भीमा-कोरेगांव हिंसा में पुलिस की एफआईआर में MBA, ITऔर इंजीनियरिंग के छात्र
मुंबई। भीमा-कोरेगांव में जिस तरह से हिंसा हुई और उसमे एक व्यक्ति की मौत हुई उसमें कई ऐसे लोगों के लिप्त होने के मामले सामने आए हैं जिसने जांच एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। इस हिंसा में एमबीए के सेकंड इयर के छात्र मिलिंद गायकवाद का नाम सामने आया है जोकि मुंबई इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च का छात्र है, इसके अलावा शुभम येदे जोकि इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर का छात्र है वह विवेकानंद एजूकेशन सोसाइटी द्वारा चलाए जा रहे पॉलीटेक्निक कॉलेज का छात्र है। साथ ही सुमित थोराट जोकि बीएससी का छात्र है और वह मुंबई यूनिवर्सिटी में पढ़ता है।

3 जनवरी को हुई थी हिंसा
ये तीनों छात्र चेंबूर के इलाके में रहते हैं। पुलिस ने जिन 40 लोगों को गिरफ्तार किया है उसमे इन तीनों छात्रों का नाम भी शामिल है। इनपर आरोप है कि हिंसा के दौरान इन लोगों ने संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। महाराष्ट्र बंद के दौरान 3 जनवरी को हिंसा में इन लोगों का नाम शामिल है। इन सभी को अभी न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, लेकिन इनके परिवारों का इस पूरी घटना के बारे में कुछ और ही कहना है।
परिवार ने लगाया फंसाने का आरोप
गायकवाड़ के परिवार का कहना है कि बुधवार को तीन बजे गायकवाड़ अपने हॉस्टल से बाहर निकला था, देर उसके दोस्त ने हमे इस बात की जानकारी दी कि पुलिस ने उसे हिंसा के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। एफआईआर में पुलिस का दावा है कि जिन लोगों ने हिंसा के दौरान पत्थरबाजी की थी उसमे गायकवाड़ का नाम भी शामिल है, उनसे बीईएसटी की बसों पर पत्थर फेंके थे और उसने रास्ता रोको अभियान में हिस्सा लेते नारेबाजी की थी।
आरोपी के भाई ने पुलिस पर साधा निशाना
वहीं थोराट को को पुलिस ने गोवांडी सेंट्रल से गिरप्तार किया था। थोराट के परिवार का दावा है कि वह अपनी पढ़ाई के बाद कुछ देर के लिए बाहर निकला था, लेकिन शाम को हमे पता चला कि पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।
वहीं येदे को को पुलिस ने गोवांदी से गिरफ्ता किया था, जहां थोराट को गिरफ्तार किया गया था। येदे के परिवार का भी दावा है कि उसे गलत तरीके से पुलिस ने फंसाया है। पुलिस ने शिवम रांदीव को भी गिरफ्तार किया है जिसका टीबी का इलाज चल रहा है। उसपर आरोप है कि उसने बंद के दौरान हिंसा भड़काने में लिप्त था और वह प्रदर्शनकारियों के साथ था। शिवम के चचेरे भाई योगेश रांदीव का कहना है कि पुलिस असल आरोपियों को गिरफ्तार करने की बजाए छात्रों को गिरफ्तार कर रही है, वह भी उनकी पहचान किए बगैर।
क्या कहा गया एफआईआर में
पुलिस ने हरीबा जाधव के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की है। इस एफआईआर के बारे में उनका कहना है कि भीड़ ने बस को रोका और नारेबाजी करनी शुरू कर दी, जिसके बाद इन लोगों बस की खिड़की पर पत्थर मारना शुरू कर दिया, जिसमे से एक पत्थर मेरे पैर पर लगा और मेरे पैर से खून निकलने लगा। एक और एफआईआर जो दर्ज की गई है उसमे कहा गया है कि 500-700 लोगों की भीड़ ने चेंबूर नाके पर इकट्ठा होकर रास्ता रोक दिया, जिसकी वजह से काफी जाम लग गया और लोगों ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। पुलिस ने इन लोगों से पत्थर फेंकने से रोकने से मना किया, लेकिन लोगों ने इस मांग को नहीं माना, जिसकी वजह से पुलिस को इनपर लाठीचार्ज करना पड़ा।












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