तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले AIADMK से निष्कासित नेता शशिकला का बड़ा ऐलान, बनाएंगी नई पार्टी
तमिलनाडु के रामनाथपुरम में, निष्कासित AIADMK नेता वी.के. शशिकला ने दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की जयंती पर आयोजित जनसभा में एक नई राजनीतिक दल के गठन की घोषणा की। उन्होंने इसे राज्य में "एक नया राजनीतिक अध्याय" बताया।
शशिकला ने कहा कि उनकी पार्टी अन्ना, एम.जी.आर. और अम्मा के मार्ग पर चलने वाला एक द्रविड़ आंदोलन होगी। यह दल गरीबों, दलितों और आम लोगों के लिए काम करेगा, तथा दुश्मनों व गद्दारों को जड़ से उखाड़ फेंकेगा। उन्होंने काले, सफेद और लाल रंगों वाला पार्टी झंडा भी दिखाया। इस पर अन्ना, एम.जी.आर. और अम्मा की छवियाँ गर्व से चमकेंगी। शशिकला ने बताया कि पार्टी के नाम का ऐलान जल्द किया जाएगा।

जयललिता के कार्यकाल की सराहना
शशिकला ने दिंवगत पूर्व सीएम जयललिता के कार्यकाल की सराहना करते हुए पार्टी के भीतर की मौजूदा स्थिति और अपने व्यक्तिगत अनुभवों पर बात की।
शशिकला ने अपने कहा, "जयललिता जनता के लिए मुख्यमंत्री बनीं और उन्होंने अनगिनत कल्याणकारी योजनाएं लागू कीं। मैं हर समय उनके साथ थी और मैंने अच्छा-बुरा सब कुछ देखा।" उन्होंने जयललिता के साथ अपने लंबे जुड़ाव का सबूत दिया, जिसमें उन्होंने हर स्थिति को करीब से देखने का दावा किया।
'कई मनगढ़ंत कहानियां गढ़ीं'
शशिकला ने कहा, "इसलिए अब मैं जो कहना चाहती हूं, वह यह है कि पार्टी के भीतर फिर से ऐसी ही स्थिति बन रही है। उस समय अम्मा का स्वास्थ्य ठीक नहीं था।" शशिकला ने 2016 के चुनावों के बाद की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जयललिता 72 दिनों तक अस्पताल में भर्ती थीं।
शशिकला ने कहा, "हमने उन्हें घर वापस लाने के लिए एक शुभ दिन भी देखा था। अचानक अप्रत्याशित दिल का दौरा पड़ गया।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक विरोधियों ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर "कई मनगढ़ंत कहानियां गढ़ीं।"
उन्होंने विपक्षी आरोपों को खारिज करते हुए कहा, "उन्होंने तो यहां तक कहा कि, 'इसी अम्मा ने तुम्हें मारा था।' क्या कोई ऐसी बातों पर विश्वास करेगा? राजनीतिक कारणों से कुछ कहने पर क्या वह सच हो जाती है? हमने यह सब देखा था।"
शशिकला बोलीं- वो ही जिम्मेदारी बहुत भारी पड़ गई थी
शशिकला ने अपनी कानूनी मुश्किलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "फिर फैसला जल्दी आया। इसमें चार साल की जेल की सजा सुनाई गई। मुझे उसका डर नहीं था। मुझे बिल्कुल भी डर नहीं था। मेरा पूरा ध्यान इस बात पर था कि सरकार नहीं गिरनी चाहिए। हमारी सरकार बनी रहनी चाहिए। वह जिम्मेदारी मुझ पर बहुत भारी थी।"
उन्होंने बताया कि फैसले के बाद उन्होंने आत्मसमर्पण से पहले कुछ काम खत्म करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा था। हालांकि, दिल्ली के न्यायाधीश ने यह कहते हुए मना कर दिया कि सजा कम नहीं की जा सकती और उन्हें अगले दिन शाम 6:00 बजे तक बेंगलुरु जेल में आत्मसमर्पण करना होगा।
शशिकला ने कहा, "मैंने तत्काल सभी विधायकों को इकट्ठा किया, उन्हें एक साथ बिठाया और उनसे बात करनी शुरू कर दी, उन्हें वह सब कुछ बताया जो कहने की जरूरत थी। चूंकि मुझे अगले ही दिन बेंगलुरु जेल के लिए रवाना होना पड़ा, मैंने तत्काल सभी विधानसभा सदस्यों की बैठक बुलाई और मुख्यमंत्री पद किसे संभालना चाहिए (ईपीएस) इस पर एक निर्णायक निर्णय लिया।"
उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, "मैं इस समय उनका (ईपीएस) नाम भी नहीं लेना चाहती। वे इतने लायक नहीं हैं कि मैं उनका नाम लूं। जिन लोगों को हमने सत्ता के पदों पर बिठाया, उन्होंने हमें ऐसे पीठ में छुरा घोंपा है, जैसे हर तरफ से भालों से वार किया हो।"












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