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चिदंबरम को जमानत: जानिए वो शर्तें जिनका पालन ना करने पर फिर जाना पड़ सकता है जेल

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नई दिल्ली- वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम को आखिर 105 दिनों बाद ही सही, लेकिन दिल्ली के तिहाड़ जेल से छुटकारा मिल ही गया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग केस में उन्हें बेल देने के साथ ही कई शर्तें भी लगा दी हैं। अगर इन शर्तों का वे उल्लंघन करते हुए पकड़े जाएंगे तो उन्हें दोबारा से जेल जाना पड़ सकता है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें आईएनएक्स मीडिया से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में पिछले 22 अक्टूबर को ही उन्हें जमानत दे दी थी, लेकिन उससे पहले ही प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें इसी केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 16 अक्टूबर को गिरफ्तार कर लिया था। चिदंबरम को सबसे पहले सीबीआई ने पिछले 21 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद से वे ज्यादातर वक्त दिल्ली के तिहाड़ जेल में कैद रहे।

चिदंबरम को इन शर्तों पर मिली बेल

चिदंबरम को इन शर्तों पर मिली बेल

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के दौरान बाहर रहने पर पी चिदंबरम पर जो पाबंदियां लगाई हैं, उसमें से कुछ बेहद महत्वपूर्ण हैं। मसलन, वे अब अदालत की इजाजत के बिना विदेश नहीं जा सकेंगे और उनका पासपोर्ट भी जब्त रहेगा। यही नहीं इस केस के संबंध में जब भी आवश्यकता होगी, उन्हें संबंधित एजेंसियों के सामने पूछताछ के लिए उपस्थित होना पड़ेगा। अदालत ने उन्हें इस बात के लिए भी आगाह किया है कि वो उनपर चल रहे केस के संबंध में न तो मीडिया के सामने और न ही सार्वजनिक तौर पर कोई बयान देंगे और न ही कोई इंटरव्यू ही देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इस बात की भी हिदायत दी है कि जमानत पर छूटने के बाद वह इस केस से जुड़े किसी भी गवाह से संपर्क करने या उन्हें प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता से ये भी कहा है कि जमानत के दौरान वह सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश नहीं करेंगे। अगर पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अदालत की इन शर्तों का उल्लंघन किया तो उनकी बेल खारिज भी हो सकती है।

अदालत के आदेश का केस की ट्रायल पर असर नहीं

अदालत के आदेश का केस की ट्रायल पर असर नहीं

बता दें कि जस्टिस आर भानुमति की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट के तीन सदस्यीय बेंच ने 74 साल के कांग्रेस नेता को 2 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी रकम की दो गारंटी पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। इस बेंच में जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेश रॉय भी शामिल थे। अदालत ने ये माना कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ही दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी जमानत की याचिका ठुकराई थी। हालांकि, अदालत ने केस की मेरिट पर हाई कोर्ट की टिप्पणियों को नामंजूर कर दिया है। अदालत ने यह भी साफ किया कि बुधवार को दिया उसका आदेश केस की मेरिट पर प्रभाव नहीं डालेगा। कोर्ट ने साफ किया की इस केस में चिदंबरम की मिलीभगत है या नहीं इसकी पड़ताल सुनवाई की दौरान ही की जाएगी। चिदंबरम की ओर से 15 नवंबर को दिल्ली हाई कोर्ट से आए फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

क्या है मामला ?

क्या है मामला ?

आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई ने 15 मई, 2017 को केस दर्ज किया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री पर आरोप है कि 2007 में वित्तमंत्री रहते हुए उन्होंने आईएनएक्स मीडिया ग्रुप को 305 करोड़ रुपये का विदेशी धन हासिल कराने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड की मंजूरी में अनियमितता की। इस केस में उनके बेटे कार्ति चिदंबरम भी आरोपी हैं और वो भी इस केस में जेल में वक्त गुजारने के बाद जमानत पर बाह हैं। बाद में ईडी ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का भी केस दर्ज कर लिया था।

इसे भी पढ़ें- चिदंबरम के गृह मंत्री रहते मोदी-शाह पर झूठे मुकदमे दायर किए गए- नितिन गडकरी

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English summary
Supreme Court granted bail to P Chidambaram in INX Media case on the basis of several conditions
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