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Ashadhi Ekadashi 2020: पत्नी के साथ सीएम ठाकरे ने की भगवान विठ्ठल की पूजा, मांगी देश को कोरोना मुक्त करने की दुआ

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मुंबई। आज देवशयनी एकादशी है जिसे कि लोग अषाढ़ी एकादशी भी कहते हैं , आज के पावन पर्व पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने परिवार समेत पंढरपुर में स्थित विठ्ठल मंदिर में पूजा अर्चना की और देश को कोरोना मुक्त करने के लिए ऊपर वाले से प्रार्थना की, सीएम की पूजा अर्चना की तस्वीरें इस वक्त सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

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भगवान विठ्ठल के द्वारे पहुंचे सीएम उद्धव ठाकरे

भगवान विठ्ठल के द्वारे पहुंचे सीएम उद्धव ठाकरे

इस बारे में शिवसेना के मुखपत्र सामना ने भी लिखा है कि -हे विट्ठल, इस बार संभाल लो, इस साल हमारे सारे उत्सव व पर्वों पर कोरोना संकट का काला साय पड़ गया है, आज की आषाढ़ी एकादशी के दौरान पंढरपुर की तस्वीर भी इससे कुछ अलग वैसे होगी?।

कोरोना के कारण पंढरपुर में फीका पड़ा उत्सव

मालूम हो कि आज के दिन पंढरपुर में एक उत्सव जैसा माहौल होता था, चारों ओर भक्तों का मेला लगता था लेकिन इस बार कोरोना वायरस के कारण एकादशी पर कोई उत्सव नहीं हो रहा है, हालांकि पंढरपुर को फूलों और एलईडी बल्बों से सजाया गया है लेकिन इसके बावजूद भक्तों की भीड़ के बिना ये पर्व फीका-फीका सा है।

यह पढ़ें: Dev Shayani Ekadashi 2020: देवशयनी एकादशी आज, भगवान विष्णु को खुश करने के लिए क्या करें और क्या ना करें?

कौन हैं भगवान विठ्ठल?

कौन हैं भगवान विठ्ठल?

भगवान विठ्ठल को भगवान विष्णु और कृष्ण का अवतार माना जाता है, जिनकी प्रमुख रूप से पूजा महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा, तेलंगाना और आन्ध्रा में होती हैं, महाराष्ट्र के पंढरपुर में विट्ठलका मुख्य मंदिर हैं, जहां पर भक्तों का बड़ा जमावड़ा लगता है, इनकी पत्नी का नाम रखुमाई है। पंढरपुर को भक्त 'भु-वैकुंठ' (पृथ्वी पर विष्णु के निवास की जगह) मानते हैं, आस्था के मानक इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि भगवान विठ्ठल के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता है।

देवशयनी एकादशी का महत्व

देवशयनी एकादशी का महत्व

हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का बड़ा महत्व है, कहीं-कहीं इस दिन को 'पद्मनाभा' भी कहते हैं। सूर्य के मिथुन राशि में आने पर ये एकादशी आती है। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ माना जाता है यानी कि इस दिन से भगवान विष्णु आराम करने के लिए क्षीर सागर में चले जाएगें, यह अवधि चार महीने की होती है , जिसके साथ ही हर तरह से शुभ या मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है।

चार महीने नहीं होगा कोई शुभ काम

चार महीने नहीं होगा कोई शुभ काम

पूरे चार महीने बाद तुला राशि में सूर्य के जाने पर उन्हें उठाया जाता है, उस दिन को 'देवोत्थानी एकादशी' कहा जाता है, दोनों के बीच के अंतर वाले माह को 'चातुर्मास' कहते हैं, ये मास पूर्ण रूप से भक्ति का महीना होता है, प्रकृति भी इसमें भरपूर साथ देती हैं, चारों ओर भक्ति, बारिश और हरियाली का वातावरण होता है।

यह पढ़ें: देवशयनी एकादशी पर अपनी राशि अनुसार करें दान, भरेंगे धन के भंडार

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English summary
Maharashtra Chief Minister Uddhav Thackeray on Wednesday performed the 'mahapooja' of Lord Vitthal and Goddess Rukmini at the temple town of Pandharpur in Solapur district on the occasion of 'Ashadhi Ekadashi'.
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