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सोनभद्र का काला सच:जहां मिला सोने का खजाना,वहां पल-पल घुटकर मर रहे हैं 10000 लोग

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेस के सोनभद्र में सोने का खजाना मिलने की खबर के बाद यह जिला सूर्खियों में आ गया। खबर फैली की सोनभद्र में 3000 टन सोने का भंडार मिला है। सोने के विशाल भंडार की खबर चारों ओर आग की ओर फैल गई। देश और दुनिया के निगाहें सोनभद्र पर टिक गई। हालांकि बाद में इस विशाल सोने की भंडार की खबर का खंडन किया गया। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने आज बताया कि उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में करीब 3,000 टन सोने का कोई स्वर्ण भंडार नहीं मिला है। लोग अब भी इस पर विश्वास नहीं कर रहे हैं। सोनभद्र में सोने के खजाने के बीच इस जगह का एक काला सच है, जिसपर किसी की निगाह नहीं गई। लोग सोने की चमक में खो गए, लेकिन यहां रहने वाले लोगों के उस कष्ठ को जानने की कोशिश तक नहीं की, जिसकी वजह से सोनभद्र के 10000 लोग प्रभावित हो चुके हैं।

योगी सरकार के लिए जैकपॉट, जानिए सोनभद्र की वो जगह, जहां मिला 3000 टन सोना!

 सोनभद्र का काला सच

सोनभद्र का काला सच

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में सोने का खजाना मिलने की खबर तो सबने पढ़ी और उत्सुकता दिखाई, लेकिन वहां वायु और जल प्रदूषण प्रभावित 10000 लोगों की उस बीमारी को अनदेखा कर दिया, जिसकी वजह से वहां से लोग विकलांग हो रहे हैं। सोनभद्र के 269 गांव के लगभग 10,000 ग्रामीण फ्लोरोसिस बीमारी से ग्रस्त होकर अपंग हो गए हैं। 60 फीसदी आदिवासी जनसंख्या वाले सोनभद्र के 269 गांवों के 10,000 लोग खराब हवा और दूषित पानी की वजह से फ्लोरोसिस नामक बीमारी से ग्रस्त हो गए हैं।

 फ्लोराइड युक्त पानी बना वजह

फ्लोराइड युक्त पानी बना वजह

सोनभद्र में फ्लोराइड युक्त पानी लोगों को विकलांग कर रहा है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के हस्तक्षेप के बाद भी न तो यूपी सरकार ने लोगों की गुहार सुनी और न ही जिला प्रशासन ने इसके लिए कोई कारगर कदम उठाया। हालात ये हैं कि कचनवा, पिरहवा, मनबसा, कठौली, मझौली, झारो, म्योरपुर, गोविंदपुर, कुशमाहा, रास, पहरी, चेतवा, जरहा जैसे करीब 269 गांवों के करीब 10 हजार लोग दूषिय हवा और पानी की वजह से अपंग हो चुके हैं। सेंटर फॉर साइंस की टीम ने साल 2012 में यहां के लोगों के खून, नाखून और बालों की जांच की थी , जिसमें पारा की मात्रा ज्यादा पाई थी, यहां के लोगों को फ्लोरोसिस की बीमारी से ग्रसित पाया गया था।

 नाले का गंदा पानी पीने को मजबूर

नाले का गंदा पानी पीने को मजबूर

आदिवासियों के लिए काम करने वाली एनजीओ का कहना है कि सरकार यहां की खनिज संपदा का दोहन कर राजस्व अर्जित करती है। खनन माफिया यहां प्रबल है, लेकिन यहां के लोगों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। यहां के लोग आज भी नाले का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। जिसकी वजह से लोगों में ये फ्लोरोसिस की बीमारी हो रही है। लोग विकलांग हो रहे हैं। बच्चों में तेजी से ये बीमारी बढ़ रही है। उनका मानसिक और शारीरिक विकास प्रभावित हो रहा है, लेकिन सरकार अब तक नहीं जागी। सोने की खबर से देश-दुनिया को आकर्षित कर लिया, लेकिन इन आदिवासियों के लिए कोई शुद्ध पानी की व्यवस्था नहीं कर पाया है।

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English summary
Sonbhadra district was in news for gold reserves, but about 10,000 villagers here have become disabled due to fluorosis reportedly caused by air and water pollution.
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