• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

BJP ने 120 सांसदों का काटा था टिकट, कितने नए चेहरे पहुंचे संसद? जानिए

|

नई दिल्ली- भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बीते लोकसभा चुनावों में अपने करीब 120 सीटिंग सांसदों का टिकट काट दिया था। टिकट काटे जाने के फैसले के पीछे मुख्य तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की नीति रही, जिसे पार्टी अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) ने कड़ाई से अंजाम दिया। सांसदों का टिकट काटे जाने के कई कारण थे और जिस समय बीजेपी इस फैसले को लागू कर रही थी, तो उसे कई जगह विरोधों का भी सामना करना पड़ा। लेकिन, पार्टी लीडरशिप अपने एजेंडे पर डटी रही।

कई बुजुर्ग सांसदों का टिकट कटा था

कई बुजुर्ग सांसदों का टिकट कटा था

इसबार बीजेपी ने 75 की उम्र पार कर चुके सांसदों को टिकट नहीं देने की नीति बनाई थी। इस दायरे में पार्टी के वो संस्थापक नेता भी आ गए, जिन्होंने पार्टी को खड़ा किया है। इन सांसदों में वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी जैसे नेता शामिल हैं। इनके अलावा लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, पूर्व लोकसभा उपाध्यक्ष करिया मुंडा, शांता कुमार, कलराज मिश्र, हुकुमदेव नारायण यादव, भगत सिंह कोश्यारी, बीसी खंडूरी और रामटहल चौधरी जैसे नेता शामिल हैं। इनके अलावा कुछ सांसदों को स्वास्थ्य, निजी एवं अन्य कारणों से भी चुनावी राजनीति से अलग रखा गया या उन्होंने स्वेच्छा से अलग रहने का फैसला किया। इनमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, केंद्रीय मंत्री उमा भारती और राजसमंद के सांसद हरिओम सिंह ठाकुर जैसे सांसद शामिल हैं।

एंटी इंकम्बेंसी रहा सबसे बड़ा फैक्टर

एंटी इंकम्बेंसी रहा सबसे बड़ा फैक्टर

बीजेपी ने सांसदों का टिकट काटने का जो सबसे बड़ा आधार बनाया, वो उनका परफोॉर्मेंस था। पार्टी ने कई आंतरिक सर्वे कराए थे, जिससे उसे अपने कई मौजूदा सांसदों के खिलाफ जबर्दस्त एंटी इंकम्बेंसी (Anti Incumbency) की सूचना मिली थी। इनमें यूपी के बांदा से सांसद भैरो प्रसाद मिश्र, इलाहाबाद के सांसद श्यामा प्रसाद गुप्ता, झारखंड के कोडरमा से रवींद्र राय, आगरा से सांसद एवं एससी कमीशन के चेरमैन रमाशंकर कठेरिया, मिश्रिख की सांसद अंजू बाला, संभल के सत्यपाल सैनी, शाहजहांपुर से सांसद और केंद्रीय मंत्री कृष्णा राज और फतेहपुर सीकरी के सांसद बाबूलाल चौधरी का नाम शामिल है। इसी तरह राजस्थान की बाड़मेर के कर्नल सोनाराम चौधरी का भी टिकट परफॉर्मेंस के आधार पर ही कट गया था।

गठबंधन के चलते कटा कुछ सांसदों का टिकट

गठबंधन के चलते कटा कुछ सांसदों का टिकट

बिहार में इसबार भाजपा का जेडीयू के साथ तालमेल हुआ था। पिछली बार वहां बीजेपी ने 22 सीटें जीतीं थीं। लेकिन इसबार उसे 5 संसदीय सीट सहयोगी जेडीयू (JDU) के लिए छोड़नी पड़ गई। इसके चलते भी वहां के मौजूदा सांसदों का टिकट कट गया। इनमें सीवान से ओम प्रकाश यादव, झंझारपुर से बीरेंद्र कुमार चौधरी, गोपालगंज से जनक राम, वाल्मीकि नगर से सतीश चंद्र दुबे और गया से हरि मांझी का नाम शामिल है।

इसे भी पढ़ें- दिग्विजय सिंह क्यों बोले, ऐसे तो भाजपा 2024 में 350 सीटें जीतने का लक्ष्य रखेगी और जीत जाएगी

पहले भी सफल रहा था प्रयोग

पहले भी सफल रहा था प्रयोग

दरअसल, भाजपा (BJP) ने एंटी इंकम्बेंसी (Anti Incumbency) फैक्टर को नाकाम करने के लिए टिकट काटने का यह प्रयोग पहले 2017 के गुजरात (Gujarat) विधानसभा चुनावों में शुरू किया था और उसे उसमे काफी कामयाबी भी मिली थी। फिर पिछले साल दिसंबर में उसने यही प्रयोग मध्य प्रदेश (MP), राजस्थान (Rajasthan) और छत्तीगढ़ (Chhattisgarh) में भी किया था। इन राज्यों में पार्टी ने 20-30 सीटिंग विधायकों की छुट्टी कर दी गई थी और इन सब जगहों पर उसे सकारात्मक नतीजे मिले थे।

इसबार के लोकसभा चुनावों में 120 सीटिंग सांसदों का टिकट काटने की मोदी और शाह की रणनीति बहुत ही कारगर साबित हुई है। क्योंकि, जिन जगहों पर पार्टी ने अपने नए चेहरों को मौका दिया था, उनमें से 100 लोग जीतकर संसद पहुंच चुके हैं।

इसे भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल में दीदी की नाक में दम करने वाली भाजपा के पीछे हैं ये दिमाग

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
BJP had cut 120 MPs ticket, how many new Candidates reached Parliament?
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more