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घटना के 11 दिन बाद लिया गया था हाथरस पीड़िता का सैंपल, रेप ना होने की बात पर अलीगढ़ CMO ने उठाए सवाल

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हाथरस/अलीगढ़: हाथरस पीड़िता (Hathras victim) के साथ गैंगरेप या रेप हुआ था या नहीं, ये सवाल उलझता जा रहा है। उत्तर प्रदेश के ADG प्रशांत कुमार ने एक अक्टूबर को आगरा की एफएसएल रिपोर्ट (FSL report) के आधार पर दावा किया था कि पीड़िता का रेप नहीं हुआ है। इस पूरे मामले पर अलीगढ़ के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (JNMCH) के चीफ मेडिकल ऑफिसर (Aligarh CMO) ने कहा है कि जिस फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट के आधार पर दावा किया जा रहा है कि पीड़िता का रेप नहीं हुआ, उसका कोई मूल्य नहीं है। अलीगढ़ के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (JNMCH) में ही हाथरस पीड़िता को सबसे पहले भर्ती किया गया था। पीड़िता के साथ कथित तौर पर 14 सितंबर को 4 लोगों ने गैंगरेप किया था।

अलीगढ़ CMO ने क्यों कहा FSL रिपोर्ट का कोई मतलब नहीं?

अलीगढ़ CMO ने क्यों कहा FSL रिपोर्ट का कोई मतलब नहीं?

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अलीगढ़ के चीफ मेडिकल ऑफिसर अजीम मलिक ने कहा है, जिस एफएसएल रिपोर्ट (FSL report) के आधार पर यूपी पुलिस दावा कर रही है कि पीड़िता का रेप नहीं हुआ, उस एफएसएल रिपोर्ट की कोई वैल्यू नहीं है, क्योंकि पीड़िता का घटना के 11 दिन बाद FSL जांच के लिए सैंपल लिया गया था। जबकि सरकारी दिशा-निर्देशों में सख्ती से कहा गया है कि घटना के 96 घंटे बाद तक ही केवल फॉरेंसिक सबूत पाए जा सकते हैं। इसलिए ये रिपोर्ट रेप की पुष्टी नहीं कर सकते हैं।

JNMCH के डॉक्टर ने कहा- FSL रिपोर्ट पर कैसे भरोस कर सकते हैं

JNMCH के डॉक्टर ने कहा- FSL रिपोर्ट पर कैसे भरोस कर सकते हैं

जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (JNMCH) में रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. हमजा मलिक ने एफएसएल रिपोर्ट को "अविश्वसनीय" कहा है। डॉ. हमजा मलिक ने कहा है कि आप उस FSL रिपोर्ट पर भरोसा कैसे कर सकते हैं। FSL टीम को वारदात के 11 दिन बाद रेप के सबूत कैसे मिलेंगे। स्पर्म 2-3 दिनों के बाद जीवित नहीं रहता है। FSL टीम ने पीड़िता के बाल, कपड़े, नाखून बिस्तर और वैजाइना-एनल से सैंपल लिए लेकिन पेशाब, शौच और मासिक धर्म की वजह से स्पर्म बाहर निकल जाते हैं।

JNMCH के अपनी फाइनल रिपोर्ट में क्या लिखा है?

JNMCH के अपनी फाइनल रिपोर्ट में क्या लिखा है?

जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (JNMCH) अलीगढ़, जहां पीड़िता सबसे पहले भर्ती हुई, उन्होंने 3 अक्टूबर को हाथरस के सादाबाद पुलिस स्टेशन के सर्कल ऑफिसर को अपनी फाइनल रिपोर्ट में बताया है कि डॉक्टरों ने पीड़िता के जानकारी देने पर 'वैजाइना में पेनिट्रेशन' की बात लिखी थी। यानी लड़की के साथ 'बल प्रयोग' किया गया था।

डॉक्टरों ने अपनी फाइनल रिपोर्ट में कहा है कि हमें पीड़िता के अंदर से स्पर्म के सैंपल नहीं मिले हैं। लेकिन यौन उत्पीड़न के सबूत के तौर पर पीड़िता पर शारीरिक हमला किया गया, जिसके सबूत गर्दन और पीठ पर चोट हैं।

हाथरस पीड़िता ने 22 सितंबर को गैंगरेप की बात बताई

हाथरस पीड़िता ने 22 सितंबर को गैंगरेप की बात बताई

19 वर्षीय दलित महिला के साथ 14 सितंबर को कथित तौर पर चार लड़कों ने मिलकर सुबह 9 बजे के आसपास गैंगरेप किया था। पीड़िता ने जानकारी खुद 22 सितंबर को एएमयू अस्पताल में होश में आने के बाद दी थी। उसके बाद पीड़िता का बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज करवाया गया था। पुलिस ने बलात्कार की प्रासंगिक धाराओं को एफआईआर में जोड़ा था और आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

एएमयू अस्पताल के फोरेंसिक विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. फैज अहमद द्वारा हस्ताक्षरित रिपोर्ट में कहा गया है कि पीड़िता ने अपने बयान में चार लड़कों पर रेप का आरोप लगाया था। पीड़िता ने बयान में कहा था कि सुबह 9 बजे जब वह अपने खेत में काम कर रही थी तो उसके साथ रेप हुआ था।

ये भी पढ़ें- हाथरस केस में UP पुलिस ने कहा- रेप नहीं हुआ, पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में 'जबरदस्ती' की बात, पढ़ें डिटेल

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English summary
Aligarh Muslim University’s (AMU’s) Chief Medical Officer says FSL report — which Uttar Pradesh Police has relied on to say she was not raped — “holds no value”.
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