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जानिए कैसे पाकिस्‍तान से एलओसी तक और फिर कश्‍मीर में दाखिल होते हैं आतंकी, जेहादी ने बताया सारा सच

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नई दिल्‍ली। मार्च में सेना ने नॉर्थ कश्‍मीर के कुपवाड़ा के लश्‍कर-ए-तैयबा के आतंकी जबीउल्‍ला उर्फ हमजा को गिरफ्तार किया था। इस आतंकी ने राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को अब बताया है कि कैसे उसे लश्‍कर-ए-तैयबा में नंबर दो आतंकी जकी-उर-रहमान लखवी के बेटे ने एलओसी पार कराई थी और लश्‍कर के छह आतंकियों का एक ग्रुप यहां से कुपवाड़ा में दाखिल हुआ था। लखवी 26/11 मुंबई आतंकी हमलों का मास्‍टरमाइंड हैं। कुछ दिन जेल में रहने के बाद इस समय वह भी पाकिस्‍तान मे आजाद घूम रहा है। एनआईए ने जबीउल्‍ला की ओर से बताई गईं बातों के आधार पर आतंकियों के पीओके स्थित मुजफ्फराबाद से कश्‍मीर में दाखिल होने वाले रास्‍ते का पता लगाया है।

अकेला जिंदा बचा आतंकी

अकेला जिंदा बचा आतंकी

20 वर्ष का जबीउल्‍ला 20 मार्च को कुपवाड़ा में चलाए गए एंटी-टेरर ऑपरेशन में अकेला जिंदा बचा आतंकी है। उसके बाकी साथियों को सेना ने मार गिराया था। आतंकी जिस रास्‍ते से जम्‍मू कश्‍मीर में दाखिल होते हैं वह पीओके में स्थित है। पीओके के धुंधियाल और तेजिया में रुकते हुए भारत की तरफ पर स्थित सरबाल नामक इलाके में दाखिल होते हैं। यह इलाका एलओसी पर स्थित है। इसके आसपास सेना की चार पोस्‍ट्स हैं और यहां से आतंकी कुपवाड़ा के हलमातपोरा और तुशान बाला जुगितयाल तक पहुंच जाते हैं।

लखवी के बेटे ने दिए एक लाख रुपए

लखवी के बेटे ने दिए एक लाख रुपए

लश्‍कर में ट्रेनिंग विंग का हफ्ता है। जबीउल्‍ला ने एनआईए को बताया ट्रेनिंग पूरी होने के बाद हफ्जा ने छह आतंकियों को सेलेक्‍ट किया था। इन आतंकियों को एके-47, एक किेलो बादाम और खजूर, शहद की पांच शिशियां, कुछ 20 रोटियां और हर आतंकी को भारतीय मुद्रा में एक लाख रुपए दिए गए थे। जबीउल्‍ला के मुताबिक ये रकम कासिम भाई की ओर से दी गई थी जोकि लखवी का बेटा है। लखवी इस समय लश्‍कर का ऑपरेशनल कमांडर है। इसके बाद कासिम सभी आतंकियों को मुजफ्फराबाद से सरवाल अपनी टोयोटा कोस्‍टर गाड़ी में लेकर गया। जबीउल्‍ला की मानें तो आतंकियों को एलओसी तक पहुंचने में पूरे दो दिन का समय लगा था। यहां पर इन आतंकियों ने फेंसिग को काटा जिसमें उन्‍हें पांच और आतंकियों की मदद मिली थी। इसके बाद इन सभी को एलओसी तक छोड़कर आया गया।

जीपीसी से ट्रैक की आर्मी पोस्‍ट

जीपीसी से ट्रैक की आर्मी पोस्‍ट

आतंकी जीपीएस की मदद से इंडियन आर्मी की पोस्‍ट डिंग तक पहुंचे थे। कुपवाड़ा के जंगलों में ये आतंकी करीब 15 दिन तक छिपे रहे। यहां पर एक स्‍थानीय कश्‍मीर ने राशन हासिल करने में इनकी मदद की। 12 मार्च की शाम को आतंकी अल्‍ताफ और बिल्‍ला नामक व्‍यक्तियों के घर पहुंचे। जबीउल्‍ला ने बताया कि उसके ग्रुप के लीडर वकास ने इन्‍हें 13,000 रुपए की रमक दाल, बिस्‍कुट, बर्तन और मिल्‍क पाउडर खरीदने को दी थी। इस घर में आतंकी करीब छह दिन तक रहे थे। इसके बाद यहां से ये एक और गांव फतेह खान में दाखिल हुए थे। यहां पर लोगों ने शुरुआत में इनसे मिलने से इनकार दिया। लेकिन एक व्‍यक्ति ने इन्‍हें रहने की जगह और खाना मुहैया कराया था।

20 मार्च को मारे गए सारे साथी

20 मार्च को मारे गए सारे साथी

20 मार्च को सेना और सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया और फायरिंग शुरू कर दी। सारे आतंकी सो रहे थे फायरिंग की आवाज सुनते ही वे जागे और उन्‍होंने अपने हथियार उठाए। यहां से आतंकी जंगल की तरफ भाग गए। आतंकी एक गांव ढोक में एक घर में पहुंचे और उन्‍होंने मालिक को बताया कि वे लश्‍कर-ए-तैयबा से हैं और पाकिस्‍तान से आए हैं। यहीं पर जबीउल्‍ला के सभी साथियों को एनकाउंटर में सेना ने मार गिराया था। वह किसी तरह से भागने में कामयाब हुआ और कुछ दिनों बाद सेना ने उसे भी पकड़ लिया।

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English summary
Arrested jihadi has told to NIA how Lakhvi's son feried group of 6 Lashkar terrorists to LoC from there ther reached North Kashmir's Kupwara.
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