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देशद्रोह व राष्ट्रभक्ति की प्रमाणिकता पर प्रश्न!

By Rajiv Ranjan Tiwari
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गोरखपुर। आपने रामजस कॉलेज, दिल्ली का नाम तो सुना ही होगा? देश की प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध रामजस कॉलेज में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थी खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं। इस कॉलेज के कैम्पस की खासियत यहां का सुदृढ़ शैक्षणिक वातावरण है। देश के सुदूर इलाकों में निवास करने वाले माता-पिता की इच्छा रहती है कि काश उसके बेटा-बेटी का नामांकन रामजस कॉलेज जैसे किसी संस्थान में हो जाता। लेकिन अफसोस कि इस प्रतिष्ठित रामजस कॉलेज की छवि को पिछले दिनों साजिशन जोरदार बट्टा लगाया गया।

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देशद्रोह व राष्ट्रभक्ति की प्रमाणिकता पर प्रश्न!

बीते वर्ष दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर से उठा देशद्रोह और राष्ट्रभक्ति की गुब्बार खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि साजिशन इस मुद्दे पर कानून हाथ में लेने की भी कोशिश की जा रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चुनी हुई एक लोकतांत्रिक सरकार की नाक के नीचे हो रहा नंगा नाच देशद्रोह एवं राष्ट्रभक्ति जैसे शब्दों की प्रमाणिकता पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। आप खुद सोचिए कि पिछले दिनों पुलिस की मौजूदगी में दिल्ली के रामजस कॉलेज परिसर में देशद्रोह एवं राष्ट्रभक्ति के नाम पर जो कुछ भी हुआ, उसे किस रूप में देखा जाए। उससे हासिल क्या हुआ? यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस तरह की घटनाएं यदि नहीं रूकीं आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ेंगे, यह आशंका जताई जा सकती है।

देशद्रोह व राष्ट्रभक्ति की प्रमाणिकता पर प्रश्न!

दिल्ली के रामजस कॉलेज में बीते दिनों हुए घटनाओं को देख यह सवाल पैदा हो रहा है कि क्या बीते वर्ष की शुरूआत में जेएनयू में हुए बवाल की आंच अब दिल्ली विश्वविद्यालय तक पहुंच गई है? भाजपा की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि वामपंथी छात्र संगठन आइसा ने डीयू के रामजस कॉलेज में भी देश विरोधी नारे लगाए हैं, जबकि आइसा ने इन आरोपों को नकार दिया। 35 सेकेंड का एक वीडियो ट्विटर पर एबीवीपी के एक नेता ने जारी करते हुए दावा किया कि वीडियो दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज कैंपस का हैं और इसमें वामपंथी छात्र देश विरोधी नारेबाजी कर रहे हैं। दरअसल, रामजस कॉलेज में एबीवीपी और वामपंथी छात्र संगठन खासकर आइसा आमने-सामने हैं। आपको बता दें कि रामजस कॉलेज के इतिहास विभाग ने पिछले दिनों 'कल्चर ऑफ प्रोटेस्ट' विषय पर दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया था। पहले दिन इसमें जेएनयू के छात्र उमर खालिद और जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व सदस्य शेहला राशिद को भी बुलाया गया था। लेकिन एबीवीपी के विरोध के कारण कार्यक्रम रद्द हो गया। फिर भी मामला शांत नहीं हुआ। एबीवीपी व आइसा के छात्र आमने-सामने आ गए और मारपीट हो गई। इस मामले में आठ पुलिस अफसर भी घायल हुए। मामले में अज्ञात लोगों पर दंगे करने व ड्यूटी से रोकने का केस दर्ज हुआ। इस झड़प में पत्रकारों को भी निशाना बनाया गया। अब दोनों पक्ष एक-दूसरे पर साजिश का आरोप लगा रहे हैं।

देशद्रोह व राष्ट्रभक्ति की प्रमाणिकता पर प्रश्न!

उल्लेखनीय है कि कोर्ट द्वारा दिए गए नियमित जमानत पर रिहा खालिद उन छात्रों में शामिल हैं जिन पर पिछले साल जेएनयू में संसद हमले के दोषी अफजल गुरु के समर्थन में एक कार्यक्रम करके कथित रूप से देशविरोधी नारे लगाने का आरोप है। इस आरोप में उमर के साथ ही जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और छात्र अनिर्बान जेल में रह चुके हैं। इन तीनों छात्र नेताओं को कोर्ट द्वारा नियमित जमानत दे दी गई है। बावजूद इसके इन्हें देशद्रोही बताना न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि कोर्ट की अवमानना की श्रेणी में भी आ सकता है। आप खुद सोचिए जेएनयू प्रकरण के एक वर्ष बीतने के बाद भी अब पुलिस द्वारा कथित रूप से साक्ष्यों के अभाव में आरोप-पत्र दाखिल नहीं किया जा सका है, बावजूद इसके इन छात्रों (कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान) के प्रति दुर्भावना रखना ठीक नहीं है। यदि कोर्ट द्वारा इन्हें आरोपों का दोषी माना गया होता तो शायद नियमित जमानत पर रिहा नहीं किया गया होता। इसलिए इन छात्रों का विरोध करने वालों पर यह आरोप लगाया जा सकता है कि वे साजिशन इन्हें निशाना बना रहे हैं। दुर्भाग्यपूर्ण तो यह भी है घटना के दिन रामजस कॉलेज में छात्राओं के साथ भी बदतमीजी की गई, जो भारतीय संस्कृति की मर्यादा के घोर विरुद्ध है। यूं कहें कि पहले जेएनयू और अब दिल्ली विश्वनविद्यालय में भी देशविरोधी नारे लगाने के दावे से राजनीति गर्माने के आसार हैं, खासकर तब जब देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में चुनाव चल रहा है।

रामजस कॉलेज में हिंसा के बाद हालात पर चर्चा के लिए स्टाफ काउंसिल मीटिंग हुई, जिसमें कई गंभीर मुद्दों पर विचार किया गया। इसके अतिरिक्त पिछले दिनों इसी हिंसा के चलते श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में नुक्कड़ नाटक का मुकाबला इसलिए टाल दिया गया था कि एबीवीपी की अगुवाई वाले दिल्ली छात्र संघ ने प्राचार्य अमित तंवर को बताया था कि अगर मुकाबले में कुछ भी आपत्तिजनक और राष्ट्र-विरोधी टिप्पणी होती है तो सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती। इस बीच, केंद्र सरकार ने हिंसा पर दिल्ली यूनिवर्सिटी से रिपोर्ट मांगी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि वो यूनिवर्सिटी के मामलों में दखल नहीं दे सकते। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने साफ किया था कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश विरोधी नारों की इजाजत नहीं दी जा सकती और शिक्षण संस्थानों को राष्ट्रद्रोह का अड्डा बनने नहीं दिया जा सकता। दिल्ली पुलिस ने मामले में 3 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया है। हिंसा की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। स्पेशल कमिश्नर एसबीके सिंह के मुताबिक घटना से जुड़े वीडियो की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में एक और एफआईआर दर्ज करना मुमकिन नहीं है। छात्र संगठन इस एफआईआर की मांग को लेकर अदालत जा सकते हैं। बेशक, रामजस कॉलेज का मामला गर्माता जा रहा है। यदि इस तरह की घटनाओं पर समय से पहले रोक नहीं लगी तो बात और बिगड़ सकती है।

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English summary
Analysis based article on Country patriotism and treason in concern with students by Rajiv Ranjan Tiwari Gorakhpur
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