी जिंदगी बिता देनी पड़ी। महिला का पति भी उसे अपनी पत्‍नी न समझकर सिर्फ किराए की महिला ही समझता था। यही नहीं, चकला घर में आने वाले मेहमान भी नई विवाहित महिला में काफी रुचि दिखाते थे।

समय गुजरता गया और फिर खातून ने मन ही मन में कुछ करने की ठान ली। धीरे-धीरे फातिमा ने चकला घर में काम करने वाली सभी महिलाओं के दिल का हाल जाना और फिर उनकी मदद करने के लिए सिर पर कफन बांध लिया। फातिमा ने सभी लड़कियों को एक-एक कर वहां से भगाने में मदद की और स्‍वयं नि:स्‍वार्थ भाव से सब कुछ सहती रही।

फातिमा का कहना है कि 'जब आप एक लड़की को किसी के हाथों बेचते हैं, तो आप उसे ही नहीं उसके सपनों को भी बेच देते हैं। मेरे जिंदगी भले ही बहुत मुश्किलों भरी न रही हो, लेकिन देह व्यापार में फंसी लड़कियां बेहद डरी सहमी थीं, वे किसी को 'न' नहीं कह सकतीं थीं। उन्हें आवाज चाहिए थी और मैं उनकी आवाज बनीं।'

इधर, 35 वर्षीय लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की कहानी फातिमा खातून से अलग है। लक्ष्मी किन्नर समुदाय से हैं। वह अपने ही रिश्तेदार द्वारा बार बार यौन शोषण का शिकार हुईं और किन्नर होने की वजह से हमेशा उपहास का पात्र बनीं। लेकिन उनके परिवार ने उनका साथ दिया और उन्हें हिम्मत बंधाई जब उन्होंने पहली बार उस व्यक्ति का विरोध किया, जो उनका यौन शोषण करता रहा था।

लक्ष्मी कहती हैं, "मैं अपने ही एक रिश्तेदार द्वारा यौन शोषण का शिकार हुई। मेरे लिए स्कूल और कॉलेज जाना भी दुश्वार था। लोग मुझे 'छक्का' 'गुर' और जाने क्या क्या बुलाते थे।"

आज लक्ष्मी एलजीबीटी (समलैंगिक) समुदाय की अग्रणी कार्यकर्ताओं में से हैं और हाल ही में एलजीबीटी समुदाय के अधिकारों के लिए बड़ी जीत हासिल की है। लक्ष्मी कहती हैं, "मेरी जिंदगी में जो भी व्यक्ति आया, उसने मेरा शोषण किया। उस वक्त मैं बहुत अलग थी, ऐसी नहीं थी, जैसी आज हूं। मैं मुश्किल से कुछ बोल पाती थी। लेकिन जिस दिन मैंने पहली बार 'न' कहने का साहस किया, उस दिन के बाद से मेरी पूरी जिंदगी बदल गई।"

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