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जानिए कौन-कौन से सेक्‍शंस लगाए गए हैं आरीफ माजिद पर

मुंबई। आईएसआईएस में शामिल होकर इराक से लौटे 23 वर्ष के आरिफ को फिलहाल आठ दिसंबर तक एनआईए की कस्‍टडी में भेज दिया गया है। आरीफ को शनिवार को कोर्ट में पेश किया गया था। जैसे ही आरीफ इराक से वापस आया था, उसे एनआईए ने अपनी हिरासत में ले लिया था।

Areef Majid

शुक्रवार को ही गृह मंत्रालय के साथ इस बात पर सलाह मशविरा किया गया कि क्‍या आरीफ के खिलाफ कोई केस दर्ज होगा। जब गृह मंत्रालय ने अपनी मंजूरी इस पर दी तो एनआईए की ओर से माजिद के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

आपको बता दें के आईएसआईएस भारत में बैन है और ऐसे में माजिद या बाकी तीन लड़कों के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं किया जा सकता है।

माजिद के खिलाफ कौन-कौन से सेक्‍शंस

माजिद के खिलाफ जो केस दर्ज हुए वह अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्‍ट (यूएपीए) के तहत दर्ज किए गए हैं। वहीं आईपीसी के तहत भी उस पर एक केस दर्ज किया गया है। एनआईए की ओर से कहा गया है कि माजिद के खिलाफ अलग-अलग सेक्‍शंस में केस दर्ज कराना जरूरी था।

ISIS के प्रभाव को कम करने की कोशिश

भले ही आईएसआईएस बैन संगठन न हो लेकिन इसके बावजूद माजिद पर कानूनी कार्रवाई करना काफी जरूरी था। ताकि देश के बाकी युवाओं को भी इस बात का अहसास हो कि अगर वे देश से बाहर जाकर आईएसआईएस का साथ देते हैं तो उनका काम आपराधिक श्रेणी में आएगा और वह बचकर नहीं निकल सकते हैं।

एनआईए ने आईएसआईएस के खिलाफ एक डॉजियर तैयार किया है और अब देश में आईएसआईएस को बैन करने का दबाव बनाया जा रहा है। पूर्व में कई केस ऐसे हुए हैं जहां कई युवा आईएसआईएस के समर्थन में आगे आए हैं और उन्‍होंने इस संगठन को अपना समर्थन खुले तौर पर जाहिर किया है।

फिलहाल इन युवाओं की काउसलिंग की जा रही है। वहीं भारत सरकार की ओर से सारी कोशिशें की जा रही हैं कि वह आईएसआईएस के प्रभाव को कमजोर कर सकें। इन्‍हीं कोशिशों को नतीजा है कि फिलहाल देश में आईएसआईएस ज्‍वॉइन करने वाले युवकों की संख्‍या 300 से घटकर 20 पर आ गई है।

सेक्‍शंस और क्‍या हो सकती है माजिद की सजा

माजिद के खिलाफ यूएपीए के सेक्‍शन 16, 18 और 20 केस दर्ज किया गया है। इसके अलावा उस पर इंडियन पीनल कोड ( आईपीसी ) के सेक्‍शन 125 के तहत भी केस चलेगा।

UAPA

सेक्‍शन 16- आतंकवाद

कोई भी व्‍यक्ति जो आतंकी गतिविधियों में शामिल होगा उसे उम्र कैद या फिर मौत की सजा होगी लेकिन तभी जब किसी वह दोषी किसी व्‍यक्ति की मौत का जिम्‍मेदार हो। इसके साथ ही उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। बाकी केसों में उस व्‍यक्ति को पांच वर्ष तक की सजा हो सकती है। इस सजा को उम्र कैद में भी तब्‍दील किया जा सकता है।

सेक्‍शन 18-षडयंत्र

ऐसा कोई भी व्‍यक्ति तो गैरकानूनी, या फिर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल, किसी को इनके लिए उकसाने या फिर इनकी वकालत करता पाया गया तो उसे कम से कम पांच वर्ष की सजा होगी। सेक्‍शन 16 की ही तरह इसे उम्र कैद में तब्‍दील किया जा सकता है और उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

सेक्‍शन 20-किसी भी आतंकी संगठन का सदस्‍य

कोई भी व्‍यक्ति जो किसी भी आतंकी संगठन का सदस्‍य तो इसका मतलब है कि वह आतंकी गतिविधियों का हिस्‍सा है। ऐसे में उस व्‍यक्ति को एक निश्चित अ‍वधि तक जेल में रहना होगा जिसे उम्रकैद में भी तब्‍दील किया जा सकता है। इस व्‍यक्ति पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

IPC का सेक्‍शन 125

केंद्र सरकार से जुड़ी शक्तियों के खिलाफ युद्ध या लड़ाई छेड़ना-अगर किसी भी व्‍यक्ति को इसका दोषी पाया जाता है तो फिर उसे उम्र कैद की सजा होगी, जिसमें जुर्माने का प्रावधान भी शामिल है। उस व्‍यक्ति को उम्र कैद की सजा या फिर सात वर्ष तक की सजा हो सकती है।

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