जिस दोस्त को इस्तीफा देने से रोका था, उसके तीन दिन बाद चल दिए अटल जी
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नई दिल्ली। बीते चार दिनों में दो भारतीय राजनीति के दो बड़े चेहरे इस दुनिया को छोड़ गए हैं। सोमवार को पूर्व लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी का निधन हो गया था। गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने आखिरी सांसे लीं। दोनों ही नेता कई दशकों तक भारतीय राजनीति के अहम नाम रहे हैं। चटर्जी जहां वामपंथी थे तो वहीं वाजपेयी घोर दक्षिणपंथी लेकिन एक ऐसा मौका भी आया जब चटर्जी ने लोकसभा स्पीकर की पोस्ट इस्तीफा दे दिया तो वाजपेयी ने उनका हाथ थामकर रुकने को कहा।

अलग विचारधाराओं के बावजूद दोस्ती
विचारधारा के लिहाज से सोमनाथ चटर्जी और अटल बिहारी वाजपेयी भले दो अलग कोनों पर खड़े रहे लेकिन दोनों में दोस्ती हमेशा रही। 2006 में यूपीए की सरकार थी और सोमनाथ चटर्जी लोकसभा के स्पीकर थे। अटल बिहारी वाजपेयी विपक्ष में थे। 2006 के शीतकालीन सत्र के दौरान अनाज के बदले तेल घोटाला मामले में हंगामे के दौरान चटर्जी ने कुछ सरकारी कामकाज निपटा लिए। इससे खफा राजग ने उन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए पत्र भी लिखा। पत्र में सबसे पहला हस्ताक्षर वाजपेयी का था। पत्र में वाजपेयी का हस्ताक्षर देखते ही सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि वो इस्तीफा दे देंगे।

वाजपेयी ने इस्तीफा ना देने के लिए मनाया
सोमनाथ चटर्जी ने इस्तीफे का फैसला किया तो वाजपेयी ने चटर्जी का हाथ थामकर उन्हें स्पीकर पद से इस्तीफा नहीं देने के लिए मनाया। वाजपेयी ने उसने कहा कि उन्होंने पार्टी लाइन के तहत पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। सोमनाथ ने कहा कि अगर वो उनकी ईमानदारी पर सवाल करेंगे तो पद पर रहने का कोई मतलब नहीं है। इस पर वाजपेयी ने खुद सोमनाथ चटर्जी से कहा कि उन्हें रत्तीभर भी उनकी इमानदारी पर शक नहीं वो पद ना छोड़ें।

13 अगस्त को हुआ था सोमनाथ चटर्जी का निधन
लोकसभा के पूर्व स्पीकर सोमनाथ चटर्जी का 13 अगस्त को निधन हो गया था। सोमनाथ चटर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष के रूप में काफी लोकप्रियता हासिल की थी। 1971 में वह पहली बार सांसद बनें और 10 बार लोकसभा सदस्य के रूप में चुने गए थे। उनका और अटल बिहारी वाजपेयी का काफी समय संसद में साथ में बीता था।












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