कांठ महापंचायत: भाजपाइयों और पुलिस में टकराव, तनाव बरकरार

शुक्रवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेई के नेतृत्व में होने वाली महापंचायत पर फैसला देर रात लिया जाएगा। कुल मिलाकर प्रशासन का आधा सिरदर्द भाजपा की आपसी खींचतान से मिल गया।
ऐसे बढ़ा महापंचायत का विवाद:
कांठ इलाके के अकबरपुर चैदरी गांव में एक मंदिर पर लाउडस्पीकर के उतारने के बाद ऐसा विवाद बढ़ा कि एक हफ्ते से यह प्रशासन का सिरदर्द बन गया। विरोध में चार जुलाई को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में एक महापंचायत का ऐलान किया गया। जिसकी जिम्मेदारी भाजपा पश्चिम क्षेत्र के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह को सौंपी गई और संयोजक राजेश चुन्नू को बनाया गया। महापंचायत की तैयारी में ताकत झोंक चुकी भाजपा और हिन्दू संगठनों को आज की पंचायत में हुए फैसले से झटका लगा।
आरएसएस की इमरजेंसी मीटिंग:
महापंचायत रोकने के लिए से प्रशासन ने कांठ को किले में तब्दील कर दिया है। मंडल की सीमाएं सील कर बैरियर लगाए गए हैं। पूरे कांठ इलाके में चप्पे चप्पे पर पुलिस पीएसी रूट मार्च कर रही है।
अकबरपुर चैदरी में समझौता वार्ता नाकाम रहने के बाद आरएसएस ने देर रात महानगर में इमरजेंसी मीटिंग बुलाई जिसमें दोनों भाजपा सांसदों को भी हाजिर रहने को कहा गया। करीब चार घंटे चली इस मीटिंग में सांसद सर्वेश सिंह ने समझौते पर दस्तखत की बाबत सफाई दी।
इसके बाद संघ ने अपने सभी संगठनों और भाजपा नेताओं को नसीहत दी कि महापंचायत को हर हाल में सफल बनाना है। इसके लिए संघ ने दो केंद्रीय मंत्रियों संजीव बालियान और जनरल वीके सिंह को भी मुरादाबाद पहुंचने के निर्देश दिए हैं।












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