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Black Moon Today: 'ना चंदा ना चांदनी', आज रात आसमान में दिखेगा काला चांद , जानिए इसका रहस्य?

Black Moon ya Kala Chand: चांद के घटने -बढ़ने की स्थति के चलते ही वो कभी चमकीला और कभी हल्का दिखाई पड़ता है, इस स्थिति को 'अपारेंट साइज' कहते हैं।

Black Moon

Black Moon Kya hota hai: 'काला चांद...' सुनकर ही अजीब लग रहा है, ये शब्द सुनते ही दिमाग में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या चंद्रमा का रंग काला हो जाएगा? तो आपको ये बता दें कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला है। दरअसल 'ब्लैक मून' नाम वैज्ञानिकों की ओर से दिया गया है और पिछले कुछ सालों से इसका चलन बढ़ गया है।

खगोलीय वसंत ऋतु

दअरसल 21 मार्च से 21 जून के बीच वैज्ञानिकगण खगोलीय वसंत ऋतु मनाते हैं और इस दौरान आमवस्याएं पड़ती हैं। जब इस पीरियड में अमावस्या की संख्या चार होती है तो तीसरी अमावस्या को 'ब्लैक मून 'कहकर संबोधित करते हैं क्योंकि इस दिन चंद्रमा की परछाई बहुत ही दुर्लभ स्थिति में धरती पर दिखाई पड़ती है, इसी वजह से इसे 'काला चांद' कहा जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक ये घटना हर 33 महीने में होती है।

29 महीने में एक बार होता है चांद काला

वैसे इसे लेकर वैज्ञानिकों के अपने-अपने मत हैं। एक परिभाषानुसार अगर एक महीने में दो अमावस्या पड़ती है तो दूसरी वाली को 'ब्लैकमून' कहा जाता है। जो कि 29 महीने में एक बार आती है। मालूम हो कि हर आमावस्या पर चंद्रमा और सूर्य लगभग एक सीध में हो जाते हैं और इस वजह से पृथ्वी तक उसका प्रकाश नहीं पहुंचता है इसलिए अमावस्या पर चांद नजर नहीं आता है।

अब प्रश्न उठता है कि चांद कहां चला जाता है और अमावस्या पर ही ऐसा क्यों होता है?

तो इसका सीधा जवाब है ये पृथ्वी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है और चंद्रमा पृथ्वी का। चांद का अपना कोई प्रकाश नहीं है वो सूर्य की रोशनी से ही रौशन होता रहता है। सूर्य का प्रकाश उसके आगे वाले हिस्से में पड़ता है तो वो चमकीला नजर आता है।

अमावस्या को नहीं दिखता चांद

लेकिन चक्करलगाने की वजह से उसकी स्थिति पृथ्वी से हर रोज बदलती जाती है और परिक्रमा के दौरान जब सूर्य की सीध में आता है तो उसका काला वाला भाग जहां की रोशनी नहीं होती है, वो पृथ्वी के सामने आ जाता है, जिससे कि हमें लगता है कि कि आज चांद निकला ही नहीं क्योंकि वो बिना प्रकाश के दिखाई नहीं पड़ता, वो दिन अमावस्या का होता है।

पृथ्वी से करीब 4 लाख किलोमीटर की दूरी पर है चांद

और जिस दिन चांद पूरे आकार में होता है, उसे पूर्णिमा कहते हैं। बता दें कि पृथ्वी एक चक्कर लगाने में 24 घंटे का वक्त लगाती है जबकि चांद एक चक्कर लगाने में 14 दिन‌ लगाता है‌। मालूम हो कि चांद हमाीरी पृथ्वी से करीब 4 लाख किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जब ये चक्कर लगाते हुए पृथ्वी के निकट आता है तो ये चमकीला औऱ बड़ा और जब चक्कर लगाते हुए पृथ्वी से दूर होता है तो छोटा और हल्का दिखाई देता है।

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