घंटों जल समाधि लिया करते थे भय्यूजी महाराज, पढ़ें पूरा प्रोफाइल

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    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में आध्यात्मिक संत भय्यूजी महाराज ने खुद को गोली मारकर खुदकुशी कर ली। उनकी खुदकुशी के बारे में सुनकर हर कोई सन्न रह गया है। गृहस्थ जीवन में रहते हुए संत जी जिंदगी जीने वाले भय्यूजी महाराज की राजनीति में गहरी पैठ थी। लोकपाल बिल के लिए अन्ना हजारे के अनशन को तुड़वाने में भय्यूजी महराज का खास रोल रहा था। हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा देने का प्रस्ताव दिया, लेकिन भय्यूजी महाराज ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। देशभर में उनके अनुयायी उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि भय्यूजी महाराज बचपन से ही संतों के संगत में नहीं रहे थे ब्लकि वो एक सफल मॉडल रह चुके थे। सियाराम शूटिंग-शर्टिंग के लिए उन्होंने मॉडलिंग की थी, लेकिन बाद में उन्होंने आध्यात्म का रास्ता अपना लिया। आइए उसकी जिंदगी के सफर पर एक नजर डाले......

     मॉडल से बने से संत

    मॉडल से बने से संत

    भय्यूजी महाराज का जन्म 29 अप्रैल 1968 में मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर में हुआ। उनका असली नाम उदय सिंह शेखावत था, लेकिन उनके भक्त उन्हें भय्यूजी महाराज के नाम से बुलाते हैं। भय्यूजी महाराज गृहस्थ जीवन में रहते हुए संत-सी जिंदगी जीते थे। वो अपने परिवार के साथ, अपने बच्चों और पत्ननियों के साथ रहते हुए संत का जीवन जीते थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बतौर मॉडल के तौर पर किया। उन्होंने कई मॉडलिंग असाइनमेंट किए। सियाराम शूटिंग-शर्टिंग के लिए उन्होंने पोस्टर मॉडलिंग भी की थी। उनकी तस्वीरें सियाराम के पोस्टर्स पर नजर आती थी।

     व्यक्तिगत जीवन

    व्यक्तिगत जीवन

    भय्यूजी महाराज ने दो शादियां की थीं। उनकी एक बेटी भी हैं। हाल ही में उन्होंने दूसरी शादी की है। 13 अप्रैल 2017 को उन्होंने शिवपुरी की डॉ आयुषी से दूसरी शादी की थी। उनकी पहली पत्नी माध्वी का निधन नवंबर 2015 को हो गया था। वो महंगी गाड़ियों में चलते थे, रोलेक्स ब्रांड की घड़ी पहनते थे और आलिशान बंगले में रहते थे। उनके पास एसयूवी , मर्सिडीज जैसी गाड़ियों का कलेक्शन था। उनपर एक साध्वी से अफेयर का आरोप लगा। इसके अलावा एक अभिनेता के साथ धोखाधड़ी करने का भी आरोप लगा था।

     राजनीतिक दलों के बीच दबदबा

    राजनीतिक दलों के बीच दबदबा

    अपने प्रवचनों से अपने भक्तों का मन जीत लेने वाले भय्यूजी महाराज सूर्य के अपासक थे। वो घंटों तक जल समाधि लेने में सक्षम थे। उनके भक्तों की तादात लाखों में थी। खासकर महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में उनके भक्तों की तादात सबसे ज्यादा था। महाराष्ट्र में उन्हें राष्ट्र संत का दर्जा मिला था। वहीं राजनीति में भी उनकी गहरी पैठ थी। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की राजनीति पर उनका गहरा प्रभाव रहता है। भय्यूजी महाराज के ससुर महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं। दिवंगत केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख से उनके करीबी संबंध रहे । वहीं कैबिनेट मंत्री नितिन गडकरी, संघ प्रमुख मोहन भागवत जैसे लोग उनके भक्तों की सूची में शामिल रहे हैं।

     बाकी संतों से अलग थी सोच

    बाकी संतों से अलग थी सोच

    जहां बाकी संत अपने मठ, शिष्य, व्यक्तिपूजा को बढ़ावा देते हैं, तो वहीं भय्यूजी महाराज इसे अपराध मानते थे। उनका मानना था कि मनुष्य सेवा ही सच्ची सेवा है। उन्होंने महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में गरीबों के लिए स्कूल, अस्पताल बनवाए। महाराष्ट्र के सोलापुर में रहने वाली वेश्याओं के बच्चों को उन्होंने पिता के रूप में अपना नाम दिया। आदिवासियों के बच्चों के लिए आवासीय स्कूल बनवाया। पर्यावरण के लिए चिंतित भय्यूजी महाराज लोगों ने गुरुदक्षिणा के नाम पर पेड़ लगवाते थे। उन्होंने 18 लाख पेड़ लगवाए।

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    English summary
    Bhayyuji Maharaj Commits Suicide, Know how a Model turned into a Spiritual Leader.

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