भीमा कोरेगाव हिंसा: पुणे सेशन कोर्ट ने दलित स्कॉलर आनंद तेलतुंबड़े को किया रिहा
मुंबई। भीमा कोरेगांव मामले में पुणे पुलिस की ओर से गिरफ्तार किए गए दलित स्कॉलर आनंद तेलतुंबड़े को पुणे सेशन कोर्ट ने रिहा करने का आदेश दिया है। बता दें कि आनंद तेलतुंबड़े को नक्सलियों के साथ संबंध होने के आरोप में आज सुबह गिरफ्तार किया गया था। जानकारी के मुताबिक गोवा प्रबंधन संस्थान के प्रोफेसर आनंद तेलतुंबड़े को पुणे पुलिस ने लगभग 3.30 बजे छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के घरेलू टर्मिनल से गिरफ्तार किया गया था।
रिहा होने के बाद क्या बोले आनंद तेलतुंबड़े
रिहा किए जाने के बाद आनंद तेलतुंबड़े ने कहा कि मैं कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं। लेकिन पुलिस ने क्या किया, पहले गिरफ्तार किया उसके बाद ये सब ड्रामा किया है ये आपत्तिजनक है। बता दें कि गिरफ्तारी के बाद पुलिस आज उन्हें पुणे सेशन कोर्ट में पेश की, जहां कोर्ट ने उनको हिरा करने का आदेश दे दिया है। इससे पहले शुक्रवार को पुणे सेशन कोर्ट ने तेलतुंबड़े की अग्रिम जमानत याचिका को रद्द कर दिया था। जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी की गई है। अग्रिम जमानत की याचिका रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा था कि जांच अधिकारियों के पास तेलतुंबड़े के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। आनंद तेलतुंबड़े के वकील ने उनकी गिरफ्तारी को अवैध करार दिया है, वकील ने कहा है कि कार्यकर्ताओं को 11 फरवीर तक गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की गई थी।

गिरफ्तारी पर वकील ने खड़े किए सवाल
वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 11 जनवरी के अपने आदेश में आनंद तेलतुंबड़े को चार सप्ताह की राहत दी थी जिसका अर्थ है कि उन्हें उन्हें 11 फरवरी तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता था। लेकिन पुलिस ने उनको गिरफ्तार किया है। वकील ने कहा कि हम इस बारे में अदालत को भी सूचित करेंगे। बता दें कि आनंद तेलतुंबड़े ने भीमा कोरेगांव हिस्सा के सिलसिल में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी लेकिन कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुणे की अदालत के सामने याचिका लगाई थी।

क्या है भीमा कोरेगांव हिंसा
बता दें कि 31 दिसंबर 2017 को भीमा कोरेगांव में पेशवाओं पर महार रेजिमेंट की जीत के 200 साल पूरे हुए थे। इस अवसर पर पुणे के शनिवारवाड़ा में यल्गार परिषद ने जश्न मनाने के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जिसमें दलित संगठन के कइे नेताओं के अलावा सुधीर धावले, पूर्व जस्टिस बीजी कोल्से पाटिल और अल्पसंख्यकों पर हो अत्याचार का दावा करते हुए एकजुट हुए थे। लेकिन इसके अगले ही दिन यानी 1 जनवरी 2018 को भीमा कोरेगांव में हिंसा हो गई। यह हिंसा काफी विकराल रूप ले ली थी।












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