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भय्यूजी महाराज ने तुड़वाया था अन्‍ना हजारे का अनशन, संसद में शरद यादव ने उड़ाई थी खिल्‍ली

By Yogender Kumar
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भोपाल। आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज ने मंगलवार को इंदौर में गोली मारकर खुदकुशी कर ली। उन्‍हें घायल अवस्‍था में इंदौर के बॉम्‍बे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डॉक्‍टरों के मुताबिक, जब उन्‍हें अस्‍पताल लाया गया तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। भय्यूजी महाराज आध्‍यात्‍मिक जगत की बड़ी हस्‍ती होने के साथ ही राजनीति में भी खास प्रभाव रखते थे। नरेंद्र मोदी से लेकर कांग्रेस के दिग्‍गज नेताओं तक भय्यूजी महाराज के बेहद करीबी संबंध थे। जब 2011 में पूरे देश में अन्‍ना आंदोलन की लहर थी, तब यूपीए सरकार ने भय्यूजी महाराज को अन्‍ना हजारे के साथ बातचीत का जिम्‍मा सौंपा था। भय्यूजी महाराज का वास्तविक नाम उदय सिंह देखमुख है। उनके कांग्रेस के दिवंगत नेता विलासराव देशमुख से बड़े ही अच्‍छे रिश्‍ते थे। इसी वजह से भय्यूजी महाराज को अन्‍ना के साथ बातचीत करने के लिए बुलाया गया था।

दलित लड़की के हाथ तोड़ा था अन्‍ना ने अनशन पर भय्यू ने किया था पर्दे के पीछे काम

दलित लड़की के हाथ तोड़ा था अन्‍ना ने अनशन पर भय्यू ने किया था पर्दे के पीछे काम

साल 2011 में आखिरकार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अन्ना हजारे का अनशन 13वें दिन टूट था। उन्होंने नारियल पानी और शहद के साथ सभी आरोपों को धता बताते हुए दलित लड़की के हाथ से अनशन तोड़ा था। इस अनशन को तुड़वाने में कई लोगों को मुख्य भूमिका रही। इनमें सबसे अहम भूमिका रही तत्‍कालीन केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख और भय्यूजी महाराज की।

थक गए थे प्रणब मुखर्जी, तब विलासराव ने किया था भय्यूजी महाराज को याद

थक गए थे प्रणब मुखर्जी, तब विलासराव ने किया था भय्यूजी महाराज को याद

अन्ना हजारे का अनशन तुड़वाने के लिए यूपीए सरकार ने प्रणब मुखर्जी को मैदान में उतारा था, लेकिन टीम अन्ना के साथ उनकी अनबन के कारण उन्हें हाथ पीछे खींचना पड़ा था। इसके बाद सरकार ने एक बार फिर दांव खेला और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और तत्‍कालीन केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख का सहारा लिया। विलासराव ने बिना समय गंवाए भय्यूजी महाराज को याद किया, जिनका अन्‍ना हजारे के साथ सालों पुराना रिश्‍ता था।

अनशन टूटने से पहले ही भय्यूजी महाराज ने सुना दी थी अच्‍छी खबर

अनशन टूटने से पहले ही भय्यूजी महाराज ने सुना दी थी अच्‍छी खबर

अन्‍ना हजारे का अनशन टूटने से पहले ही भय्यूजी महाराज ने अच्‍छी खबर सुना दी थी। उन्‍होंने कहा था, 'हम सबके लिए एक अच्छी खबर है। अन्ना एक समाज विज्ञानी है और उनका जीवन राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण है। देश में अच्छे वातावरण के निर्माण के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे और उन्हें खुशी है कि केंद्र सरकार तथा अन्ना ने उन्हें बराबर की अहमियत दी।' हालांकि, भय्यूजी महाराज की संसद में शरद यादव ने खूब खिल्ली उड़ाई थी।

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अन्‍ना हजारे से था भय्यूजी महाराज का बहुत पुराना नाता

अन्‍ना हजारे से था भय्यूजी महाराज का बहुत पुराना नाता

भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए जन लोकपाल विधेयक लाने की मांग को लेकर अनशन पर बैठे अन्ना हजारे और सरकार के बीच मध्यस्थता का प्रयास करने के लिए जब भय्यूजी महाराज पहली बार पहुंचे थे, तब तक मध्‍य प्रदेश के बाहर उन्‍हें लोग ज्‍यादा नहीं जानते थे। हालांकि, अन्‍ना हजारे भय्यूजी महाराज को बड़े ही अच्‍छे से जानते थे, बल्कि दोनों का रिश्‍ता करीब एक दशक पुराना था। उस वक्‍त भय्यूजी महाराज ने कहा था कि उनका और अन्ना हजारे का परिचय आज का नहीं है। साल 2000 में उनकी संस्था सूर्योदय मिशन की ओर से पारनेर में सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया था, जिसमें अन्ना हजारे को आमंत्रित किया गया था, क्योंकि वह उनके समाज सुधार के कार्यों से प्रभावित थे। तब से भय्यूजी महाराज और अन्‍ना के बीच संपर्क लगातार बना रहा।

किसी से पुरस्‍कार नहीं लेते अन्‍ना पर भय्यूजी महाराज को नहीं कर सके थे इनकार

किसी से पुरस्‍कार नहीं लेते अन्‍ना पर भय्यूजी महाराज को नहीं कर सके थे इनकार

भय्यूजी महाराज के अनुसार, उनकी संस्था सूर्योदय मिशन हर साल 101 गरीब और बेसहारा लड़कियों की शादी करवाती है। अन्ना हजारे और भय्यूजी महाराज दोनों एक-दूसरे के सामाजिक सुधार के कार्यों से प्रभावित रहे और इसे आगे बढ़ाने के पक्षधर भी। वर्ष 2010 में इंदौर में गुरु पूर्णिमा पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें सूर्योदय मिशन ने अन्ना हजारे को सूर्योदय मानवता सेवा पुरस्कार भी दिया था। अन्ना हजारे हालांकि कोई भी सम्मान या पुरस्कार ग्रहण नहीं करते, लेकिन भय्यूजी की संस्था की ओर से मिलने वाले इस पुरस्कार के लिए उन्होंने सहमति दे दी थी। भय्यूजी महाराज की संस्‍था से पुरस्‍कार लेने पर अन्ना हजारे ने कहा था कि कई व्यक्ति व संस्थाएं उन्हें पुरस्कार देने के लिए आमंत्रित करती हैं, लेकिन आमतौर पर वह इन्हें ग्रहण नहीं करते, क्योंकि वह चाहते हैं कि उन्हें वह व्यक्ति सम्मानित करे, जिसके हाथ साफ हों। भय्यूजी महाराज साफ-सुथरे हैं, इसलिए उनके आग्रह पर पुरस्कार को नकार नहीं सका।

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English summary
Spiritual guru Bhayyuji Maharaj shoots himself to death. Bhayyuji shot to fame at the time of the Lokpal agitation led by Anna Hazare during the UPA regime. He was asked to mediate between the government and Hazare.
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