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'आपके बच्चे हथियार छोड़ें, हम उनके लिए जान देने को तैयार', इंडियन आर्मी ने आतंकियों के परिजनों को दिया मैसेज

नई दिल्ली, 01 सितंबर। घाटी में आतंकवाद को रोकने के लिए भारतीय सेना ने अपने आप में अलग मुहिम शुरू की है। भारतीय सेना और पुलिस के शीर्ष अधिकारियों ने साउथ कश्मीर के शोपियां में मिलिटेंट के परिवारों से मुलाकात की है। सेना और पुलिस के अधिकारियों ने 80 से अधिक परिवारों से मुलाकात की जिनके बच्चे घाटी में मिलिटेंसी में शामिल हैं। इन लोगों से मुलाकात करके परिवारों से अपील की गई कि आप अपने बच्चों को वापस बुलाएं। कश्मीर के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस विजय कुमार, जनरल ऑफिसर कमांडिंग 15 कॉर्प लेफ्टिनेंट डीपी पांडे, जीओसी विक्टर फोर्स मेजर जनरल रशीम बाली ने इन परिवारों से मुलाकात की।

आपके बच्चों के लिए हम जान देंगे

आपके बच्चों के लिए हम जान देंगे

लेफ्टिनेंट जनरल पांडे ने कहा कि मैंने GoC विक्टर से कहा कि मैं मिलिटेंट के परिवारों से खुद मिलना चाहता हूं और उनसे अपील करना चाहता हूं कि आप अपने बच्चों को मिलिटेंसी से वापस लाएं। लेफ्टिनेंट जनरल पांडे ने परिवारों से कहा कि आप अपने बच्चों को चुपचाप वापस आ जाने के लिए कहिए। मुझे नहीं पता आप ये कैसे करते हैं, यह आप पर निर्भर करता है। लेकिन अगर ऑपरेशन के दौरान अगर आपका बच्चा हथियार डालता है तो हम बुलेट अपने ऊपर लेंगे, खुद घायल होंगे, खुद शहीद होंगे, लेकिन आपके बच्चे को बचाएंगे। ये मेरा आपसे वादा है, बाकी आपके ऊपर है, फैसला आपको लेना है।

सेना की पहली और अनोखी मुहिम

सेना की पहली और अनोखी मुहिम

बता दें कि यह पहली बार है कि पुलिस और सेना के अधिकारियों ने सीधे मिलिटेंट के परिवारों से बात की है। पिछले पांच सालों में दक्षिण कश्मीर में हिंसा बढ़ी है। सूत्रों की मानें तो जिन परिवारों ने इस मुलाकात में हिस्सा लिया वो मुख्य रूप से शोपियां, पुलवामा, कुलगाम और अनंतनाग जिले से थीं। इससे पहले फरवरी माह में मेजर जनरल बाली ने साउथ कश्मीर के पुलवामा में युवाओं से सीधी मुलाकात की थी, यह मुहिम भी अपने आप में एक अलग तरह की मुहिम थी। मिलिटेंट के परिवारों से मुलाकात के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल पांडे ने कहा कि सेना युवाओं के साथ बात करेगी जो हथियार डालने को तैयार हैं। हम उनकी दिक्कतों को सुनेंगे और उन्हें मुख्यधारा में लाने में उनकी मदद करेंगे।

गलत रास्ते पर चलकर कुछ भी हासिल नहीं होगा

गलत रास्ते पर चलकर कुछ भी हासिल नहीं होगा

लेफ्टिनेंट जनरल पांडे ने कहा कि आस-पास के लोगों का प्रभाव पड़ता है और कभी-कभी सोशल मीडिया भी बच्चों को गलत रास्ता अख्तियार करने के लिए प्रेरित करता है। ऐसे में हमे बच्चों को समझाना होगा कि यह गलत रास्ता है। सेना के अधिकारी ने परिवारों से अपील की कि वो अपने बच्चों को आतंक के रास्ते से वापस बुलाएं, क्योंकि इस रास्ते पर चलकर कुछ भी हासिल नहीं होगा बल्कि बहुत कुछ खोना पड़ेगा।

बच्चों को कुछ साल के लिए बाहर भेजेंगे

बच्चों को कुछ साल के लिए बाहर भेजेंगे

परिवारों से बात करते हुए सेना के अधिकारी ने कहा कि अगर आपको लगता है कि अगर हमारे बच्चे आतंक का रास्ता छोड़कर वापस आएंगे तो आतंकी उन्हें अपना निशाना बनाएंगे और आप इस बात को लेकर चिंतित हैं तो इस तरह के मामलों में मैं आपको आश्वासन देता हूं कि कुछ समय के लिए उनके बच्चों को चुपचाप बाहर भेज दिया जाएगा, जहां वो अपने परिवार की देखरेख में रहेंगे। आतंक का रास्ता छोड़कर वापस आने वालों को हम कुछ साल के लिए घाटी के बाहर भेजेंगे।

सफेदपोश लोग आपके बच्चों को आतंक में ढकेल रहे

सफेदपोश लोग आपके बच्चों को आतंक में ढकेल रहे

अगर मिलिटेंट आतंकवाद का रास्ता छोड़ने के लिए तैयार हैं तो हम उनकी किसी भी सूरत में रक्षा करेंगे। घाटी में कुछ सफेदपोश आतंकी भी हैं जोकि आम लोगों के बीच में हैं जिनके बच्चे विदेश में पढ़ते हैं, देश के दूसरे राज्यों में पढ़ते हैं, ये लोग नहीं चाहते हैं कि उनके बच्चे हथियार उठाएं और मारे जाए, लिहाजा ये आपके बच्चों को हथियार उठाने के लिए कहते हैं और वो मारे जाते हैं। इंस्पेक्टर जनरल विजय कुमार ने भी परिवारों से अपील की कि वो अपने बच्चों को आतंक के रास्ते से वापस लाएं। पुलिस मिलिटेंट्स को आत्मसमर्पण करने का पर्याप्त मौका दे रही है।

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