आसाराम को सजा दिलाने में पीड़िता के वकील ने दिये क्या-क्या तर्क?
नई दिल्ली। नाबालिग से रेप का दोषी पाए जाने पर आसाराम को जोधपुर की विशेष अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई है। शिल्पी और शरतचंद्र को 20-20 साल की सजा सुनाई है।वहीं तीनों पर एक-एक लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। इस मामले में दो आरोपियों को बरी कर दिया गया। इस फैसले पर बुधवार सुबह से ही देश और मीडिया की निगाहें थी। कोर्ट में आसाराम की तरफ से 14 वकीलों की टीम ने उसका बचाव किया जबकि पीड़ित पक्ष की ओर से दो वकीलों ने पक्ष रखा।

पीड़ित के वकील ने दिए ये तर्क
कोर्ट में जज के सामने जहां आसाराम के वकीलों ने उसकी उम्र, स्वास्थ्य और समाज सेवा के लिए खोले गए आश्रमों का जिक्र किया और कम सजा देने की अपील की। वहीं पीड़ित पक्ष क वकील ने तर्क दिया कि आसाराम ने जो किया वो इसलिए भी ज्यादा संगीन है क्योंकि उसने पीड़िता के परिवार को विश्वास में लिया और ये सब किया। लाखों लोगों की आस्था जुड़ी होने के चलते अपराध ज्यादा संगीन हो जाता है। नाबालिग को संरक्षण में लेकर शोषण किया, इसलिए ये और ज्यादा गंभीर है। पीड़ित के वकील ने तर्क दिया कि आसाराम ने बापू होने का गलत फायदा उठाया, उसने खुद पर विश्वास करने पर छला, नाबालिग के साथ दुराचार किया ऐसे में उसे अधिकतम सजा मिले यानि उम्रकैद मिले। इसके अलावा पुलिस जांच, गवाह और पीड़िता के बयानों के आधार पर न्यायधीश ने आसाराम के अपराध को घिनौना माना और उम्रकैद की सजा सुनाई।

बच्चियों का शोषण करने वालों को मिलेगा सबक
फैसले के बाद पीड़ित के वकील राजेंद्र सिंह चारण ने कहा कि ये सजा उन गलत लोगों के लिए सबक है, जो बच्चियों के साथ दुराचार करते हैं। उन्होंने कहा कि सुबूतों के आधार पर कोर्ट ने ये पाया कि आसाराम दोषी है और उसे उम्रकैद और उसके दो साथियों को 20-20 साल की सजा दी है। उन्होंने बरी किए गए दो आरोपियों के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने की भी बात कही।

पीड़िता के पिता ने कहा, न्याय हुआ
आसाराम को दोषी करार दिये जाने के बाद पीड़िता के पिता ने कहा कि आसाराम को सजा हुई, इसका उन्हें संतोष है, हमें इंसाफ मिला है। इस लड़ाई में हमारा साथ देने वाले सभी लोगों को हम धन्यवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि अब वो मर भी जाएं तो उन्हें दुख नहीं होगा।












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