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कोरोनाकाल में जमकर हुई कालाबाजारी, कई गुना ज्यादा रेट पर मिली दवाइयां और ऑक्सीजन, सर्वे में खुलासा

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नई दिल्ली, 28 सितंबर। लोगों के दिमाग पर पैसे का भूत इस कदर हाफी हो गया है कि कोई मरे या जिए उन्हें सिर्फ अपने पैसे से मतलब है। इन लोभी, लालचियों ने कोरोना जैसी महामारी में भी लोगों को नहीं बख्शा। उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर इन लोगों ने ऊंचे दामों पर उन्हें जीवन रक्षक साधन उपलब्ध कराए। हाल ही में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म लोकलसर्किल द्वारा किए गए एक सर्वे में यह सामने आया है।

लगभग 70 प्रतिशत लोगों ने एम्बुलेंस के लिए किया 5 गुना अधिक भुगतान

लगभग 70 प्रतिशत लोगों ने एम्बुलेंस के लिए किया 5 गुना अधिक भुगतान

सर्वे के अनुसार कोरोना दूसरी लहर में लगभग 70 प्रतिशत लोगों ने एम्बुलेंस सेवाओं के लिए अतिरिक्त भुगतान किया। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म लोकलसर्किल द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, ऑक्सीमीटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सीजन कंसंटेटर सहित कोविड से संबंधित उत्पाद या साधन खरीदने के लिए 36% नागरिकों ने एमआरपी से अधिक भुगतान किया। महामारी को इन लोगों ने पैसे बनाने का अवसर बनाया और ऐसे लोगों से ऊंची दरों पर सामान दिया जो जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे। सर्वे के मुताबिक लोगों का सबसे ज्यादा शोषण एम्बुलेंस सेवा प्रदान करने वाले लोगों ने किया। एम्बुलेंस बुक करने वाले 50 प्रतिशत लोगों को नियमित शुल्क से 500 प्रतिशत अधिक का भुगतान करने के लिए मजबूर किया गया। 10 प्रतिशत लोगों को 100-500 प्रतिशत जबकि 30 फीसदी लोगों ने नियमित तौर पर दिए जाने वाला शुल्क ही अदा किया।

जीवन रक्षक दवाइयों की भी जमकर हुई कालाबाजारी

जीवन रक्षक दवाइयों की भी जमकर हुई कालाबाजारी

कालाबाजारी केवल एम्बुलेंस सेवा तक ही सीमित नहीं रही, कोरोना की जीवन रक्षक दवाइयों को भी ऊंचे दामों पर बेचा गया।
सर्वे के अनुसार कोरोना की दूसरी लहर में 19% लोग ऐसे थे जिन्होंने अंकित मूल्य से अधिक रेट पर दवाइयां खरीदीं। इसके अलावा कोरोना को लेकर किए गए टेस्ट में भी धांधली मिली। ऐसे में जबकि लगभग सभी राज्यों ने आरटी-पीसीआर टेस्ट के रेट तय कर दिये थे, इसके बावजूद 13% लोगों ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान आरटी-पीसीआर टेस्ट के लिए तय रेट से अधिक पैसे दिए। यहां केवल प्राइवेट लैब और अस्पतालों की बात हो रही है। सर्वे के मुताबिक कुछ लोगों ने ऑक्सीमीटर के लिए 5 गुना तक अधिक दाम दिए। वहीं ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स जिनकी एमआरपी 33,00 रुपए थी उन्हें 1 लाख या उससे अधिक की कीमत पर भी बेचा गया। सर्वे के मुताबिक नए ऑक्सीजन सिलेंडर और रीफिल सिलेंडरों को नियमित मूल्य से 300-400% अधिक के रेट पर बेचा गया। इस सर्वे में 389 जिलों के 38,000 लोगों ने भाग लिया, जिनमें 67 प्रतिशत पुरुष जबकि 33 प्रतिशत महिलाएं थीं। सर्वे में शामिल 44% लोग टियर 1 शहरों से 33% टियर 2 से और 23% टियर 3,4 और ग्रामीण जिलों से थे।

कोरोना टेस्ट के लिए भी लोगों को करना पड़ा डबल-ट्रिपल भुगतान

कोरोना टेस्ट के लिए भी लोगों को करना पड़ा डबल-ट्रिपल भुगतान

इस प्लेटफॉर्म द्वारा इससे पहले किये गए एक सर्वे में सामने आया था कि प्रत्येक दो परिवारों में से एक ने कोविड एंटीबॉडी परीक्षण के लिए 750 रुपए से अधिक का भुगतान किया था। 29 प्रतिशत लोगों ने कहा था कि उन्होंने कोविड एंटीबॉडी टेस्ट के लिए 1000 या उससे अधिक का भुगतान किया था। 21 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने टेस्ट के लिए 750-1000 तक रुपए दिये जबकि 14 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने 500-750 रुपए का भुगतान किया। वहीं, 24 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने टेस्ट के लिए 250-500 रुपए अदा किये, 7 प्रतिशत लोगों के मुताबिक उन्होंने 250 रुपए से कम का भुगतान किया जबकि 5 प्रतिशत लोगों ने इसको लेकर कुछ नहीं कहा।

English summary
Black marketing during 2nd wave, medicines and oxygen were found at manifold rates, survey revealed
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