बिहार चुनाव- पिछले 10 साल में सांसद-विधायकों की समीक्षा
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में हर कोई जाति के नाम पर वोट मांग रहे हैं, नेता कहते हैं कि जनता जाति के बंधन में बंधी हुई है। ऐसे में जनता को भी पता होना चाहिये कि नेता की असली तस्वीर क्या है। चलिये समीक्षा करते हैं पिछले 10 वर्षों में रहे बिहार के विधायकों की।
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2004 से अब तक कुल 5314 प्रत्याशी विधानसभा, विधान परिषद एवं लोक सभा के चुनाव लड़ चुके हैं। वहीं 2004 के बाद से अब तक कुल 620 सांसद-विधायक बन चुके हैं। इन लोगों की समीक्षा एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) ने की।
बात 5314 प्रत्याशियों की
- 32 प्रतिशत यानी 1717 प्रत्याशियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
- 20 प्रतिशत यानी 1041 पर हत्या, अपहरण जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं।
- कुल 5314 की औसत संपत्ति 1.13 करोड़ है।
अब बात 620 विधायक-सांसदों की
- 52 प्रतिशत यानी 321 पर क्रिमिनल केस चल रहे हैं।
- 30 प्रतिशत यानी 187 पर हत्या, अपहरण जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं।
- 620 सांसद-विधायकों की औसत संपत्ति 2.46 करोड़ रुपए है।
पार्टियों की समीक्षा
- कांग्रेस पार्टी अब तक 133 (कुल 327 का 41 प्रतिशत) अपराधियों को चुनाव लड़ा चुकी है।
- भाजपा के 275 प्रत्याशियों में से 148 (54%) पर क्रिमिनल केस हैं।
- जदयू के 379 प्रत्याशियों में से 173 (46%) पर क्रिमिनल केस हैं।
- राजद के 404 प्रत्याशियों में से 206 (51%) पर पुलिस में मामले दर्ज हैं।
- लोजपा के 285 प्रत्याशियों में से 132 (51%) इसी कैटेगरी में आते हैं।
- कांग्रेस के 1512 प्रत्याशियों में से 329 (22%) पर आपराधिक मामले दर्ज मिले।
अगर सीरियस क्राइम की बात करें तो कांग्रेस के 327 में से 70 पर हत्या, अपहरण, डकैती आदि के मामले दर्ज हैं। वहीं भाजपा के 275 में से 72, जदयू के 379 में से 108 पर, राजद के 404 में से 119 पर, लोजपा के 285 में से 81 प्रत्याशी इसी कैटेगरी में आते हैं।
चुने हुए सांसद-विधायकों में से
कांग्रेस के 22 में से 10 (45%) पर, भाजपा के 190 में से 110 (58%), जदयू के 238 में से 103 (43%), राजद के 105 में से 54 (51%), लोजपा के 19 में से 15 (79%) पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
कांग्रेस के 22 में से 6 (27%) पर, भाजपा के 190 में से 52 (27%), जदयू के 238 में से 64 (27%), राजद के 105 में से 34 (32%), लोजपा के 19 में से 12 (63%) पर गंभरी आपराधिक मामले दर्ज हैं।













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