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पोस्ट पोल सर्वे: जानिए किन वजहों से BJP ने 40 साल बाद पश्चिम बंगाल में लहराया भगवा

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कोलकाता: 1980 में भारतीय जनता पार्टी को अपने गठन के बाद पश्चिम बंगाल में जगह बनाने में 40 साल लग गए। 17वीं लोकसभा में बीजेपी ना केवल बंगाल में पहुंची बल्कि उसे जीत भी हासिल हुई। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को केवल दो सीटें हासिल हुई थी और पार्टी का वोट शेयर 17 फीसदी था। साल 2019 के चुनाव में बीजेपी नो केवल 18 सीटें हासिल हुई बल्कि उसका वोट शेयर बढ़कर 40 फीसदी हो गया। ये पश्चिम बंगाल की सत्तारुढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस और उसकी प्रमुख ममता बनर्जी के लिए खतरे की घंटी है।

बंगाल में टीएमसी के नजदीक पहुंची बीजेपी

बंगाल में टीएमसी के नजदीक पहुंची बीजेपी

बीजेपी को सीटों और वोट शेयर के लिहाज से प्रदर्शन टीएमसी के नजदीक है। टीएमसी को 22 सीटें और 43 फीसदी वोट शेयर मिला है। साल 2014 की तुलना में टीएमसी को 12 सीटों का नुकसान हुआ। तृणमूल अपने दक्षिण बंगाल के गढ़ को बनाए रखने में कामयाब रही, जबकि भाजपा ने राज्य के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में सफलता हासिल की। बीजेपी का बंगाल की राजनीति में नया उदय हुआ है। भगवा जनादेश कई प्रासंगिक सवाल उठाता है। लोकनीति के चुनाव बाद सर्वे के आंकड़े इसका कुछ जवाब दे रहे हैं।

'बंगाल में हुआ धुव्रीकरण'

'बंगाल में हुआ धुव्रीकरण'

लोकनीति के चुनाव बाद सर्वे के मुताबिक ये ध्रुवीकरण वाला जनादेश दिखता है। बीजेपी और टीएमसी ने लगभग 83 फीसदी वोटों का हिस्सा पाया। इन दोनों ने कांग्रेस और लेफ्ट को बिल्कुल अप्रासंगिक कर दिया। सर्वे से साफ होता है कि पारंपरिक वामपंथी मतदाताओं में से दो तिहाई बीजेप में स्थानांतरित हो गए और लगभग एक तिहाई तृणमूल कांग्रेस में। इसी तरह कांग्रेस के 32 फीसदी वोटर बीजेपी के पास तो 29 फीसदी टीएमसी के बाद गए। बीजपी के हिंदुत्व के एजेंडे और तृणमूल के कथित मुस्लिम तुष्टिकरण को देखते हुए यहां धुव्रीकरण दिखा। जहां मुस्लिम मतदाताओं के बीच सत्तारूढ़ तृणमूल के लिए भारी समर्थन था और वहीं ना केवल हिंदू उच्च जातियों, बल्कि अन्य पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों ने बड़े अनुपात में बीजेपी को वोट दिया।

नरेंद्र मोदी और ममता में टक्कर

नरेंद्र मोदी और ममता में टक्कर

बंगाल में राजनीतिक रूप से भी धुव्रीकरण दिखा। सर्व से पता चलता है कि चुनाव अभियान के दौरान 40 फीसदी वोटर ने आखिर तक बीजेपी को वोट देने का फैसला किया। पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल में 17 जनसभाओं को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने लगातार तृणमूल के आधिपत्य को तोड़ने की कोशिश की और ममता बनर्जी की लोकप्रियता को चुनौती दी। हालांकि 43 फीसदी वोटरों ने ममता को नेता के रूप में मोदी से अधिक पसंद किया। वहीं मोदी भी ज्यादा पीछे नहीं रहे। उन्हें 37 फीसदी लोगों ने पसंद किया। राष्ट्रीय स्तर पर नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता ममता बनर्जी की लोकप्रियता से अधिक रही। 42 फीसदी लोगों ने मोदी को अगले प्रधानमंत्री के रूप में पसंद किया, जबकि केवल 13 फीसदी लोगों ने ममता बनर्जी को पसंद किया।

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English summary
BJP truly reach in West Bengal after 40 years says CSDS Lokniti Post Poll Survey 2019
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