लोकसभा चुनाव में अब भाजपा को चुनौती देगी 'आप'

इसके लिए 'आप' ने अपने 1500 कार्यकर्ताओं को महानगरों को महत्वपूर्ण सीटों पर तैनात करने की योजना बनाई है जिनका उद्देश्य कम से कम 4000 वोटरों को पोलिंग बूथ तक ले जाना है, यह उत्तर भारत के वह क्षेत्र हैं जहां की जनता भ्रष्टाचार और कुशासन से त्रस्त हैं। 'आप' का उद्देश्य है कि कम से कम 40-50 सीटों पर नरेंद्र मोदी जैसे बड़े कद वाले नेताओं को चुनौती देने वाले उम्मीदवार उतारे जाएं। इसके लिए कोर ग्रुप इंटरनेट पर 'आप' की सदस्यता के लिए आये आवेदनों को छांट रहा है।
बताया जा रहा है कि दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हराने वाले केजरीवाल भ्रष्टाचार और कुशासन ने बौखलाई आम जनता के गुस्से का लाभ लेकर संसद में जाने के सपने देख रहे हैं, जिसके लिए पार्टी ने कोशिशें शुरू कर दी हैं। इसके लिए मुंबई, बैंलगौर, पुणे, अहमदाबाद, गांधीनगर, लखनऊ, कोलकाता, पटना, हैदराबाद जैसे शहरों से संभावित उम्मीदवारों की लिस्ट में 150 लोगों के नाम दर्ज किये जा चुके हैं।
भले ही 'आप' लोकसभा की कितनी भी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे लेकिन इसने बड़े दलों को सोंचने पर मजबूर कर दिया है। अब भाजपा अपनी जीत की संभावनाओं को देखते हुए 'आप' को हलके में नहीं लेना चाहेगी क्योंकि यह भी सच है कि दिल्ली में भाजपा को 'आप' के कारण ही बहुमत नहीं मिला। 'आप' ने कांग्रेस के साथ ही भाजपा का भी गणित बिगाड़ दिया है। यह ध्यान देने योग्य है कि बतौर पार्टी 'आप' का पंजीकरण मार्च 2013 में हुआ है लेकिन उन्होने दिल्ली में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर लोगों को हैरान कर दिया है, अभी लोकसभा चुनाव में करीब पांच महीने का वक्त है ऐसे में केजरीवाल की टीम और उनके मैनेजमेंट को देखकर कहा जा सकता है कि वह बड़ा उलटफेर कर सकते हैं।












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