बिहार: सर्वे में सामने आई लोगों की नाराजगी ने BJP को दिया खुश होने का मौका
भाजपा ने बिहार के लोगों का मिजाज समझने के लिए एक आंतरिक सर्वे कराया, जिसके नतीजे सीएम नीतीश कुमार की चिंता बढ़ा सकते हैं।
नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी के बीच होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। हालांकि फिलहाल एनडीए में जहां जेडीयू और एलजेपी के बीच खींचतान चल रही है, तो वहीं आरजेडी भी अपने ही कुछ नेताओं की बगावत से जूझ रही है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने बिहार में लोगों का मिजाज समझने के लिए एक आंतरिक सर्वे कराया है, जिसमें कुछ चौंकाने वाली बातें पता चली हैं। इस सर्वे की रिपोर्ट में बताया गया है कि बिहार की जनता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके कामकाज से ज्यादा खुश नहीं है।

25 से 28 अगस्त के बीच किया गया सर्वे
'द प्रिंट' की खबर के मुताबिक, बिहार विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम फाइनल करने से पहले राज्य के मतदाताओं का मूड भांपने के मकसद से, अलग-अलग जिलों में 25 से 28 अगस्त के बीच विधानसभा पर्यवेक्षकों के तौर पर भाजपा नेताओं की एक टीम भेजी गई थी। इन पर्यवेक्षकों ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि बिहार के लोगों के बीच नीतीश की नाराजगी के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बरकरार है। साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बिहार चुनाव में एनडीए की जीत सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के ऊपर और आक्रामकता के साथ हमला करना होगा।

अलग-अलग जिलों में जाकर की गई लोगों से बात
बांका जिले में पर्यवेक्षक के तौर पर भेजे गए एक भाजपा नेता ने बताया, 'पार्टी में अलग अलग तरह के फीडबैक मैकेनिज्म हैं, जो बूथ प्रमुख से शुरू होकर जिला अध्यक्ष, विस्तारक और विधानसभा प्रभारी तक हैं। हम अपने संभावित उम्मीदवारों, गठबंधन के प्रत्याशियों, उनकी जीत का प्रतिशत, सत्ता विरोधी लहर और जनता पूरा मूड भांपने के लिए अलग-अलग जिलों में गए। हमारी टीम को हर वर्ग के लोगों से मिलकर उनका मिजाज समझने के लिए जिले में एक रात बिताने के निर्देश दिए गए थे।'

नीतीश कुमार के प्रति क्यों है नाराजगी
भाजपा नेता ने आगे बताया, 'अलग-अलग जिलों में किए गए सर्वे के आधार पर सामने आया कि बिहार के लोगों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति नाराजगी है और इसकी एक बड़ी वजह कोरोना वायरस महामारी व बाढ़ से निपटने में सरकार के इंतजाम हैं। नीतीश कुमार को आरजेडी पर और ज्यादा आक्रामक होना होगा। प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है, लेकिन गठबंधन की जीत के लिए भाजपा को और ज्यादा मेहनत करनी होगी। हालांकि, अपनी विधानसभाओं के बाहर भी भाजपा के प्रति एक सकारात्मक राजनीतिक माहौल है।'

'राज्य सरकार के इंतजाम से नाखुश हैं लोग'
एक दूसरे पर्यवेक्षक ने बताया, 'कोविड टेस्ट किट और बाकी सुविधाओं को लेकर बिहार के लोगों में पहले गुस्सा था, लेकिन अब ये कम हो गया है। लोगों का कहना है कि पीएम मोदी ने हमें बचाने के लिए लॉकडाउन लगाया, घर पहुंचाने के लिए उन्होंने हमें ट्रेन उपलब्ध कराईं, अनाज भी भेजा, लेकिन सरकारी अधिकारियों ने वो सब हम तक नहीं पहुंचने दिया। लोगों में नीतीश कुमार को लेकर नाराजगी है, लेकिन वो कह रहे हैं कि अगर उनकी सीट पर भाजपा नहीं लड़ रही तो जेडीयू को वोट देने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं है।'

'पिछड़ी जातियों का नीतीश कुमार पर भरोसा कायम'
पांच विधानसभाओं में सर्वे के लिए गए एक तीसरे पर्यवेक्षक ने बताया, 'सवर्ण जातियां नीतीश कुमार को वोट नहीं देना चाहती, लेकिन पीएम मोदी के पक्ष में मतदान करने के लिए तैयार हैं। हालांकि 15 साल की सरकार के बावजदू पिछड़ी जातियों का नीतीश कुमार पर भरोसा कायम है, लेकिन सवर्ण जातियों का वोट जेडीयू को दिलाना भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। क्योंकि, अगर सवर्ण जातियां वोट डालने के लिए नहीं निकलीं तो गठबंधन को नुकसान हो सकता है। हम लोगों ने केंद्रीय नेतृत्व को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, लेकिन एक बार जब पीएम मोदी प्रचार के लिए मैदान में उतरेंगे तो हालात हमारे पक्ष में होंगे।'

सर्वे को लेकर अपनाई गई खास रणनीति
इस सर्वे का मकसद हर सीट पर संभावित उम्मीदवार और उनकी जीत की संभावनाओं का आंकलन करना था। सर्वे के लिए भाजपा के ही 90 नेताओं की एक टीम बनाई गई, जिसमें पार्टी के महासचिव, उपाध्यक्ष और एमएलसी शामिल थे। पर्यवेक्षकों की इस टीम से कहा गया था कि वो ना केवल भाजपा, बल्कि ऐसे इलाकों से भी जानकारी इकट्ठा करें, जहां एलजेपी और जेडीयू के विधायक हैं। अलग-अलग जिलों में अपने चार दिन के प्रवास के दौरान इस टीम ने पार्टी कार्यकर्ताओं के अलावा मंडल और बूथ लेवल के अधिकारियों से भी मुलाकात कर जानकारी जुटाई। आंतरिक सर्वे करने के बाद पर्यवेक्षकों की टीम ने केंद्रीय नेतृत्व, बिहार भाजपा के नेताओं, पार्टी के बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव और डिप्टी सीएम सुशील मोदी के साथ बैठक की और अपनी रिपोर्ट सौंपी।

भाजपा क्यों हो सकती है सर्वे से खुश
इस आंतरिक सर्वे के नतीजों ने एक तरह से भारतीय जनता पार्टी को खुश होने का मौका दिया है। सर्वे के नतीजे बता रहे हैं कि सरकार में सहयोगी रहते हुए भी नाकामियों का ठीकरा सीएम नीतीश कुमार के सिर पर फूटता हुआ नजर आ रहा है। लोगों की नाराजगी को लेकर भाजपा ने काफी पहले से एक तय रणनीति के तहत चुप्पी साध रखी थी। भाजपा के नेता इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि बिहार में नीतीश कुमार को जितना नुकसान होगा, उनकी पार्टी की ताकत उतना ही बढ़ेगी।












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