कश्‍मीर में बदल गया बीजेपी के पोस्टर का रंग, भगवा से हरा और सफेद हुआ पार्टी का चुनाव चिन्ह

श्रीनगर। भगवा या केसरिया रंग पर कमल के फूल वाली केंद्र की सत्‍ताधारी पार्टी बीजेपी ने जम्‍मू कश्‍मीर में अपना रंग बदल लिया है। पार्टी ने यहां पर भगवा की जगह प्रचार के लिए हरा रंग अपना लिया है। गुरुवार को पार्टी के एक उम्‍मीदवार के बड़े-बड़े पोस्‍टर्स जब कश्‍मीर के अखबारों में आए तो लोगों का ध्‍यान इस पर गया। साफ है कि पार्टी हरे रंग का प्रयोग कश्‍मीर की जनता को लुभाने के लिए कर रही है।

 श्रीनगर से पार्टी के उम्‍मीदवार ने दिए एड

श्रीनगर से पार्टी के उम्‍मीदवार ने दिए एड

श्रीनगर संसदीय क्षेत्र से बीजेपी के उम्‍मीदवार खालिद जहांगीर की ओर से अखबारों में हरे रंग के बड़े-बड़े विज्ञापन दिए गए हैं। खालिद ने उर्दू और इंग्लिश भाषा में अपना मैसेज आगे बढ़ाया है। यहां तक कि उन्‍होंने बीजेपी के निशाना कमल का प्रयोग भी सफेद और हरे रंग के साथ किया है। पीडीपी के नेता और राज्‍य में बीजेपी की गठबंधन वाली सरकार में वित्‍त मंत्री रहे हसीब ए द्राबू ने ट्वीट के जरिए इस पर निशाना साधा है। उन्‍होंने ट्वीट में लिखा, 'कश्‍मीर में अब रंग बदल रहे हैं और कैसे! यह चुनावों के दौरान राजनीतिक रंग होते हैं। कैसे भगवा को हरा कर दिया गया है! या फिर यह पीडीपी है जिसने बीजेपी पर अपना निशान छोड़ दिया है।' हसीबू ने राज्‍य में बीजेपी-पीडीपी के गठबंधन की सरकार बनने में अहम भूमिका अदा की थी।

बीजेपी ने कहा शां‍ति का प्रतीक है भगवा

बीजेपी ने कहा शां‍ति का प्रतीक है भगवा

हालांकि बीजेपी ने इस पूरे मसले को नजरअंदाज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि हरे रंग के ऊपर बहुत ज्‍यादा पढ़ने की जरूरत नहीं हैं। पार्टी के मुताबिक यह रंग उनका घाटी में, 'सबका साथ सबका विकास' का मंत्र है। राज्‍य में बीजेपी के प्रवक्‍ता अल्‍ताफ ठाकुर ने इस पर कहा, 'हम हर धर्म में यकीन करते हैं और हम धर्मनिरपेक्षता में भी विश्‍वास रखते हैं। हम रंगों पर ध्यान नहीं देते हैं और हमारे लिए सारे रंग एक समान हैं।' ठाकुर ने यह भी कहा है कि कश्‍मीर केसर और कमल की धरती है और पहले से ही यह रंग घाटी में मौजूद हैं। पार्टी रंगों के आधार पर लोगों को बांटना नहीं चाहती है। ठाकुर की मानें तो हरा रंग शांति का प्रतीक है।

कौन हैं खालिद जहांगीर

कौन हैं खालिद जहांगीर

बीजेपी के उम्‍मीदवार खालिद जहांगीर एक जर्नलिस्‍ट और लेखक होने के अलावा एक राजनीति रणनीतिकार भी हैं। साल 2014 में उन्‍होंने बीजेपी ज्‍वॉदन की थी और इसी वर्ष पार्टी ने उन्‍हें राज्‍य के मामलों का प्रवक्‍ता नियुक्‍त कर दिया। खालिद को उनके राजनीतिक कनेक्‍शन की वजह से जाना जाता है। वह वॉशिंगटन स्थित इंटरनेशनल स्‍ट्रैटेजिक अफेयर्स में फेलो भी रह चुके हैं। खालिदा के पिता रक्षा क्षेत्र से जुड़े थे और डायरेक्‍टर ऑफ डिफेंस के पद से रिटायर हुए हैं। खालिद के भाई जम्‍मू कश्‍मीर के पहले आईपीएस ऑफिसर रह‍ चुके हैं जिनका नाम गुलाम कादिर गांदरबली है। खालिद ने बर्न हॉल स्‍कूल से पढ़ाई की है और वह एक जर्मन न्‍यूज नेटवर्क के साथ स्‍पेशल कॉरेस्‍पॉन्‍डेंट रह चुके हैं।

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