बिहार में जातिगत जनगणना के 'आंकड़े जाली और फर्जी हैं', नीतीश कुमार को पूर्व सहयोगियों से मिली ये चुनौती

Bihar Caste Census and Politics: बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ जातिगत जनगणना को लेकर उनके पूर्व सहयोगियों ने ही मोर्चा खोल दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक जनता दल के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने जातिगत सर्वे के आंकड़ों को पूरी तरह से 'जाली और फर्जी' करार दिया है।

इसी तरह से राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने भी इस रिपोर्ट को राजनीतिक द्वेष से भरा हुआ बताया है और उन्होंने चुनौती देते हुए कहा है कि उनके गांव में कोई सर्वे करने के लिए आया ही नहीं है। पारस को भी उनके भतीजे चिराग पासवान के मुकाबले सीएम नीतीश कुमार का करीबी बताया जाता है।

kushwaha and paras on bihar caste census

जातिगत जनगणना रिपोर्ट के खिलाफ आंदोलन का ऐलान
उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार में जाति आधारित सर्वे रिपोर्ट को लेकर कहा है कि 'हम फर्जी आंकड़ों के खिलाफ आवाज उठाएंगे। हमने फैसला किया है कि 11 अक्टूबर को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन करेंगे और 14 अक्टूबर को पटना में गांधी मैदान से राजभवन तक मार्च करेंगे और गवर्नर को ज्ञापन सौंपेंगे।'

यह आंकड़े पूरी तरह से जाली और फर्जी हैं- उपेंद्र कुशवाहा
उन्होंने आरोप लगाया है कि 'हमें लगता है कि सरकार ने जल्दबाजी में आने वाले चुनावों को देखते हुए यह आंकड़े जारी किए हैं.....इसका फोकस सिर्फ चुनावों और राजनीतिक लाभ पर था और जनता के लाभ से इसका कोई मतलब नहीं था.....यह आंकड़े पूरी तरह से जाली और फर्जी हैं......घर में बैठकर बनाया गया आंकड़ा है, लोगों के बीच जाकर जुटाया गया आंकड़ा नहीं है....'

उन्होंने कहा है कि वे राज्य सरकार से मांग करेंगे कि जरूरत हो तो लोगों के भ्रम को दूर करने के लिए इसे फिर से कराए। उन्होंने यह भी कहा कि देश भर में सबसे पहले इस तरह की जनगणना कराने का क्रेडिट लेने के लिए आनन-फानन में यह आंकड़े जारी करवाए गए हैं।

राजनीतिक द्वेष से यह जातिगत सर्वे कराया है- पशुपति पारस
वहीं केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने कहा है कि 'नीतीश कुमार ने अपना राजनीतिक वर्चस्व जमाने के लिए राजनीतिक द्वेष से यह जाति सर्वे कराया है.....यह पटना में सचिवालय में बैठकर कराया गया सर्वे है....'

मेरे गांव में आजतक कोई सर्वे वाला नहीं गया है- पारस
उन्होंने कहा, 'हम चैलेंज करते हैं बिहार सरकार को मुख्यमंत्री को चैलेंज करते हैं....मेरे गांव में आजतक कोई सर्वे वाला नहीं गया है......।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 'ऊंची जाति के लोग, पासवान जाति के लोग जो घमंडिया गठबंधन को वोट नहीं देते हैं....सर्वे में जानबूझकर उन्हें नीचे दिखाया गया है......।'

दोषी कर्मचारी-अफसरों को सजा देने की मांग
उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से दोबारा सर्वे कराने की मांग करते हुए कहा है कि जिस भी कर्मचारी और पदाधिकारी ने जानबूझकर नाजायज रिपोर्ट भेजी है, उसे सजा दें। उन्होंने कहा है कि ऐसा नहीं होने पर पूरे बिहार में धरना-प्रदर्शन और आंदोलन शुरू हो जाएगा।

इससे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने भी कहा था कि आम लोगों की बात छोड़ दीजिए, मेरे परिवार का ही सर्वे नहीं हुआ है। इस तरह के दावे बिहार जातिगत सर्वे की रिपोर्ट पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं; और यदि नीतीश सरकार के पास विपक्ष के इन आरोपों के खिलाफ तथ्य हैं तो उसे जनता के सामने जरूर रखने चाहिए।

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