अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के दौरान श्रद्धालु को आया हार्ट अटैक, IAF की रैपिड रिस्पॉन्स टीम ने ऐसे बचाई जान

अयोध्या में सोमवार को रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के दौरान ही एक श्रद्धालु को दिल का दौरा पड़ा, लेकिन इंडियन एयरफोर्स (IAF) की रैपिड रिस्पॉन्स टीम ने समय पर प्राथमिक उपचार देकर उसकी जान बचा ली।

न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक 65 वर्षीय श्रद्धालु रामकृष्ण श्रीवास्तव मंदिर परिसर में ही बेहोश होकर गिर पड़े। घटना के चंद मिनटों में ही विंग कमांडर मनीष गुप्ता की अगुवाई वाली भिष्म क्यूब (BHISHM Cube) मोबाइल अस्पताल की एक टीम ने उन्हें वहां से निकाला और मौके पर ही उपचार दिया।

ayodhya ram mandir

रैपिड रिस्पॉन्स टीम ने गोल्डन आवर का लाभ उठाया
इसके बारे में जारी बयान में कहा गया है कि इंडियन एयरफोर्स के मोबाइल अस्पताल की रैपिड रिस्पॉन्स टीम ने ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण गोल्डन आवर (सुनहरे घंटे) का लाभ उठाया। किसी दुर्घटना में लगी चोट या इलाज का वह पहला घंटा जो आपातकालीन उपचार के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है।

रैपिड रिस्पॉन्स टीम की मुस्तैदी ने बचा ली जान
शुरुआती जांच में यह पता चला है कि उस दौरान मरीज का रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) खतरनाक स्तर तक बढ़कर 210/170 एमएम एचजी पहुंच गया था। लेकिन, संयोग था कि मोबाइल अस्पताल की टीम पूरी तरह से मुस्तैद थी और उसने जरा भी समय नहीं गंवाया

मरीज को विशेष देखभाल के लिए सिविल अस्पताल भेजा गया
बयान में आगे कहा गया है कि रैपिड रिस्पॉन्स टीम ने उन्हें मौके पर ही प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया। जब उनकी स्थिति स्थिर हो गई तो उन्हें आगे ऑब्जर्वेशन में रखने और विशेष देखभाल के लिए सिविल अस्पताल ले जाया गया है।

दो क्यूब-भिष्म मोबाइल अस्पताल तैनात
अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह को देखते हुए आरोग्य मैत्री डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के तहत दो क्यूब-भिष्म मोबाइल अस्पताल तैनात किए गए हैं, ताकि आपात स्थिति में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई जा सके। रविवार को सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में इसके बारे में जानकारी दी गई थी।

नवीन उपकरणों से लैस हैं ये मोबाइल अस्पताल
इस बयान के मुताबिक इन मोबाइल अस्पतालों में कई नवीन उपकरण लगाए गए हैं, जिसे आपदा राहत और आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए ही डिजाइन किया गया है।

अयोध्या में भगवान रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के लिए देश भर से लोग पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही इस धार्मिक अनुष्ठान को पूरा किया है। इसके लिए उन्होंने 11 दिन का कठिन व्रत भी रखा था। इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए दुनिया भर के श्रद्धालुओं की नजरें टिकी हुई थीं।

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