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Cow Bill: असम का नया मवेशी विधेयक क्या है ? इसके बारे में पूरी बात जानिए

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गुवाहाटी, 13 जुलाई: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बजट सत्र के पहले दिन ही सोमवार को प्रदेश विधानसभा में नया असम मवेशी संरक्षण विधेयक, 2021 पेश किया है। इस विधेयक के कानून बनने के बाद राज्य में मवेशियों के वध पर सरकारी शिकंजा कस जाएगा। यही नहीं धार्मिक स्थानों के आसपास बीफ की खरीद-बिक्री पर भी रोक लग जाएगी। कांग्रेस और एआईयूडीएफ नए विधेयक का विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि यह सब ध्रुवीकरण के लिए भाजपा का नया तिकड़म है। आइए जानते हैं कि इस विधेयक में है क्या ?

असम का नया मवेशी विधेयक क्या है ?

असम का नया मवेशी विधेयक क्या है ?

असम मवेशी संरक्षण विधेयक, 2021 लागू होते ही असम भाजपा शासित अन्य राज्यों जैसे कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और कर्नाटक की फेहरिस्त में शामिल हो जाएगा, जहां गायों की रक्षा के लिए ऐसे ही कानून पहले से मौजूद हैं। इस बिल के जरिए असम सरकार मवेशियों की हत्या, उनका उपभोग और उनके गैर-कानूनी परिवहन पर नियंत्रित करना चाहती है। विधेयक के अनुसार मवेशियों की हत्या पर तब तक रोक का प्रावधान है, जबतक कि पशु चिकित्सा अधिकारी ये प्रमाण पत्र जारी नहीं कर दे कि उसकी राय में मवेशी, जो कि गाय नहीं है और उसकी उम्र 14 वर्ष से ज्यादा है। बछिया या बछड़े को तभी मारने की इजाजत दी जा सकती है, जब वह स्थायी रूप से अपाहिज हो या प्रजनन करने लायक ना हो। यह कानून पूरे असम में लागू होगा और 'मवेशी' शब्द बैल, बछिया, बछड़े, नर और मादा भैंसों पर लागू होगा।

विधेयक के किन प्रावधानों पर हो रहा है विवाद ?

विधेयक के किन प्रावधानों पर हो रहा है विवाद ?

सर्टिफिकेट मिलने के बाद मवेशियों को सिर्फ लाइसेंस प्राप्त और मान्यता प्राप्त बूचड़खानों में ही मारा जा सकेगा। अलबत्ता, राज्य सरकार कुछ धार्मिक स्थलों या खास धार्मिक आयोजनों के लिए गाय, बछिया या बछड़े के अलावा दूसरे मवेशियों के वध की छूट दे सकती है। विधेयक में साफ किया गया है कि सरकार की ओर से निर्धारित स्थानों के अलावा किसी को भी बीफ या बीफ प्रोडक्ट को बेचने की अनुमति नहीं दी जाएगा। यही नहीं जिन इलाकों में हिंदू, सिख, जैन और बीफ न खाने वाले समुदायों की तादाद ज्यादा है, वहां भी बीफ बेचने की इजाजत नहीं मिलेगी। असम सरकार ने विधेयक के जरिए यह भी इरादा स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी मंदिर, सत्र (वैष्णव मठ) या हिंदुओं से जुड़े किसी भी धार्मिक संस्थानों या सक्षम अधिकारियों की ओर से तय किए गए दूसरे संस्थानों के 5 किलोमीटर के दायरे में भी बीफ की बिक्री पर पाबंदी रहेगी।

मवेशियों के परिवहन पर विधेयक में क्या है ?

मवेशियों के परिवहन पर विधेयक में क्या है ?

असम में अभी बीफ गैरकानूनी नहीं है। असम मवेशी संरक्षण अधिनियम, 1950 जरूरी मंजूरी के साथ 14 वर्ष से अधिक उम्र के मवेशियों की हत्या की अनुमति देता है। नया कानून उसी में बदलाव की बात करता है। नए विधेयक में राज्य के बाहर से मवेशियों के परिवहन पर प्रतिबंध लगाने और असम के भीतर उनके परिवहन को नियंत्रित करने का प्रस्ताव है। हालांकि, किसी जिले के भीतर पशुओं को चराने या कृषि या पशुपालन के लिए लाने-ले जाने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। एक जिले के भीतर खरीद-बिक्री के लिए पंजीकृत पशु बाजारों में मवेशियों के परिवहन के लिए भी किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। इसके लिए संबंधित मान्यता प्राप्त मवेशी बाजारों की ओर से खरीद-बिक्री के उचित फॉर्मेट में प्रूफ जारी करना होगा। विधेयक में पुलिस और पशु चिकित्सा अधिकारियों को नियम तोड़कर लाए-ले जाए जा रहे या खरीदे-बेचे जा रहे मवेशियों, उनके शवों या परिवहन में इस्तेमाल वाहनों को जब्त करने का अधिकार होगा। जब्त किए गए मवेशियों को गोशालाओं या उसी तरह के दूसरी जगहों के हवाले किया जाएगा।

असम मवेशी बिल के विरोध में क्या कह रहा है विपक्ष ?

असम मवेशी बिल के विरोध में क्या कह रहा है विपक्ष ?

असम के कांग्रेस अध्यक्ष रिपुन बोरा ने कहा है, 'जहां तक कांग्रेस का सवाल है, हम बिल का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन हमारी मांग है कि भेदभाव नहीं होनी चाहिए। मंदिरों के 5 किलोमीटर के दायरे में बीफ बेचने पर प्रतिबंध है। यह सभी धर्मों पर लागू होना चाहिए।' जबकि, इत्र के कारोबारी बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ का कहना है कि इस विधेयक से सांप्रदायिक तनाव फैल सकता है और मवेशी के कारोबार से जुड़े लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है। उसका तो यहां तक आरोप है कि यह एक खास समुदाय को टारगेट करने का प्रयास है और बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार इसके जरिए लोगों का ध्रुवीकरण करना चाहती है। वहीं ऑल असम माइनोरिटी स्टूडेंट यूनियन का आरोप है कि मंदिर के 5 किलोमीटर दायरे में बीफ बेचने पर पाबंदी तर्कहीन है और उसने सरकार से कहा है कि वह लोगों के खाने की आदतों में दखलअंदाजी ना करे।

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कानून के उल्लंधन करने वालों पर क्या कार्रवाई होगी ?

कानून के उल्लंधन करने वालों पर क्या कार्रवाई होगी ?

नए कानून के उल्लंघन करने वालों को 3 साल से लेकर 8 साल तक की सजा दी जा सकती है। इसके अलावा उनपर 3 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अगर कानून तोड़ने वाले दोबारा दोषी पाए गए तो उनकी सजा और जुर्माना दोगुना हो सकता है। (मवेशियों की तस्वीरें- प्रतीकात्मक)

English summary
Assam will join other BJP-ruled states when the Assam cattle preservation bill 2021 is implemented, opposition says it is an attempt to polarize
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