महिला अफसरों को मिलेगा स्थायी कमीशन, सुप्रीम कोर्ट के सख्ती के बाद सेना का फैसला
नई दिल्ली, 12 नवंबर: सेना में 11 महिला अफसरों को स्थायी कमीशन दिया जाएगा। सेना की ओर से सुप्रीम कोर्ट में ये बात कही गई है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद सेना ने ये फैसला लिया है। कोर्ट ने सेना को महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने की प्रक्रिया 26 नवंबर तक पूरी करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि जिन अफसरों के पास विजिलेंस और अनुशासनात्मक क्लीयरेंस हैं, उनको परमानेंट कमीशन (पीसी) से वंचित नहीं किया जा सकता है।
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सेना की ओर से शुक्रवार (12 नवंबर) को सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह उन 11 महिलाओं को स्थायी कमीशन देगी, जिन्होंने यह आरोप लगाते हुए अदालत का रुख किया था कि सभी पात्रता मानदंडों को पूरा करने के बावजूद स्थायी कमीशन के लिए उनके आवेदन खारिज कर दिए गए। अदालत ने सेना को कहा कि 26 नवंबर तक ये प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि जो योग्य अफसर हैं उन्हें भी तीन हफ्ते में स्थाई कमीशन देना होगा, वो भले ही कोर्ट नहीं आईं।
एएसजी संजय जैन ने केंद्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कुल 72 महिला अफसरों में से एक ने रिलीज मांगी है। 35 में से 21 याचिकाकर्ताओं को स्थानीय कमीशन मिला है जबकि 14 महिला अफसरों में मेडिकल में फेल हो गईं। 11 अफसरों को भी दस दिन के भीतर स्थायी कमीशन दे दिया जाएगा। वहीं वो महिला अफसर जिन्होंने कार्ट का रुख नहीं किया लेकिन योग्यता रखती हैं, उनको 20 दिन के भीतर स्थायी कमीशन दिया जाएगा।
NDA परीक्षा में बैठने को लेकर भी महिलाओं के मिली बड़ी जीत
महिला को इस साल से राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) परीक्षा में बैठने की इजाजत भी मिली है। सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद ही उनको ये हक मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने इस साल अगस्त में एक अहम फैसला देते हुए महिलाओं को एनडीए की परीक्षा में बैठने की इजाजत दी थी। इसके बाद हाल ही में कोर्ट ने कहा था कि महिला उम्मीदवारों को इस साल नवंबर में होने वाली राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) परीक्षा में बैठने की इजाजत मिलनी चाहिए। ये एक लैंगिक समानता का मसला है और इसको आगे के लिए नहीं टाला जा सकता है।












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