BJP सांसद बोले- दिल्ली में 54 सरकारी जमीनों पर अवैध मस्जिदों का किस्सा

नई दिल्ली: पश्चिमी दिल्ली से बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने उपराज्यपाल अनिल बैजल को पत्र लिखकर उन्हें पश्चिमी दिल्ली में बना अवैध मस्जिदों की लिस्ट सौंपी है। अपने पत्र में उन्होने लिखा है कि पश्चिमी दिल्ली में 54 अवैध मस्जिदें हैं। प्रवेश वर्मा ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कब्रिस्तानों, दिल्ली शहरी आश्रय विकास बोर्ड (डीयूएसआईबी), ग्राम सभा भूमि, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) का सर्वे करवाया है। उन्होंने यहां तक कि कहा कि दिल्ली की बाढ़ विभाग विभाग की जमीन का सर्वे भी उन्होंने करवाया है।

पश्चिमी दिल्ली में 54 अवैध मस्जिदें

पश्चिमी दिल्ली में 54 अवैध मस्जिदें

बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने आगे कहा कि जिन जगहों पर मस्जिदों का निर्माण हुआ है, ऐसी भूमि कम्यूनिटी सेंटर, पार्कों, कूड़ेदान और सामुदायिक शौचालयों के ली थी। प्रवेश वर्मा ने नरेला, सुल्तानपुरी, बवाना, मंगोलपुरी और यहां तक कि साउथ दिल्ली के आरकेपुरम और नॉर्थ दिल्ली जोन के रोहिणी की विस्तृत सूची सौंपी है। इन जगहों पर उन्होंने सर्वे करवाया था। उन्होंने एलजी से अनुरोध किया कि वो जिला मजिस्ट्रेट और उन सभी विभागों के प्रमुखों की एक कमेटी बताए और स्टेटेस रिपोर्ट प्रस्तुत करे, जिन जगहों का सर्वेक्षण उन्होंने करवाया है। उन्होंने दो महीने में ये रिपोर्ट पेश करने का अनुरोध किया है।

प्रवेश वर्मा पर ना मिलने का आरोप

प्रवेश वर्मा पर ना मिलने का आरोप

इससे पहले जून में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने बीजेपी सांसद के पत्र का संज्ञान लिया था और उनके द्वारा किए गए दावों की जांच करने के लिए अपनी पांच सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग टीम बनाई थी। इस टीम के सदस्यों का आरोप है कि प्रवेश वर्मा उनसे मिलने के लिए तैयार नहीं हुए। इस कमेटी के अध्यक्ष ने कहा कि क्योंकि उन्हें एक सूची मिली थी और उन्होंने इस पर चिंता जताई थी। उन्हें हमारे साथ जानकारी शेयर करनी चाहिए। समिति ने सांसद को 10 दिन पहले इसके लिए पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि मनोज तिवारी ने हमें जवाब नहीं दिया।

मनोज तिवारी के ऑफिस का इनकार

मनोज तिवारी के ऑफिस का इनकार

दिल्ली बीजेपी के प्रमुख मनोज तिवारी के ऑफिस का कहना है कि उन्हे इस संबंध में कोई लैटर नहीं मिला है। सूत्रों का कहना है कि टीम ने कई स्थानों का दौरा किया जो सूची में हैं। ऐसी मस्जिदें जो 200 साल पुरानी हैं, वो 1702 में बनी। ऐतिहासिक रूप से यह इलाका विभाजन से पहले मुस्लिम बहुल हुआ करता था। विस्थापन के बाद, आबादी मिश्रित हो गई। पांच सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग टीम के अगले हफ्ते अपनी रिपोर्ट सौंपने की संभावना है।

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