Andhra Pradesh: प्रशांत किशोर ने बदली पार्टी,YSRC कैंप में हड़कंप! क्या काम करेगी जगन मोहन रेड्डी की ये तरकीब?
तेलंगाना में सत्ता परिवर्तिन के बाद पड़ोसी आंध्र प्रदेश की राजनीति में भी उथल-पुथल मच रही है। सत्ताधारी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के नेता और मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के हालिया फैसलों से लगता है कि उनके सामने आने वाले चुनावों से पहले कई चुनौतियां खड़ी हो चुकी हैं।
आंध्र प्रदेश के सीएम जगन रेड्डी ने हाल में ताबड़तोड़ ऐसे फैसले लिए हैं, जिससे लगता है कि उन्हें आने वाले लोकसभा चुनावों और विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी के प्रदर्शन को लेकर चिंता हो रही है। पिछली बार दोनों चुनावों में उनकी पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की थी।

जगन रेड्डी ने पहले मौजूदा विधायकों का पत्ता किया साफ
पिछले पांच वर्षों के कार्यकाल में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को बहुत भारी एंटी-इंकंबेसी की चिंता सता रही है। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी ने विधानसभा चुनावों के लिए अबतक 42 मौजूदा विधायकों का टिकट काट दिया है और टीडीपी नेता और पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू के जेल से निकलने के बाद यह लिस्ट और बढ़ सकती है।
2019 में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने दर्ज की थी धमाकेदार जीत
2019 के लोकसभा चुनावों में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने आंध्र प्रदेश में 25 में से 22 सीटें जीत ली थी। जबकि, विधानसभा चुनावों में उसे 175 में से 151 सीटें मिल गई थी। दोनों ही चुनाव एक ही साथ हुए थे, जिसमें उसका वोट शेयर लगभग 50% के आसपास रहा था। हाल तक जगन प्रदेश की लोकप्रियता में चरम पर नजर आते थे।
नायडू की गिरफ्तारी से बदलने लगी तस्वीर
लेकिन, अब जगन की पार्टी के नेता भी मानने लगे हैं कि पहले जिस तरह से पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू की गिरफ्तारी हुई और फिर उनकी रिहाई हुई, उससे राज्य में टीडीपी मजबूत हुई है। हालांकि, सत्ताधारी दल को अभी भी अपनी लोकप्रिय योजनाओं पर भरोसा बना हुआ है।
इसलिए पार्टी ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए अभी से उम्मीदवारों के नाम तय करने शुरू कर दिए हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक विधायकों के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी को दूर करने के लिए अभी करीब 15 और एमएलए के टिकट काटे जा सकते हैं।
इसके साथ ही पार्टी प्रत्याशियां का नाम जल्द तय करके चुनाव तैयारियां भी शुरू कर चुकी है। एक अनुमान के मुताबिक इस बार वाईएसआरसी पार्टी के करीब 40% मौजूदा विधायक चुनाव नहीं लड़ेंगे।
पहली बार जातीय जनगणना की शुरुआत
लेकिन, लगता है कि नेतृत्व एंटी-इंकंबेंसी और नायडू एपिसोड से इतना चिंतित है कि उसे अब जाति जनगणना वाला कार्ड भी चलना पड़ा है। शुक्रवार से शुरू हुई इस प्रक्रिया का पहला चरण 28 जनवरी तक ही पूरा हो जाना है। राज्य के 94 साल के इतिहास में यह ऐसी पहली जनगणना है।
आरक्षण में कोटा बढ़ाने का भी जगन लगा सकते हैं दांव
माना जा रहा है कि फरवरी के पहले हफ्ते में राज्य के 1.67 करोड़ परिवारों से जाति जनगणना का दूसरा चरण भी पूरा कर लिए जाने के बाद नए आंकड़ों के आधार पर जगन सरकार पिछडों, आदिवासियों और दलितों के आरक्षण का कोटा को बढ़ाने का भी फैसला कर सकती है।
चुनावी साल में यह बहुत बड़ा सियासी कदम माना जा रहा है, क्योंकि ये सारे वर्ग वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के जनाधार का बड़ा हिस्सा माने जाते हैं।
प्रशांत किशोर इस बार चंद्रबाबू को दे रहे हैं सलाह
अगर आंध्र प्रदेश के इन सारे राजनीतिक घटनाक्रमों के बैकग्राउंड में देखें तो वहां सत्ताधारी दल और मुख्य विपक्षी टीडीपी की चुनावी रणनीति में एक बहुत बड़ा बदलाव हो गया है।
2019 में जगन मोहन रेड्डी की पार्टी का चुनाव अभियान चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की अगुवाई वाले आईपीएसी (IPAC) ने संभाली थी। हालांकि, आईपीएसी 2024 में भी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की चुनावी रणनीतियां बनाने में जुटी है।
लेकिन, खुद प्रशांत किशोर इससे अलग हो चुके हैं और इस बार वह टीडीपी के लिए काम कर रहे हैं। टीडीपी सूत्रों का कहना है कि वे चुनाव अभियान के दौरान पार्टी को सलाह दे रहे हैं और पार्टी को लगता है कि इससे उन्हें हौसला बढ़ाने में मदद मिल रही है।
बहन शर्मिला ने भी दी है टेंशन
जगन मोहन के लिए एक समस्या उनकी बहन वाईएस शर्मिला के बदले राजनीतिक ठिकाने ने भी बढ़ाई है। वह तेलंगाना की राजनीति से तोबा करके वापस आंध्र प्रदेश की पॉलिटिक्स में आ चुकी हैं और कांग्रेस ने उन्हें पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है।
शर्मिला अपने पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी के नाम पर पड़ने वाले जितने भी सहानुभूति वोट वाईएसआर कांग्रेस पार्टी से काटेंगी, उनके भाई को टीडीपी का सामना करने में उतनी ही दिक्कत होगी।












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