पहले इलाज कराओ पत्नी का तब मिलेगा तलाक- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। तलाक के मामले में देश की सर्वोच्च अदालत ने अहम फैसला दिया है। पत्नी को स्तन कैंसर के चलते तलाक की अर्जी देने वाले दंपति को कोर्ट ने तलाक देने से साफ इनकार कर दिया है।


दंपति ने आपसी सहमति का हवाला देते हुए तलाक की अर्जी दी थी जिसे स्वीकार करने से कोर्ट ने इनकार कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पहले पत्नी का इलाज कराये उसके बाद ही तलाक दिया जा सकता है।

कोर्ट में पति ने पत्नी के इलाज के लिए साढे बारह लाख रुपए भी देने का प्रस्ताव दिया था जिसपर पति और पत्नी के बीच सहमति बन गयी थी। लेकिन कोर्ट ने पति को उसकी जिम्मेदारी का एहसास दिलाते हुए कहा कि पहले इलाज करायें फिर तलाक की अर्जी दें।

न्यायाधीश एमवाई इकबाल और सी नग्गपन की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि हिंदू धर्म में पत्नी की देखभाल को पवित्र कर्तव्य बताया गया है। कोर्ट ने कहा कि पति पत्नी के बीच तलाक को लेकर बनी सहमति में संदेह दिख रहा है। ऐसा लगता है कि पत्नी को दबाव में तलाक के लिए तैयार किया गया है।

खंडपीठ ने कहा कि महज इलाज का खर्च देकर पत्नी से तलाक नहीं लिया जा सकता है। इसके अलावा पति को पत्नी के इलाज की मूलभूत सुविधाये भी मुहैया कराना चाहिए जोकि उसका कर्तव्य है।

कोर्ट ने पति से पत्नी के इलाज के लिए तत्काल प्रभाव से पांच लाख रुपए देने का भी निर्देश दिया। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि तब तक तलाक की अर्जी पर सुनवाई नहीं की जाएगी जबतक पत्नी का स्वास्थ्य ठीक नहीं हो जाता।

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