जनलोकपाल बिल पास नहीं हुआ तो भी इस्तीफा नहीं देंगे केजरीवाल

Arvind Kejriwal
नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है, "जन लोकपाल बिल के लिये अगर मुख्यमंत्री की 100 कुर्सियां भी कुरबान करनी पड़े तो मैं तैयार हूं"। सीएम साहब के इन शब्दों के बाद अगर आप यह सोच रहे हैं कि अगर आज दिल्ली विधानसभा में जनलोकपाल बिल पास नहीं हुआ तो केजरीवाल कुर्सी छोड़ देंगे और दिल्ली को फिर से चुनाव का मुंह देखना पड़ेगा तो हम आपकी गलतफहमी दूर कर देते हैं। असल में बिल पास नहीं हुआ तो केजरीवाल आज इस्तीफा नहीं देंगे।

आम आदमी पार्टी के सूत्र की मानें तो केजरीवाल पहले तो सदन में पूरी कोशिश करेंगे कि बिल पास हो जाये। बिल सिर्फ उसी सूरत में नहीं पास होगा, अगर कांग्रेस पार्टी के विधायकों ने वॉकआउट किया, क्योंकि केजरीवाल को भरोसा है कि उनके बिल को पर्याप्त वोट मिल जायेंगे। अगर पर‍िस्थितियां उलट गईं, तो केजरीवाल इस्तीफा देने के बजाये, कल यानी शुक्रवार को ही दिल्ली की जनता से एक बार फिर सवाल करेंगे, "क्या मैं दिल्ली के सीएम पद से इस्तीफा दे दूं?" यह सवाल ठीक उसी तरह जनता तक पहुंचाया जायेगा, जिस तरक सरकार बनाने के लिये पूछा गया था। इंटरनेट, मोबाइल एसएमएस और जनता के बीच जाकर वोट कराये जायेंगे। इस जनमत संग्रह के लिये आप के वॉलेंटियर्स तैयार बैठे हैं, उनका फॉरमैट पूरी तरह तैयार है, जरूरत है तो बस केजरीवाल के इशारे की। हां इन सबके बाद अगर जनता का जवाब हां में होता है, तभी केजरीवाल इस्तीफा देंगे, अन्यथा नहीं।

क्यों फंस गया है जनलोकपाल बिल

जनलोकपाल बिल, स्वराज बिल, बिजली की सबसिडी संबंध‍ित बिल, आदि के लिए विधानसभा का विशेष चल रहा है, जो 16 फरवरी तक जारी रहेगा। मुख्यमंत्री ने पहले घोषणा की थी कि जनलोकपाल बिल 16 तारीख को विधानसभा के बजाय इंदिरा गांधी स्टेडियम में पेश किया जाएगा। लेकिन अब ऐसा होता नहीं दिखाई दे रहा है। क्योंकि सदन की कार्यवाही ही सुचारु रूप से नहीं चल पा रही है।

सदन की कार्यवाही में सबसे बड़ा रोढ़ा केजरीवाल के मंत्री सोमनाथ भारती हैं, जिनके ख‍िलाफ विरोध लगातार जारी है। यह विरोध आप की सहयोगी पार्टी कांग्रेस भी कर रही है। उधर भारतीय जनता पार्टी के विधायकों का कहना है कि अभी तक उन्हें बिल की कॉपी भी नहीं दी गई है। दूसरी ओर केंद्रीय कानून मंत्रालय केंद्रीय कानून मंत्रालय से इस बिल के बारे में राय आने के बाद इसे पेश होने से रोकने के लिए उपराज्यपाल नजीब जंग विधानसभा अध्यक्ष को संदेश भेज चुके हैं। बताया जा रहा है कि बिल के हिंदी अनुवाद की प्रति तैयार नहीं है, लिहाजा उसे एजंडे पर नहीं रखा जा सकता है।

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