मदद के नाम पर पाक से नेपाल में भारत विरोधियों के पहुंचने का खतरा

नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। भूकंप से बर्बाद हो गए नेपाल में पाकिस्तान से भारत विरोधी आतंकियों के पहुंचने का खतरा पैदा हो गया है। सूत्रों का कहना है ये भारत विरोधी नेपाल की मदद के नाम पर वहां पर पहुंचकर भारत विरोधी हरकतें कर सकते हैं।भारत सरकार को भी इस तरह के संकेत मिले हैं।

इस्लामिक कट्टरपंथी

जानकारों का कहना है कि भारत को सुनिशचत करना होगा ताकि वहां पर पाकिस्तान के कुछ इस्लामिक कट्टरपंथी भी मदद देने के लिए न पहुंचने लगे। वे नेपाल का इस्तेमाल करते रहे हैं भारत के खिलाफ अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए। भारत को इस बात का ध्यान देना होगा। कोशिश करनी होगी ताकि 90 के दशक के हालात फिर से पैदा न हों। आपको याद होगा कि तब नेपाल से भारत का एक विमान हाईजैक किया गया था। तब भी नवाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे। उन्होंने बस सारे मामले पर दुख जाहिर कर दिया था।

नजर रखे चीन पर

नेपाल में भूकंप ने जो तबाही मचाई है, उसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। भारत का पड़ोसी घोर संकट में है। उसके दर्द को दूर करना भारत का धर्म है और उसी भाव से भारत इस बाबत जुट भी गया है। यह एक मौका है भारत के लिए जिसमें वह सिद्ध कर सकता है कि वह उसका सच्चा मित्र और हितैषी है।

बीते कुछ सालों से चीन भी उसका करीबी बनने का प्रयास कर रहा है। वह भी नेपाल में इनवेस्टमेंट कर रहा है। बेहतर होगा कि चीन पहले तिब्बत को देखे। बाद में वह नेपाल को देख सकता है।

इस बीच,प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साफ कहा कि नेपाल का संकट भी हमारा ही संकट है। करीब 500 भारतीय जवान सारी राहत सामग्री, मोबाइल अस्पताल एवं आपात सेवाओं सहित नेपाल में अपना काम कर रहे हैं। नेपाल में 200 टन खाने का सामान भेजा जा चुका है। भारत जो पुनर्वास के काम अपने भूकंप प्रभावित राज्यों के लिए कर रहा है उससे कहीं ज्यादा व्यवस्थाओं की जरुरत नेपाल को है।

मोदी ने स्वयं वहां के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला से बात की और उनसे लगातार संपर्क में हैं। भारत ने नेपाल की तबाही के इसी तरह लिया है जैसे तबाही हमारी ही हुई है। यानी वहां राहत और पुनर्निर्माण की पूरी जिम्मेदारी भारत की। पुनर्वास के काम को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज स्वयं देख रहीं हैं।

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