क्या Nitish Kumar के गले की हड्डी बनेंगे RJD कोटे के मंत्री कार्तिकेय ? कांग्रेस बोली, जल्द कदम उठाएं
बिहार में महागठबंधन सरकार की राह कांटो भरी रहेगी, ये पहले दिन से साफ हो चुका है। अब कांग्रेस ने नीतीश और तेजस्वी से कानून मंत्री विवाद पर जरूरी कदम उठाने की अपील की है। bihar kartikeya kumar row nitish tejashwi congress
पटना / नई दिल्ली, 20 अगस्त : बिहार में महागठबंधन सरकार पहले दिन से ही विवादों में है। नीतीश कुमार कैबिनेट में राजद कोटे से कानून नंत्री बने कार्तिकेय कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। विरोधी दल भाजपा का दावा है कि कार्तिकेय किडनैपिंग केस, में आरोपी हैं, ऐसे में उन्हें कैबिनेट से तत्काल हटाना चाहिए। मंत्री कार्तिकेय के वकील का कहना है कि मंत्री के फरार होने की बातों में कोई सच्चाई नहीं है। अब महागठबंधन सरकार में सहयोगी कांग्रेस ने कहा है कि मंत्री कार्तिकेय के मामले में मुख्यमंत्री नीतीश और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव से कानून मंत्री विवाद में जरूरी कदम उठाएं।

कार्तिकेय किडनैपिंग मामले में आरोपी
बिहार के कानून म्ंत्री विवाद में भाजपा ने कहा, राजद नेता कार्तिकेय कुमार 2014 के अपहरण मामले में आरोपी हैं। उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लंबित है। ऐसे में नीतीश कुमार की कैबिनेट से कार्तिकेय को तत्काल हटाया जाए। 2014 के इस किडनैपिंग केस में मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह भी आरोपी हैं।

नीतीश और तेजस्वी की परीक्षा
कानून मंत्री कार्तिकेय का विवाद गहराता देख महागठबंधन सरकार में सहयोगी कांग्रेस ने कहा, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव राजद नेता कार्तिकेय कुमार की कानून मंत्री के रूप में नियुक्ति को लेकर उठे विवाद पर आवश्यक कदम उठाएं।

कार्तिकेय मामले में भाकपा-माले (लिबरेशन) का रूख
बता दें कि बिहार में एनडीए से अलग हुए नीतीश कुमार ने राजद समेत सात दलों के साथ सरकार बनाई है। सत्तारूढ़ महागठबंधन सरकार की एक अन्य सहयोगी भाकपा-माले (लिबरेशन) ने भी राजद नेता कार्तिकेय को मंत्रिमंडल में शामिल करने पर पुनर्विचार की मांग की है। भाकपा माले ने कहा, "नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव दोनों को राजद नेता कार्तिक कुमार के खिलाफ मामले की गंभीरता को समझना चाहिए। इस मुद्दे पर चर्चा की जरूरत है और सीएम और उनके डिप्टी द्वारा आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।

कार्तिकेय कुमार विवाद पर कांग्रेस
कार्तिकेय कुमार विवाद पर ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) की बिहार इकाई के प्रभारी भक्त चरण दास ने कहा, "मुझे कहना होगा कि अदालती कार्यवाही से लगातार अनुपस्थित रहना या समन से बचना अच्छा नहीं है।" उन्होंने कहा कि महागठबंधन सरकार में कार्तिकेय के शामिल होने को लेकर जो विवाद पैदा हुआ है, वह अनुचित है। मामले को सुलझाने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। कांग्रेस नेता भक्त चरण दास ने कहा कि वह 24 अगस्त को पटना का दौरा करेंगे और उनकी पार्टी के नेता नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के साथ इस मामले पर चर्चा करेंगे।

बिहार की महागठबंधन सरकार
बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पहले जब पूछा गया कि क्या कार्तिकेय कुमार मंत्रिमंडल में बने रहेंगे, तो उन्होंने कहा था कि सरकार मामले को देख रही है। गौरतलब है कि बिहार में महागठबंधन में वर्तमान में सात दल- जद (यू), राजद, कांग्रेस, भाकपा-माले (लिबरेशन), सीपीआई, सीपीआई (एम) और पूर्व सीएम जीतन राम मांझी की पार्टी HAM शामिल हैं। 243 सदस्यीय विधानसभा में 160 से अधिक विधायकों ने सरकार को समर्थन दिया है।

कार्तिकेय मामले में राजद की दलील
महागठबंधन सरकार की कैबिनेट विस्तार के बाद कार्तिकेय कुमार विवादों में हैं। बीजेपी ने मांग की है कि कार्तिकेय कुमार को कैबिनेट से हटाया जाए। भाजपा का आरोप है कि उनके खिलाफ अपहरण का मामला चल रहा है। बर्खास्तगी की मांग करते हुए, भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी ने आश्चर्य जताया कि "अपहरण के एक मामले में अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने वाला कोई व्यक्ति राज्य मंत्रिमंडल में कैसे शामिल हो गया।" भाजपा ने आरोप लगाया कि कार्तिकेय को 16 अगस्त को दानापुर अदालत में आत्मसमर्पण करना था, लेकिन इसके बजाय, वह राजभवन में मंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए आए। हालांकि, भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए राजद ने कहा कि कुमार को अदालत ने एक सितंबर तक अंतरिम संरक्षण दिया है।












Click it and Unblock the Notifications