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'भारत जोड़ो यात्रा' का कांग्रेस का कितना फायदा? जानिए जिन क्षेत्रों से गुजरा काफिला वहां के रिजल्ट्स

राहुल गांधी की अगुवाई वाली भारत जोड़ो यात्रा ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और कार्यकर्ताओं में उत्साह भर दिया। लेकिन इन क्षेत्रों के चुनावी परिणाम चौंकाने वाले हैं। कांग्रेस अलाकमान खुद असमंजस में है। यात्रा के बाद कर्नाटक और तेलंगाना तो कांग्रेस को जीत मिली, लेकिन मध्य प्रदेश और राजस्थान में उसे बीजेपी के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा। जबकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की यात्रा नहीं गई थी। जबकि यहां भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।

Assembly Election Results congress

पहले कर्नाटक और बाद में तेलंगाना में कांग्रेस का श्रेय कांग्रेस भले की खुद भारत जोड़ो यात्रा को दे ले लेकिन जिन तीन राज्यों में सत्ता से दूर रहने वाली कांग्रेस महज एक ही चुनावी राज्य था, जहां भारत जोड़ो यात्रा लेकर नहीं गई थी। और वे छत्तीसगढ़ था, जहां राजस्थान की तरह कांग्रेस की खुद की सरकार थी। तेलंगाना में अगर सत्ता हाथ में आई तो कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में सीट गवां भी दी। हालांकि ये कोई बराबर होने वाली बात नहीं है, क्योंकि जहां कांग्रेस जीती वहां भाजपा लंबे से समय से अपना जनाधार बढ़ा रही है और इसमें उसे काफी हद तक सफलता भी मिल रही है। ऐसे में बात भारत जोड़ो यात्रा की करना जरूरी है। क्योंकि कांग्रेस के दिग्गज नेता इस यात्रा के जरिए पार्टी की विचारधारा से लोगों को जोड़ने ओर मोहब्बत की दुकान लगाने की बात कर रहे थे।

चार राज्यों का चुनाव परिणाम आने और तेलंगाना में कांग्रेस की वापसी पर तमाम चुनावी विश्लेषक और कांग्रेस के कद्दावर नेता राहुल गांधी के सिर बांधने की कोशिश में जुट गए हैं। सांसद राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का हवाला दिया जा रहा है। दरअसल ये बात इसलिए भी की जा रही है क्यों कि कर्नाटक में राहुल गांधी 20 सीटों से गुजरे थे, जिनमें 15 पर कांग्रेस जीत गई। वहीं तेलंगाना में भी सांसद राहुल गांधी की यात्रा 12 दिनों तक चली थी और यही पार्टी की जीत की वजह भी बनी।

एमपी-राजस्थान में असर नहीं
छत्तीसगढ़ में तो भारत जोड़ो यात्रा गई नहीं। लेकिन मध्य प्रदेश और राजस्थान पर क्या जवाब होगगा। वहां के चुनावी नतीजों पर विश्लेषण कैसे किया जाए। क्योंकि यहां से तो भारत जोड़ो यात्रा तो राजस्थान और मध्य प्रदेश से भी होकर गुजरी थी।

हार के लिए फिर कौन जिम्मेदार?
राहुल गांधी राजस्थान में बाकायदा 17 दिनों तक रहे थे. वहीं, मध्य प्रदेश में इस यात्रा ने 13 दिन गुजारे थे. राजस्थान में 525 किलोमीटर की यात्रा में करीब 33 सीटें कवर की गईं, जबकि मध्य प्रदेश में 380 किलोमीटर की यात्रा में करीब 21 सीटें कवर की गईं। लेकिन फिर भी राहुल गांधी की दुकान नहीं चली। जिसकी वजह अब भरोसे की कमी बताई जा रही है। दावा किया जा रहा है कि कमी ना तो अशोक गहलोत-सचिन पायलट की एकजुटता में दिखी और न ही कमलनाथ-दिग्विजय सिंह की दोस्ती में दिखी। लेकिन फिर भी जनता ने कांग्रेस को खारिज कर दिया।

मध्य प्रदेश में जीतू पटवारी हारे
मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ क्षेत्र के जिन छह जिलों बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, इंदौर, उज्जैन और आगर मालवा की 21 सीटों पर यात्रा की थी। इनमें से अधिकांश सीटों पर कांग्रेस हार गई है। यही नहीं राऊ जैसी सीट से कांग्रेस के कद्दावर नेता जीतू पटवारी तक चुनाव हार गए।

राजस्थान में 33 सीटों से गुजरी थी यात्रा
झालावाड़, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, दौसा और अलवर जिले की कुल 33 सीटों से होकर सांसद राहुल गांधी गुजरे थे। यहां पहले से ही 18 सीटों पर कांग्रेस जीती थी। लेकिन इस बार पार्टी सीटें बढ़ने के बजाय कम हो गईं।

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