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Bhuj: 1971 के युद्ध में भुज में क्या हुआ था? जो अजय देवगन की फिल्म में दिखाया गया है

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नई दिल्ली, 12 जुलाई: अजय देवगन की बहु-प्रतिक्षित फिल्म 'भुज द प्राइड ऑफ इंडिया' का ट्रेलर आ गया है। ऐक्शन से भरपूर देशभक्ति पर आधारित यह फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर आधारित है। इस फिल्म का निर्देशन अभिषेक दुधैया ने किया है। इस फिल्म में अभिनेता अजय देवगन ने स्क्वाड्रन लीडर विजय कुमार कार्णिक का रोल निभाया है, जो उस वक्त भुज एयरबेस के इंचार्ज थे और उन्हें उसकी हीरो माना जाता है। यह फिल्म भारतीय वायुसेना की वीरता की कहानी तो बयां करेगा ही, उसमें सेना का साथ देने वाली 300 ग्रामीण, लेकिन जांबाज महिलाओं की दास्तां भी दिखाए जाने की उम्मीद है। आइए जानते हैं कि 1971 के युद्ध में आखिर भुज में हुआ क्या था, जिसके चलते उसपर यह फिल्म बनाई गई है।

'भुज द प्राइड ऑफ इंडिया'

'भुज द प्राइड ऑफ इंडिया'

अजय देवगन की फिल्म 'भुज द प्राइड ऑफ इंडिया' में उनके अलावा संजय दत्त भी हैं, जिन्होंने आर्मी स्काउट रणछोड़दास पागी की भूमिका निभाई है। जबकि, सोनाक्षी सिन्हा समाज सेविका सुंदरबेन जेठा मधारपर्या, एमी विर्क फ्लाइट ऑफिसर, विक्रम सिंह बाज जेठाज और नोरा फतेही भारतीय जासूस हीना रेहमान की रोल में नजर आए हैं। 3 मिनट 20 सेकंड के वीडियो में दिखाया गया है कि किस तरह से स्क्वाड्रन लीडर विजय कुमार कार्णिक और उनकी टीम ने पाकिस्तानी सेना से लड़ाई लड़ी, जबकि उन्होंने 14 दिनों में भुज एयरफिल्ड को 35 बार तबाह कर दिया था। स्थानीय गांव की 300 महिलाओं की मदद से भारतीय वायुसेना के एयरबेस को चंद घंटों में दोबारा से निर्माण कर दिया गया।

    Ajay Devgan की 'Bhuj' का ट्रेलर रिलीज, 1971 के युद्ध में Bhuj में क्या हुआ था?| वनइंडिया हिंदी
    दो मोर्चों पर लड़ा गया था पाकिस्तान से युद्ध

    दो मोर्चों पर लड़ा गया था पाकिस्तान से युद्ध

    1971 में भारत का पाकिस्तान के साथ जंग बांग्लादेश की मुक्ति के लड़ा गया था। यह युद्ध भारत ने दो मोर्चों पर लड़ा था। पूर्वी पाकिस्तान, जो कि अब बांग्लादेश बन चुका है; और पश्चिमी पाकिस्तान, जो आज का पाकिस्तान है। यह युद्ध आज भी कुछ वजहों से ज्यादा जाना जाता है, भुज में स्क्वाड्रन लीडर विजय कुमार कार्णिक और उनकी टीम, आईएनएस कट्टाबोमन और उन ग्रामीण महिलाओं की वजह से जाना जाता है, जिसने एयर स्ट्रिप बनाने में भुज में भारतीय सेना की सहायता की थी।

    1971 के युद्ध में भुज में क्या हुआ था?

    1971 के युद्ध में भुज में क्या हुआ था?

    1971 की जंग भारतीय मित्र वाहिनी और पाकिस्तानी सेना के बीच हुई थी। यह जंग 3 दिसंबर, 1971 को शुरू हुई और 16 दिसंबर, 1971 को बांग्लादेश के आजाद होने के साथ खत्म हुई। इस लड़ाई की शुरुआत 11 इंडियन एयर फोर्स स्टेशन पर ऑपरेशन चंगेज खान सीरियल स्ट्राइक के साथ शुरू हुई थी। 8 दिसंबर, 1971 को रात के समय पहले पाकिस्तानी घुड़सवार सेना ने भारत पर धावा बोला। फिर पाकिस्तानी वायुसेना ने इंडियन एयरफोर्स के भुज एयर स्ट्रिप पर एक के बाद एक 14 नेपाम बम गिरा डाले। इसका नतीजा ये हुआ कि भारतीय वायुसेना के विमानों को उड़ान भरने में मुश्किलें खड़ी हो गईं।

    गांव की 300 महिलाओं ने 72 घंटे में एयर स्ट्रिप बना डाला

    गांव की 300 महिलाओं ने 72 घंटे में एयर स्ट्रिप बना डाला

    भारतीय वायुसेना के पास एयर स्ट्रिप को ठीक करने की चुनौती थी। बीएसएफ से मदद लेने की कोशिश की गई, लेकिन इस काम को पूरा करने के लिए उनके पास पर्याप्त संख्या में जवान नहीं थे। लेकिन, पास के माधापुर के लोगों ने इंडियन एयर फोर्स की ओर मदद का हाथ बढ़ाया। खासकर गांव की करीब 300 महिलाओं ने कमाल कर दिखाया। उनकी मदद से भारतीय वायुसेना ने एयर स्ट्रिप बनाने का काम सिर्फ 72 घंटे में ही पूरा कर लिया गया। उस अभियान में शामिल वालबाई सेघानी ने एक दैनिक से कहा था, 'हम 300 महिलाएं वायु सेना की मदद के लिए अपने घरों से निकल गईं, हमें यह सुनिश्चित करना था कि हमारे पायलट यहां से फिर से उड़ान भर सकें। अगर हम मर जाते, तो यह हमारे लिए एक सम्मानजनक मौत होती।'

    महिलाओं ने किस तरह दिया मिशन को अंजाम

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    वाकई वह काम इतना आसान नहीं था। सेघानी ने कहा था, 'हम तुरंत दौड़कर झाड़ियों में छिप जाते थे। हमें खुद को छिपाने के लिए हल्के हरे रंग की साड़ी पहनने के लिए कहा गया था। एक छोटा सायरन संकेत होता था कि हम फिर से काम शुरू कर सकते हैं। हमने दिन के उजाले का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने के लिए सुबह से शाम तक कड़ी मेहनत की थी। '

    स्‍क्‍वाड्रन लीडर विजय कार्णिक थे उस जंग के हीरो

    स्‍क्‍वाड्रन लीडर विजय कार्णिक थे उस जंग के हीरो

    स्क्वाड्रन लीडर विजय कुमार कार्णिक भुज में पाकिस्तान के साथ हुई जंग के असली हीरो थे। तबाह हो चुके एयर स्ट्रिप को ठीक करने के लिए महिलाओं को गोलबंद करने के पीछे आइडिया उन्हीं का था, जो मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ। उनका जन्म 6 नवंबर, 1939 को नागपुर में हुआ था। नागपुर यूनिवर्सिटी से बैचलर डिग्री लेने के बाद वो इंडियन एयरफोर्स में शामिल हुए थे। वह आर्मी बैकग्राउंड से थे और उनके भाई भी भारतीय सेना में थे। उन्होंने 1962 में एयरफोर्स ज्वाइन की थी। उन्होंने उस जंग को याद करते हुए एकबार कहा था, 'हम एक युद्ध लड़ रहे थे और अगर इनमें से किसी भी महिला को कोई नुकसान हुआ होता, तो यह बहुत बड़ी क्षति होती। लेकिन, मैंने एक फैसला लिया और वह काम कर गया। मैंने उन्हें बताया था कि हमला होने पर वो कहां शरण ले सकती हैं और उन्होंने बहादुरी से उसका पालन किया।'

    इसे भी पढ़ें- अजय देवगन की फिल्म 'भुज' का ट्रेलर जारी, देशभक्ति और जबरदस्त एक्शन सीन ने बढ़ाई फैंस के दिलों की धड़कनइसे भी पढ़ें- अजय देवगन की फिल्म 'भुज' का ट्रेलर जारी, देशभक्ति और जबरदस्त एक्शन सीन ने बढ़ाई फैंस के दिलों की धड़कन

    फिल्म का ट्रेलर

    सोशल मीडिया पर फिल्म का छोटा सा वीडियो अपलोड करते हुए अभिनेता अजय देवगन ने लिखा है- 'भुज द प्राइड ऑफ इंडिया का आधिकारिक ट्रेलर है। जब बहादुरी आपका कवच बन जाता है, तो हर कदम आपको जीत की ओर ले जाता है! ' (फिल्म की तस्वीरें: डिजनीप्लस हॉटस्टार वीआईपी के सोशल मीडिया पर अपलोडेड वीडियो के स्क्रीनग्रैब से ली गई हैं)

    English summary
    In the Indo-Pak war of 1971 in Bhuj, Kutch, 300 women showed courage, built an airstrip in 72 hours
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