दिल्ली में अकालियों को समझ आई जन्नत की हकीकत
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। हालांकि हरियाणा में अकाली दल ने हालिया विधान सभा चुनाव में भाजपा का साथ नहीं दिया, पर दिल्ली में उसकी ख्वाहिश है कि वह भाजपा के सात मिलकर आगामी विधान सभा चुनाव लड़े और जीते। दरअसल इस सोच के पीछे एक कारण यह भी है कि दिल्ली अकाली दल को मालूम है कि भाजपा से अलग होकर उसके लिए यहां पर एक सीट निकाल पाना भी कठिन होगा।

पिछले दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा 70 सदस्यीय विधानसभा में अकाली दल को चार सीटें दी थीं जिनमें से पार्टी राजौरी गार्डन और हरिनगर अपने चुनाव चिहन तथा कालकाजी एवं शाहदरा में भाजपा के चुनाव चिहन पर चुनाव लड़ी थी। राजौरी गार्डन, कालकाजी तथा शाहदरा में अकाली दल के उम्मीदवारों को जीत मिली थी।
साथ-साथ लड़ने की ख्वाहिश
अकाली दल को उम्मीद है कि पिछली बार जिस तरह से दोनों दल मिलकर चुनाव लड़े थे उसी तरह इस बार भी लड़ेंगे तथा केंद्र की तरह दिल्ली में भाजपा-अकाली दल की सरकार बनेगी। अकाली दल की दिल्ली इकाई को पूरी उम्मीद है कि दोनों दलों का यह पुराना गठबंधन आगे भी बना रहेगा।
भाजपा-अकाली गठबंधन टूट सकने संबंधी खबरों पर अकाली दल के एक नेता जितेन्द्र सिंह शंटी ने कहा कि सियासत में हर बात संभव है। परंतु भाजपा और अकाली दल का गठबंधन बहुत पुराना है। आज की तारीख में ऐसी कोई बात नजर नहीं आती है।
बहुत पुरानी दोस्ती
बेशक इन दोनों दलों के संबंध पुरान हैं , पर हाल के दौर मे कुछ दूरियां बढ़ी हैं। पंजाब में भाजपा और अकाली दल के बीच 1996 से गठबंधन है तथा दोनों दल अभी वहां सत्तारूढ़ हैं। इसके अलावा वे दिल्ली में साथ चुनाव लड़ते हैं।
इस बीच, दिल्ली अकाली दल के नेता मानते हैं कि मोदी लहर के चलते भाजपा की केन्द्र में सरकार बनी। पर, वे यह भी कहते हैं कि दिल्ली में दोनों दल मिलकर चुनाव लडेंगे। इसी में दोनों का लाभ है। हालांकि जानकार कहते हैं कि इससे अकालियों को लाभ होगा ना कि भाजपा को।












Click it and Unblock the Notifications