Bihar Chunav 2025: होली-छठ पर बस सुविधा बढ़ाकर CM नीतीश ने साधा प्रवासी वोटरों पर निशाना, किया ये बड़ा ऐलान

Bihar Chunav 2025: (Nitish Kumar): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर हलचल तेज होती जा रही है और राजनीतिक दलों ने अपने-अपने वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हालिया घोषणा को केवल एक प्रशासनिक निर्णय मानना राजनीतिक दृष्टिकोण से बहुत बड़ी भूल होगी। दरअसल 24 जून 2025 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए फैसले -जिसमें राज्य सरकार द्वारा पर्व-त्योहारों के दौरान 299 नई एसी और नॉन-एसी बसों के परिचालन की योजना को मंजरी दी गई -को चुनावी नजर से देखा जाना चाहिए।

सीएम नीतीश ने 26 जून की सुबह एक्स पोस्ट में कहा, ''बिहार के लोग अलग-अलग पर्व-त्योहारों खासकर छठ, होली, दीपावली एवं दुर्गा पूजा के अवसर पर काफी संख्या में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और पश्चिम बंगाल से घर आते हैं। पर्व-त्योहारों के अवसर पर बिहार आने में लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बिहार आने वाले लोगों की यात्रा को सुगम बनाने और उनकी सहूलियत के लिए हमारी सरकार लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में बिहार से जुड़े अंतर्राज्यीय मार्गों पर राज्य सरकार 299 एसी और नॉन एसी बसों का परिचालन कराने जा रही है।''

Bihar Chunav 2025 Nitish Kumar

🔴 प्रवासी बिहारी: एक निर्णायक वोट बैंक

बिहार से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में काम करने वाले लाखों प्रवासी बिहारी हर चुनाव में किसी न किसी रूप में भाग लेते हैं -भले ही वह मतदान करने गांव लौटकर आएं या अपने गांव में रहने वाले परिवार को किसी पार्टी विशेष के पक्ष में मनाएं। ऐसे में यह वर्ग राजनीतिक दलों के लिए बेहद अहम है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह कहना कि "त्योहारों के समय लोगों को बिहार आने में कठिनाई होती है, इसलिए सरकार 299 बसें चलाएगी और केंद्र सरकार से विशेष ट्रेनों की भी मांग करेगी" सीधे तौर पर इन्हीं प्रवासी बिहारी मतदाताओं को संबोधित करता है।

🔴 राजनीतिक टाइमिंग पर सवाल

इस घोषणा की टाइमिंग भी बेहद अहम है। चुनाव से महज कुछ महीने पहले इतनी बड़ी परिवहन योजना लाना कोई सामान्य फैसला नहीं है। नीतीश कुमार जानते हैं कि पिछले कुछ सालों में छठ, होली और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान ट्रेनों और बसों में भारी भीड़ होती है, टिकट मिलना मुश्किल होता है, और सफर बेहद मुश्किल भरा हो जाता है। ऐसे में अगर उनकी सरकार यह संदेश दे सके कि वह इस परेशानी को समझती है और उसे दूर करने के लिए कदम उठा रही है, तो प्रवासी मतदाताओं के बीच उनकी छवि एक 'संवेदनशील मुख्यमंत्री' की बनेगी।

🔴 विपक्ष के लिए चुनौती

विपक्षी दलों के लिए यह योजना एक नई चुनौती है। एक ओर जहां वे नीतीश सरकार पर "थकी हुई सरकार" होने का आरोप लगाते रहे हैं, वहीं अब मुख्यमंत्री एक-एक मुद्दे को उठाकर यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि सरकार अभी भी सक्रिय है और जनता के हित में फैसले ले रही है।

🔴 इस घोषणा से लाभ किसे?

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यह बस योजना भले ही प्रशासनिक दृष्टिकोण से उचित हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने और भी बड़े हैं। यह एक सोची-समझी रणनीति है जिसके जरिए, प्रवासी मतदाताओं का विश्वास जीतना, विकासशील और संवेदनशील नेतृत्व की छवि बनाना,
विपक्ष को बैकफुट पर धकेलना, चुनाव के ठीक पहले जमीनी मुद्दों पर ध्यान देना जैसे राजनीतिक लक्ष्यों को साधने की कोशिश की जा रही है।

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