विकास दुबे मामले में बड़ी जानकारी आई सामने, एसटीएफ के दो बर्खास्त सिपाही करते थे उसकी मदद

लखनऊ। कुख्यात अपराधी विकास दुबे मामले में सनसनीखेज जानकारी सामने आई है। जानकारी के अनुसार विकास दुबे की गैंग में दो सिपाही भी शामिल थे। एसटीएफ को इस बात की सूचना मिली है दोनों बर्खास्त सिपाही भी उसकी गैंग में शामिल थे और उसकी मदद करते थे। हालांकि जिस दिन कानपुर में घटना हुई थी, उस दिन ये दोनों ही सिपाही मौके पर मौजूद नहीं थे, लेकिन इन लोगों ने कई मौकों पर विकास दुबे की मदद की थी। ये सिपाही विकास दुबे को इस बात की जानकारी देते थे कि वह कहां से अवैध असलहा पा सकता है। विकास की सीडीआर में यह जानकारी सामने आई है कि जिसमे दो एसटीएफ के नंबर मिले हैं, इन दोनों ही नंबर के बारे में एसटीएफ के अधिकारी जानकारी हासिल करने में जुटे हैं।

संदिग्ध नंबर की जांच

संदिग्ध नंबर की जांच

दरअसल विकास दुबे की मौत के बाद पुलिस लगातार उसके नेटवर्क की जांच कर रही है। इस जांच के दौरान विकास दुबे की सीडीआर पर काम कर रहे पुलिस अधिकारियों को एसटीएफ के दो संदिग्ध नंबर मिले हैं। इन नंबरों की जब जांच की गई तो यह बात सामने आई कि ये दोनों ही नंबर बर्खास्त एसटीएफ के सिपाहियों का है। इन दोनों ही सिपाहियों को एसटीएफ से कई साल पहले निकाल दिया गया था। हालांकि पुलिस को अभी इन दोनों ही सिपाहियों के पते की जानकारी नहीं मिल सकी है।

समय-समय पर देते थे जानकारी

समय-समय पर देते थे जानकारी

एसटीएफ के सूत्रों के अनुसार विकास दुबे के घर पर जिस दिन गोलीबारी की घटना हुई थी, उस दिन ये दोनों ही सिपाही मौके पर मौजूद नहीं थे, लेकिन इनकी बातचीत का रिकॉर्ड मिला है, जिसे पुलिस वेरिफाई कर रही है। जानकारी के अनुसार ये दोनों ही सिपाही काफी समय से विकास दुबे के संपर्क में थे और ये लोग पुलिस की रणनीति के बारे में विकास के साथ जानकारी साझा करते थे। यही नहीं ये दोनों सिपाही अपने नेटवर्क का इस्तेमाल करके उसे असलहा भी दिलाने में मदद करते थे।

गिरफ्तारी के बाद हो गई थी विकास की मौत

गिरफ्तारी के बाद हो गई थी विकास की मौत

बता दें कि विकास दुबे को मध्य प्रदेश में गिरफ्तार किया गया था। यहां से जब उसे कानपुर लाया जा रहा था तो इस दौरान पुलिस की गाड़ी का हादसा हुआ। हादसे का फायदा उठाकर विकास दुबे पुलिस की गिरफ्त से भागने की कोशिश कर रहा था, इसी दौरान पुलिस की मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई। लेकिन इस एनकाउंटर पर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसके बाद यह मामला कोर्ट पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने विकास दुबे और उसके साथियों की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना विस्तृत जवाब दाखिल किया, अपने जवाब में पुलिस ने कहा कि "मुठभेड़" सही थीं और उसे फर्जी नहीं कहा जा सकता।

फर्जी नहीं कहा जा सकता एनकाउंटर को

फर्जी नहीं कहा जा सकता एनकाउंटर को

विकास दुबे की मुठभेड़ का बचाव करते हुए कहा कि बारिश और तेज गति के कारण वाहन पलट गया था। वाहन में सवार पुलिस कर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। विकास दुबे ने घायल कर्मियों में से एक से पिस्तौल छीन ली। उसे आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया, लेकिन उसने ऐसा करने से इनकार कर दिया और पुलिस पर गोलीबारी की। पुलिस ने कहा कि "मुठभेड़" सही थीं और इन्हें फर्जी नहीं कहा जा सकता। यूपी सरकार ने दलील दी कि इसे किसी भी तरह फेक एनकाउंटर नहीं कहा जा सकता है। इसे लेकर किसी तरह का संशय नहीं रहे इसके लिए सरकार ने सभी तरह के कदम उठाए हैं। यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- फेक नहीं था विकास दुबे का एनकाउंटर, 9 राउंड गोलियां उसने चलाई थीं। यूपी पुलिस ने दुबे के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों की सूची सुप्रीम कोर्ट को दी है।

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