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20 लाख करोड़ के ऐतिहासिक आर्थिक पैकेज का ऐलान करके भारत ने तमाम देशों को इस मामले में पीछे छोड़ा

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस से देश तकरीबन दो महीने से लॉकडाउन में हैं। लॉकडाउन की वजह से देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई है, करोड़ो लोग बेरोजगार हो गए हैं, तमाम इंडस्ट्री, उद्योग, धंधे बंद हो गए हैं। ऐसे में पूरा देश एक अदद बड़े आर्थिक पैकेज का इंतजार कर रहा था, जो एक बार फिर से देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला सके। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश को संबोधित करते हुए अबतक के सबसे बड़े आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है, अहम बात यह है कि यह पैकेज देश की जीडीपी का तकरीबन 10 फीसदी है, यह अपने आप में ही ऐतिहासिक ऐलान है, साथ ही सरकार के उस संकल्प को भी दर्शाता है कि वह देश की अर्थव्यवस्था को एक बार फिर पटरी पर लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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इन देशों को पीछे छोड़ा

इन देशों को पीछे छोड़ा

पीएम मोदी ने जिस आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है, अगर उसकी तुलना अन्य देशों की जीडीपी फीसदी से करें तो यह तमाम बड़े देशों से कहीं ज्यादा है। जापान ने सर्वाधिक जीडीपी का 21.1 फीसदी के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है। वहीं अमेरिका ने जीडीपी का 13 फीसदी, स्वीडन ने 12 फीसदी, जर्मनी ने 10.7 फीसदी जीडीपी का आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है। जबकि भारत इस लिस्ट में पांचवे पायदान पर आता है। भारत ने जीडीपी का कुल 10 फीसदी के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है।

यूरोपीय संघ से भी ज्यादा

यूरोपीय संघ से भी ज्यादा

तमाम बड़े देशों के आर्थिक पैकेज से अगर भारत की तुलना करें तो भारत ने कई बड़े देशों को इस मामले में पीछे छोड़ दिया है। फ्रांस ने जहां अपनी जीडीपी के 9.3 फीसदी, स्पेन ने 7.3 फीसदी, इटली ने 5.7 फीसदी, यूके ने 5.0 फीसदी, चीन ने 3.8 फीसदी के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है। वहीं अगर पूरे यूरोपीय यूनियन के आर्थिक पैकेज की भारत से तुलना करें तो भी भारत का आर्थिक पैकेज जीडीपी के मामले में इन देशों से कहीं आगे है। यूरोपीय यूनियन के आर्थिक पैकेज को देखें तो वह जीडीपी का कुल 7.4 फीसदी है।

कितनी है भारत की जीडीपी

कितनी है भारत की जीडीपी

हालांकि हमे यहां इस बात को समझना होगा कि भारत की वर्ष 2019 की कुल जीडीपी 3.202 ट्रिलियन यूएस डॉलर है। वहीं जापान की जीडीपी 125.96 ट्रिलियन डॉलर है। ऐसे में भारत इस लिहाज से भारत की कुल जीडीपी इन तमाम देशों से कहीं कम हैं, लेकिन जीडीपी के लिहाज से सबसे बड़ा आर्थिक पैकेज देने के मामले में भारत पांचवा देश बना गया है। बता दें कि यह आर्थिक पैकेज देश के चार अहम सेक्टर लैंड, लेबर, लिक्विडिटी और लॉस को मजबूत करने के लिए दिया गया है। इस बात की जानकारी खुद प्रधानमंत्री मोदी ने देश के नाम संबोधन में दी है। आर्थिक पैकेज की विस्तृत जानकारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 13 मई को देंगी।

20 लाख करोड़ का संबल

20 लाख करोड़ का संबल

आर्थिक पैकेज का ऐलान करते हुए पीएम ने कहा कि इस आर्थिक पैकेज के जरिए देश के अलग-अलग वर्गों को 20 लाख करोड़ का संबल मिलेगा। यह आर्थिक पैकेज 2020 में देश की विकास यात्रा को एक नई गति देगा। पीएम मोदी ने कहा कि इस पैकेज के जरिए सभी प्रकार लघु और बड़े उद्योगों के लिए लाभ पहुंचाया जाएगा। यह पैकेज हर उस श्रमिक और किसान के लिए है, जो हर स्थिति और मौसम में देशवासियों के लिए श्रम करता है। इसके अलावा मध्यम वर्ग के लिए भी ये पैकेज राहत देगा, जो देश के लिए टैक्स देता है।

आत्मनिर्भर भारत बनाने का संकल्प

आत्मनिर्भर भारत बनाने का संकल्प

पीएम ने कहा कि 'ये आर्थिक पैकेज आत्मनिर्भर भारत अभियान की अहम कड़ी के तौर पर काम करेगा। हाल में सरकार ने कोरोना संकट से जुड़ी जो आर्थिक घोषणाएं की थीं, जो रिजर्व बैंक के फैसले थे। और, आज जिस आर्थिक पैकेज का ऐलान हो रहा है, उसे जोड़ दें तो ये करीब-करीब 20 लाख करोड़ रुपए का है। इन सबके जरिए देश के विभिन्न वर्गों को, आर्थिक व्यवस्था की कड़ियों को, सपोर्ट मिलेगा। ये आर्थिक पैकेज उन सभी उद्योगों के लिए है, जो करोड़ों लोगों की आजीविका का साधन हैं।'

क्या है जीडीपी

क्या है जीडीपी

यहां यह समझना काफी आवश्यक हो जाता है कि आखिर जीडीपी क्या होती है और आखिर इसकी गणना कैसे की जाती है। जीडीपी को ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानि सकल घरेलू उत्पाद कहते हैं। एक वर्ष के भीतर देश में राष्ट्र की सीमा के भीतर सभी माल और सेवाओं के बाजार मूल्य के योग को जीडीपी कहते हैं। यानि देश में उत्पादित होने वाले सभी सामान और सेवाओं पर होने वाले व्यय को जोड़ा जाता है। सरल शब्दों में कहें तो एक वर्ष के भीतर देश में उत्पादित होने वाले सभी सामान, निवेश, सरकारी खर्च, निर्यात में से आयात को घटाने के बाद जो मूल्य हो उस सभी के योग को जीडीपी कहते हैं।

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English summary
Biggest economic package in history India leaves behind many countries of the world
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