Asansol Violence: जब बूढ़े दादा ने दंगाइयों से बचाने के लिए रोते हुए पोते का मुंह दबा दिया

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के आसनसोल में सांप्रदायिक हिंसा ने कई घर उजाड़कर रख दिए। हिंसा में कई लोगों की जान चली गई और अभी भी यहां के हालात कुछ इस तरह के हैं कि लोग वापस अपने घर लौटने से भी डर रहे हैं। स्थानीय लोग यहां हुई हिंसा के खौफ से अभी नहीं निकल पाएं हैं, उनके साथ जो बर्बर घटना हुई है वह उसे भुला नहीं पा रहे हैं। यहां हुई हिंसा में दोनों समुदाय के लोगों की जान गई है, लोग अपने साथ हुई हिंसा की कहानी बताते हुए बिलखने लगते हैं।

जमकर मचाया उत्पात

जमकर मचाया उत्पात

आसनसोल के चांदमारी रेलवे कॉलोनी में रहने वाले अखिलानंद सिंह ने यहां हुई हिंसा के बारे में बताते हुए कहा कि उनके पड़ोस में रहने वाले घर को दंगाइयो ने तोड़ दिया और यहां जमकर लूटपाट की। अखिलानंद ने बताया कि उनका खुद का बेटा पुलिस की हिरासत में है, हमे अभी तक यह नहीं पता है कि मेरे बेटे का क्या गुनाह है और क्यों पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है। अखिलानंद रेलवे में सुरक्षा गार्ड के पद से दो साल पहले रिटायर हुए थे।

लाठी-डंडा लेकर आए थे दंगाई

लाठी-डंडा लेकर आए थे दंगाई

आपको बता दें कि रामनवमी के मौके पर आसनसोल में भड़की हिंसा में दर्जनों लोग घायल हो गए और कई लोगों के घर तबाह हो गए, जबकि दो लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद सैकड़ों लोग अपना घर छोड़कर चले गए हैं। अधिकतर लोग जिन्हे पलायन करना पड़ा है वह हिंदू समुदाय के लोग हैं और यह वापस अपने घर आने में डर रहे हैं, यहां हुई हिंसा से ये लोग काफी सहमे हुए हैं। सिंह ने बताया कि राम नवमी के मौके पर कुछ युवक अपना मुंह ढककर लाठी-रॉड हाथ में लेकर घूम रहे थे। उस वक्त मैं अपने घर में था, लेकिन मुझे दंगाइयों द्वारा चलाई जा रही गोली की आवाज सुनाई दे रही थी।

पोते का मुंह दबाकर बचाई जान

पोते का मुंह दबाकर बचाई जान

अखिलानंद बताते हैं कि जब यहां दंगाई उत्पात मचा रहे थे तो मेरे पास मेरा पोता जोकि महज एक साल का है वह रो रहा था, लेकिन मैंने उसका मुंह दबाकर उसे चुप करा दिया ताकि उसकी जान को बचा पाउं। दंगाइयों ने पड़ोसियों का घर तोड़ दिया और उनका सबकुछ लूट लिया। यही नहीं इन लोगों ने कई घरों को आग के हवाले कर दिया। उस वक्त मैंने मदद के लिए 100 नंबर भी डायल किया था, लेकिन मुझे कोई जवाब नहीं मिला, इसके बाद मैंने अपने दोस्त को फोन किया, जिसके बाद कुछ हिंदू लड़के हमारी मदद के लिए आए।

सबकुछ तबाह

सबकुछ तबाह

25 मार्च को मैं अपनी पत्नी, बेटा, बहू और पोते को लेकर छह किलोमीटर दूर बर्नपुर चला गया, जहां मेरा दोस्त रहा था। बाद में मैं जब अपना घर देखने के लिए अपने बेटे के साथ वहां गया तो पुलिस ने मेरे बेटे को गिरफ्तार कर लिया। अखिलानंद के घर को दंगाइयों ने तोड़ दिया है। आपको बता दें कि शुक्रवार के बाद आसनसोल में हिंसा की कोई नई वारदात सामने नहीं आई है। जहां हिंसा हुई है वहां अधिकतर लोग हिंदी भाषी हैं और वह यूपी बिहार के रहने वाले हैं।

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