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असम: चुनाव से पहले 'घुसपैठियों की मदद करने वालों' के लिए बने पुलिस पैनल पर सवाल

By दिलीप कुमार शर्मा

असम: चुनाव से पहले घुसपैठियों की मदद करने वालों के लिए बने पुलिस पैनल पर सवाल

असम सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से अवैध प्रवासियों की घुसपैठ में सहयोग करने वाले बिचौलियों और सहयोगियों की पहचान के लिए पाँच वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की एक नई कमेटी का गठन किया है.

राज्य के विशेष पुलिस महानिदेशक (बॉर्डर) कार्यालय से 12 जनवरी को जारी किए गए एक आदेश के अनुसार आईपीएस अधिकारी सुभ्रज्योति बोरा की अध्यक्षता में बनी इस कमेटी में पुलिस विशेष शाखा, सीआईडी और बॉर्डर पुलिस के एक-एक वरिष्ठ अधिकारी को शामिल किया गया है.

इस आदेश में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से अवैध प्रवासियों की घुसपैठ में मदद करने वाले बिचौलियों, उन्हें यहाँ सुविधाएँ देने वाले लोगों और सहयोगियों के ख़िलाफ़ तत्काल और सक्रिय कदम उठाने के लिए कमेटी का गठन किया गया है.

असम सरकार ने अवैध प्रवासियों की घुसपैठ से जुड़े मुद्दे को लेकर यह पुलिस कमेटी ऐसे समय में बनाई है, जब प्रदेश में अगले तीन महीने में विधानसभा चुनाव होने वाले है.

असम में अवैध प्रवासियों के घुसपैठ का मुद्दा सालों पुराना है और इसे रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में जो नेशनल सिटिजन्स रजिस्टर (एनआरसी) बनाया गया था, शासन में बैठी बीजेपी सरकार ने फ़िलहाल उस पर कोई कैबिनेट फैसला नहीं लिया है.

असम: चुनाव से पहले घुसपैठियों की मदद करने वालों के लिए बने पुलिस पैनल पर सवाल

सरकार का इरादा

गुवाहाटी हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील हाफ़िज़ रशीद अहमद चौधरी शीर्ष पुलिस अधिकारियों की इस नई समिति के गठन को सही नहीं मानते.

वो कहते हैं,"सरकार का इरादा बिल्कुल साफ़ समझ में आता है. अगर यहाँ कोई अवैध घुसपैठियों की मदद करता है या फिर उसे सुविधा देता है तो उसके लिए पहले से कई क़ानून हैं. उसके लिए पुलिस समिति की कोई ज़रूरत नहीं है. बॉर्डर पुलिस और बाकी एजेंसियों के होते हुए भी अगर हम घुसपैठ रोक नहीं पा रहे हैं तो यह काम केवल निर्दोष लोगों को परेशान करने के लिए किया गया है."

उन्होंने कहा, "घुसपैठियों की मदद करने वाले बिचौलियों और सहयोगियों के नाम पर निर्दोष लोगों को परेशान किया जाएगा. अगर बड़े स्तर पर कोई इस तरह के काम कर रहा है तो उसे बॉर्डर पुलिस पकड़ सकती है और मौजूदा क़ानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है. इसके लिए हमारे यहाँ बॉर्डर पुलिस की एक अलग से ब्रांच है और यह देखना उनका काम है. लेकिन सरकार इस समति के गठन के ज़रिए बताना चाहती है कि वह घुसपैठ को रोकने को लेकर बहुत गंभीर है."

हालाँकि असम पुलिस के शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि बॉर्डर इलाकों पर विशेष ध्यान देने के लिए इस समिति का गठन किया गया है और यह काम करने की एक सामान्य प्रक्रिया है.

असम: चुनाव से पहले घुसपैठियों की मदद करने वालों के लिए बने पुलिस पैनल पर सवाल

असम पुलिस महानिदेशक भास्करज्योति महंत ने पुलिस अधिकारियों की नई कमेटी के गठन को लेकर बीबीसी से कहा," यह एक सामान्य काम है. बॉर्डर इलाकों में अपराध बढ़ा नहीं बल्कि घटा है. हम इस पर ख़ास ध्यान दे रहे हैं क्योंकि चुनाव आने वाले हैं. इसके अलावा हम पड़ोसी देशों के डेवलपमेंट पर भी नजर रखते है. इसलिए समीक्षा के बाद यह कमेटी बनाई गई है."

उन्होंने कहा, "बीते 10 बरस में ऐसी कई समितियाँ बनी हैं. हम कई पहलुओं पर समय-समय में समीक्षा करते रहते है और उस दौरान जब कुछ हमारी नज़र में आता है तो कभी समिति बना देते हैं तो कभी एसओपी जारी कर देते और कभी स्टैंडिंग ऑर्डर निकाल देते है."

बॉर्डर पुलिस के काम करने के तरीकों पर पहले भी कई बार नाराज़गी जताई जा चुकी है.

कछार जिले के आमराघाट के रहने वाले अमृत 31 अगस्त 2019 में एनआरसी की फ़ाइनल लिस्ट जारी होने से पहले काफी दिनों तक फरार थे.

वो उन दिनों को याद करते हुए कहते है,"हमें बहुत परेशान किया गया. बॉर्डर पुलिस के लोग लगातार आते थे, जबकि मेरे माता-पिता का नाम एनआरसी की फ़ाइनल लिस्ट में आया है. हम तीन भाइयों में से केवल दो भाइयों का नाम ही एनआरसी में नहीं आया है. फ़िलहाल हम लोगों के मामले फ़ॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में हैं."

असम पुलिस के अंतर्गत आने वाले असम पुलिस बॉर्डर ऑर्गेनाइज़ेशन अवैध प्रवासियों का पता लगाती है और उनके मामलों को विदेशी ट्रिब्यूनलों में भेजती है.

इसके अलावा सीमा पार से घुसपैठ की जाँच करने की ज़िम्मेदारी भी बॉर्डर ऑर्गेनाइजेशन की होती है.

असम: चुनाव से पहले घुसपैठियों की मदद करने वालों के लिए बने पुलिस पैनल पर सवाल

सवाल मंशा का

असम के विशेष पुलिस महानिदेशक (बॉर्डर) मुकेश अग्रवाल कहते हैं कि जो व्यक्ति किसी अवैध विदेशी नागरिक की मदद करेगा उसके ख़िलाफ ही कार्रवाई की जाएगी.

वो कहते हैं,"लोकल नेटवर्क की मदद से ही अवैध विदेशी नागरिक को यहाँ कई तरीके की मदद मिल जाती है. इसलिए हमारा काम केवल अवैध विदेशी नागरिक को ही पकड़ना नहीं होगा, बल्कि हम उसकी मदद करने वाले उस पूरे नेटवर्क का पता लगाएंगे ताकि उन लोगों पर कार्रवाई की जा सके.''

वो कहते हैं, "यह टीम मुख्य रूप से खुफ़िया जानकारी एकत्रित करेगी और पुलिस उपायुक्त (बॉर्डर) गुवाहाटी के साथ ही सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक (बॉर्डर), रेलवे पुलिस अधीक्षक (बॉर्डर) और पुलिस अधीक्षक (आरपी) जहाँ भी आवश्यकता होगी, कमेटी की सिफ़ारिश पर अपने सम्बन्धित क्षेत्राधिकारियों में कानूनी कार्रवाई करेंगे."

सरकार की गंभीरता

असम विधानसभा चुनाव के महज कुछ महीने पहले पुलिस अधिकारियों की बनाई गई इस कमेटी को लेकर प्रदेश बीजेपी उपाध्यक्ष विजय कुमार गुप्ता कहते हैं,"हमारी सरकार घुसपैठ के मुद्दे को शुरू से गंभीरता से ले रही है. हमने अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए बॉर्डर को सील करने का काम अपने हाथ में लिया.''

उन्होंने कहा, "रिवराइन बॉर्डर का कुछ हिस्सा खुला हुआ है पर वहां नए नए उपकरणों के जरिए पूरी निगरानी रखी जा रही है. लेकिन फिर भी कुछ आपराधिक पृष्ठभूमि के लोग सीमा पार से यहां के लोकल नेटवर्क की सहायता से आ रहें है. इसलिए इन पुलिस अधिकारियों को शामिल करते हुए यह कमेटी बनाई गई है और एक सूक्ष्म प्रबंधन स्तर तैयार किया जा रहा है."

वो कहते हैं, "साथ ही एक मनोविज्ञान अध्ययन किया जाएगा ताकि यह पता चल सके कि उनकों यहां भेजने के पीछे कौन सी ताकत काम कर रही है. यह पता लगाना बहुत जरूरी हो गया है कि सीमा के उस पार से आने वाले व्यक्ति को यहां कौन सारी सुविधाएँ उपलब्ध करा रहा है."

बीजेपी नेता मानते हैं कि बीते कुछ समय में, ख़ासकर राज्य के सीमावर्ती इलाकों में कई तरह के अपराधों में बढ़ोतरी हुई है.

वो कहते हैं, "पहले सीमा पार से लोग आर्थिक कारणों के चलते यहां आ जाते थे लेकिन उस पर लगाम कसने के बाद अब आपराधिक तत्व आने लगे है. लिहाजा पुलिस अधिकारियों की कमेटी हमारे किसी भी नागरिक को बेवजाह परेशान नहीं करेगी बल्कि इस बात का पता लगाएगी किस मकसद से ये लोग यहां आ रहें है."

भारत-बांग्लादेश सीमा पर पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद बीते कुछ समय से ब्रह्मपुत्र नदी का उपयोग कर अवैध तरीकों से मवेशियों की लगातार तस्करी की जा रही है.

बीजेपी एक अन्य नेता ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि गाय की तस्करी की आड़ में बॉर्डर से सटे इलाकों में कई बड़े अपराध हो रहे है और इन सबके ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए पुलिस अधिकारियों की इस समिति को ज़िम्मेदारी दी गई है.

असम में 31 अगस्त 2019 को एनआरसी की जारी हुई आख़िरी लिस्ट में 19,06,657 लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए.

इन लोगों को अपील दायर करने के लिए 120 दिन का समय दिया गया था लेकिन एनआरसी कार्यालय से अभी तक किसी को भी नोटिस नहीं भेजा गया है.

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में असम के लिए एनआरसी तो बन गई है लेकिन प्रदेश में सीमा पार से घुसपैठ का मुद्दा आज भी वैसा ही है.

BBC Hindi
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English summary
Assam: Questions on the police panel formed for 'helping the infiltrators' before the elections
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