हरियाणा के सीएम रह चुके हैं भजनलाल! जब तख्तापटल कर खुद बन गए थे मुख्यमंत्री
बीजेपी नेता भजनलाल शर्मा ने जयपुर के अल्बर्ट हॉल के बाहर राजस्थान के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। उनके अलावा दीया कुमारी और प्रेम चंद बैरवा ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली। दीया कुमारी और प्रेम चंद बैरवा को राजस्थान का उप मुख्यमंत्री बनाया गया है।
सांगानेर से विधायक भजनलाल शर्मा पहली बार ही विधानसभा पहुंचे हैं और पहली ही बार में बीजेपी ने उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया है। 33 साल बाद राजस्थान में कई ब्राह्मण मुख्यमंत्री बना है। राजस्थान के नए सीएम भजन लाल शर्मा के नाम से एक और शख्स की याद आती है। वह हैं हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे भजन लाल बिश्नोई।

भजनलाल तीन बार हरियाणा के सीएम रहे। एक बार जनता पार्टी में रहते हुए सीएम बने और दो बार कांग्रेस नेता के तौर पर राज्य की कमान संभाली। भजनलाल के नाम हरियाणा में सबसे अधिक समय (12 साल) तक रहने वाले मुख्यमंत्री का रिकॉर्ड है। वह पहली बार 1979 में फिर से 1982 और 1991 में हरियाणा के मुख्यमंत्री बने थे। वह एक बार केंद्रीय कृषि मंत्री रह चुके थे।
भजनलाल की राजनैतिक यात्रा 1960 में पंचायत के पंच पद से शुरू हुई। 1961 में हिसार ब्लाक-2 के लिए जिला परिषद् सदस्य चुने गये। 1965 में हिसार ब्लाक-2 के चेयरमैन बने। वे ग्राम पंचायत आदमपुर के हिसार मंडल के प्रधान बने। 1968 को हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव में चौ. भजनलाल कांग्रेस की टिकट लेकर पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे।
चौ. भजनलाल विधायक बनने के बाद 1970 से 1975 तक हरियाणा मंत्रिमंडल में कृषि मंत्री रहे। 1977 में हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी की टिकट पर भजनलाल तीसरी बार विधायक बने।
राज्य में जनता पार्टी की सरकार बनी और वे इसमें सहकारिता, डेयरी विकास, पशुपालन, श्रम व रोजगार तथा वन मंत्री बने। 1979 में उन्होंने चौधरी देवीलाल की सरकार में डेयरी मंत्री रहते हुए तख्तापलट कर खुद की सरकार बना ली थी। इसके बाद जनता पार्टी से मुख्यमंत्री बने भजनलाल अपने करीब 40 विधायकों समेत कांग्रेस में शामिल हो गए।
हरियाणा की आधी फीसदी आबादी से आने वाले भजनलाल बिश्नोई अपने मृदुलभाषी व सरल स्वभाव व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने एक सफल राजनीतिज्ञ के रूप में अपनी छाप छोड़ी। अपने शुरूआती जीवन में भजनलाल गांव से पैदल आदमपुर की मंडी में घूमने जाते थे। घी बेचा करते थे। मंडी के एक दुकानदार ने भजनलाल की कुशलता को भांप लिया और उनको अपनी दुकानदारी में हिस्सेदारी पर रख लिया। जिसके बाद भजनलाल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।












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