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फिलहाल घर नहीं जा पाएंगे विदेशी तब्लीगी जमाती, SC ने कहा, 'कोर्ट केंद्र के कार्रवाई में हस्तक्षेप नहीं करेगा'

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नई दिल्ली। निजामुद्दीन मरकज में शामिल होने आए विदेशी तब्के डिपोर्ट से जुड़े मामले में गुरूवार को सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट केंद्र की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए विदेशी नागरिकों को डिपोर्ट करने का आदेश देने से मना कर दिया है। मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह केंद्र पर है और कोर्ट केंद्र की कार्रवाई में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

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सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि केंद्र सरकार को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है, जिस पर कानून के मुताबिक सरकार कदम उठा सकती है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई 10 जुलाई को तय की है। इस बीच सरकार उन्हें उनके बारे में जारी आदेश की कॉपी देगी।

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गौरतलब है मार्च में राजधानी दिल्ली के निज़ामुद्दीन क्षेत्र में आयोजित तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में भाग लेने वाले भारत आए कुल 3,500 विदेशी सदस्य आए थे, जिनमें 34 विदेशी नागरिकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके अनुरोध किया है कि उन्हें उनके गृह देशों में भेज दिया जाए।

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भारत आए 34 देशों के 34 सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की है याचिका

भारत आए 34 देशों के 34 सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की है याचिका

दरअसल, निजामुद्दीन मरकज में शामिल होने भारत आए 34 देशों के 34 सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में केंद्र सरकार द्वारा अपने वीजा को रद्द करने और ब्लैकलिस्ट करने को चुनौती दी है। कोर्ट में उपस्थित लोगों ने कोर्ट से अपने वकील सीयू सिंह के माध्यम से कहा कि वीजा उल्लंघन के लिए कार्रवाई का सामान्य कार्यवाही निर्वासन है।

कृपया हमें हमारे गृह देशों में भेज दें, अगर हमने कुछ गंभीर नहीं किया

कृपया हमें हमारे गृह देशों में भेज दें, अगर हमने कुछ गंभीर नहीं किया

उन्होंने कोर्ट से कहा, कृपया हमें हमारे गृह देशों में भेज दें और अगर हमने कुछ गंभीर नहीं किया है, तो केंद्र हमें निर्वासित करने पर विचार कर सकता है। विदेशी नागरिकों ने तर्क दिया कि हम कोविद-19 के कारण लगाए गए प्रतिबंध से पहले भारत आए थे। याचिकाकर्ताओं ने आगे कहा ब्लैकलिस्टिंग का मतलब होगा कि हमें भारत लौटने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, लेकिन हमें निर्वासित किया जा सकता है।

केंद्र सरकार ने कहा कि इन लोगों की स्वदेश वापसी तब तक नहीं होगी

केंद्र सरकार ने कहा कि इन लोगों की स्वदेश वापसी तब तक नहीं होगी

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि इन लोगों की स्वदेश वापसी तब तक नहीं होगी जब तक उनके खिलाफ भारत में किसी भी राज्य में दर्ज आपराधिक मुकदमें की सुनवाई भारत की अदालतों में पूरी नहीं हो जाती है, क्योंकि कोरोना को लेकर भारत सरकार के दिशा-निर्देशों और राज्य सरकारों व पुलिस के आदेश का उल्लंघन करने पर हजारों जमातियों के खिलाफ विभिन्न राज्यों में क्रिमिनल केस रजिस्टर हैं, जिनकी सुनवाई अदालतों में होनी बाकी है।

कोरोना काल में कुल 2765 विदेशी जमातियों को ब्लैकलिस्ट किया गया

कोरोना काल में कुल 2765 विदेशी जमातियों को ब्लैकलिस्ट किया गया

गुरूवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया है कि कोरोना काल में कुल 2765 विदेशी तब्‍लीगी नागरिकों को निज़ामुद्दीन के जमात में भाग लेने के लिए ब्लैकलिस्ट किया है, जिसमे सभी लोगों को ट्रेस नही किया जा सका है। सरकार ने यह भी बताया कि कुल 1,906 लुकआउट सर्कुलर जारी किए गए हैं जबकि 11 राज्यों ने लॉकडाउन मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए उनके खिलाफ 205 एफआईआर दर्ज की हैं।

अब तक 2679 विदेशी तब्लीगियों के वीजा रद्द किए गए, 9 विदेशी नागरिक

अब तक 2679 विदेशी तब्लीगियों के वीजा रद्द किए गए, 9 विदेशी नागरिक

केंद्र सरकार का कहना है कि उसने अब तक 2679 विदेशी तब्लीगियों के वीजा रद्द कर दिए हैं जिनमें भारत के 9 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसने कहा कि 227 विदेशी तब्लीगी ने लुकआउट सर्कुलर या ब्लैकलिस्टिंग आदेश जारी करने से पहले भारत छोड़ दिया था। सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल ने विदेशी तब्लीगी जमातियों के वीजा रद्द करने और ब्लैकलिस्ट किए जाने के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि प्रत्येक मामले में अलग-अलग आदेश पारित किया गया है।

वीजा जारी करना या रद्द करना केंद्र सरकार का संप्रभु फैसला है

वीजा जारी करना या रद्द करना केंद्र सरकार का संप्रभु फैसला है

सुनवाई के दौरान याचिका का विरोध करते हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वीजा जारी करना या रद्द करना सरकार का संप्रभु फैसला है इसमें कोर्ट दखल नहीं दे सकता है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि प्रत्येक मामले में अलग-अलग आदेश जारी किया गया था और इसकी सूचना संबंधित व्यक्ति को ईमेल के जरिए दी गई थी। सॉलिसिटर जनरल की इस दलील के बाद कोर्ट ने कहा कि उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

मार्च मे दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमाती बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए

मार्च मे दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमाती बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए

मार्च में जब देश में कोरोना के मामले लगातार सामने आ रहे थे तब दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए थे। कहा गया कि उनकी वजह से अन्य लोगों में भी कोरोना वायरस बहुत ज्यादा संख्या में फैल गया था। उसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अप्रैल महीने में तब्लीगी जमात के 960 विदेशी नागरिकों को ब्लैक लिस्ट कर दिया, साथ ही इनके वीजा को रद्द कर दिया गया था। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों की पुलिस से कहा था कि वह अपने-अपने क्षेत्र में रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम व विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत कार्रवाई करें।

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English summary
On Thursday, the Supreme Court refused to interfere with the Centre's action in the case related to the foreign strata department, which had come to join Nizamuddin Markaz, and refused to order the foreign nationals to be deported. Stated that it is at the center and the court will not interfere in the center's action.
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