Atul Subhash Case: 'क्या मेरा पोता जिंदा है?' निकिता की गिरफ्तारी के बाद अतुल के पिता-भाई ने पूछा सवाल
Atul Subhash Case: अतुल सुभाष सुसाइड मामले में बेंगलुरु पुलिस ने पत्नी निकिता, सास और साले को गिरफ्तार कर लिया है। इन गिरफ्तारियों के बाद अतुल के पिता और भाई का बयान सामने आया है। पिता-भाई ने अतुल के बेटे को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। बहु की गिरफ्तार के बाद पूछ कि उनका चार साल का पोता कहा है।
न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक, निकिता सिंघानिया, निशा सिंघानिया और अनुराग सिंघानिया की गिरफ्तारी के बाद अतुल सुभाष के पिता पवन कुमार मोदी ने कहा कि हमें नहीं पता कि उसने हमारे पोते को कहां रखा है। क्या उसे मार दिया गया है या वह जीवित है? हम उसके बारे में कुछ नहीं जानते। मैं चाहता हूं कि मेरा पोता हमारे साथ रहे।

इस दौरान पवन मोदी ने कहा कि मैं आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को धन्यवाद देता हूं। (आरोपी का) जज भ्रष्ट था...मुझे अभी भी न्याय नहीं मिला है क्योंकि मेरे खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। मेरे पोते के नाम पर मेरे खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया गया है।
इस दौरान पवन मोदी ने पीएम मोदी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, बिहार के सीएम नीतीश कुमार, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और अन्य नेताओं से अपील करते हुए कहा कि वे सुनिश्चित करें कि मेरा पोता मेरे पास आए...एक दादा के लिए उसका पोता उसके बेटे से ज्यादा मायने रखता है...पूरा समाज, लोग मेरे समर्थन में खड़े हैं।
वहीं, अतुल सुभाष के भाई विकास कुमार ने कहा कि अभी हमारी सबसे बड़ी चिंता यह है कि हम नहीं जानते कि मेरा भतीजा (अतुल सुभाष का बेटा) कहां है। हम उसे पुलिस द्वारा प्रसारित की गई तस्वीर में नहीं ढूंढ़ पाए। हम जानना चाहते हैं कि वह कहां है। मैं इन तीनों को गिरफ़्तार करने के लिए कर्नाटक पुलिस को धन्यवाद देता हूं।
दो अन्य गिरफ़्तारियां लंबित हैं। मुझे उम्मीद है कि उन्हें भी जल्द ही गिरफ़्तार कर लिया जाएगा। आपको बता दें कि 34 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर सुभाष ने 09 दिसंबर को सुसाइड कर लिया था। उसने 26 पन्नों का नोट और एक वीडियो छोड़ा था, जिसमें उसने अपनी अलग रह रही पत्नी निकिता सिंघानिया और उसके परिवार पर उत्पीड़न का आरोप लगाया थे।
बता दें कि पुलिस ने निकिता को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया। जबकि उसकी मां और भाई को कथित तौर पर सुभाष को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में प्रयागराज में हिरासत में लिया गया। उन्हें शनिवार सुबह बेंगलुरु लाया गया और स्थानीय अदालत में पेश करने के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।












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